
देहरादून: उत्तराखंड की सियासत एक बार फिर गरमाने वाली है, क्योंकि कांग्रेस की प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा आगामी 4 मई से राज्य के दौरे पर आने वाली हैं। इस बार उनका फोकस खास तौर पर गढ़वाल मंडल के चार जिलों पर रहेगा, जहां वे संगठन को मजबूत करने और चुनावी रणनीति को धार देने के उद्देश्य से कार्यकर्ताओं और नेताओं के साथ सीधा संवाद करेंगी।
कांग्रेस सूत्रों के अनुसार, कुमारी शैलजा का यह दौरा महज औपचारिक नहीं होगा, बल्कि इसे संगठनात्मक मजबूती के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। वह न केवल बड़ी बैठकों में हिस्सा लेंगी, बल्कि कार्यकर्ताओं के साथ वन-टू-वन बातचीत कर उनकी समस्याएं, सुझाव और स्थानीय स्तर की राजनीतिक परिस्थितियों को समझने की कोशिश करेंगी।
इससे पहले भी कुमारी शैलजा अप्रैल महीने में उत्तराखंड के दौरे पर आई थीं। 8 अप्रैल से शुरू हुए उनके उस दौरे में उन्होंने कुमाऊं और गढ़वाल दोनों क्षेत्रों में कई महत्वपूर्ण बैठकों में हिस्सा लिया था। उन्होंने उधम सिंह नगर के रुद्रपुर से अपने दौरे की शुरुआत की थी, जहां उन्होंने जिला और महानगर कांग्रेस कमेटियों के पदाधिकारियों के साथ बैठक कर संगठनात्मक गतिविधियों की समीक्षा की थी। इसके बाद उन्होंने काशीपुर, हल्द्वानी और कोटद्वार में भी कार्यकर्ताओं के साथ संवाद किया।
अपने पिछले दौरे के दौरान शैलजा ने हरिद्वार और मसूरी में भी महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में हिस्सा लिया था। मसूरी में आयोजित बैठक में उन्होंने प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ आगामी चुनावों को लेकर रणनीति पर चर्चा की थी। उन्होंने साफ तौर पर कहा था कि संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करना ही पार्टी की प्राथमिकता होनी चाहिए।
अब एक बार फिर उनका उत्तराखंड दौरा प्रस्तावित है, जो 4 मई से शुरू होकर 10 या 11 मई तक चल सकता है। इस दौरान वे गढ़वाल मंडल के चार जिलों में जाएंगी और वहां अलग-अलग स्तर पर बैठकों का आयोजन करेंगी। खास बात यह है कि इस बार बैठकों का स्वरूप अधिक इंटरैक्टिव होगा, जहां कार्यकर्ताओं को सीधे प्रभारी के सामने अपनी बात रखने का अवसर मिलेगा।
कांग्रेस नेताओं का मानना है कि यह दौरा चुनावी दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है। राज्य में आगामी चुनावों को देखते हुए पार्टी अभी से अपनी तैयारियों को मजबूत करने में जुट गई है। कुमारी शैलजा के लगातार दौरे इस बात का संकेत हैं कि कांग्रेस संगठन को सक्रिय और एकजुट करने की दिशा में गंभीरता से काम कर रही है।
सूत्रों के मुताबिक, इस दौरान शैलजा विभिन्न ग्रुपों में भी बैठकें करेंगी, जहां सीमित संख्या में कार्यकर्ताओं को बुलाया जाएगा। इन बैठकों में कार्यकर्ताओं को खुलकर अपनी बात रखने का मौका मिलेगा। साथ ही, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया है कि कोई भी नेता या कार्यकर्ता उनसे व्यक्तिगत रूप से भी मिल सकता है और अपनी बात साझा कर सकता है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस तरह के दौरे पार्टी के लिए मनोबल बढ़ाने का काम करते हैं। लंबे समय से संगठन में सक्रियता की कमी को लेकर जो सवाल उठ रहे थे, उन्हें दूर करने के लिए यह कदम अहम माना जा रहा है। लगातार जमीनी स्तर पर संवाद से कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा का संचार होता है, जो चुनावी समय में बेहद जरूरी होता है।
कांग्रेस पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि इस बार पार्टी “दोगुनी ताकत” के साथ चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी कर रही है। इसके लिए संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करना, कार्यकर्ताओं को सक्रिय करना और स्थानीय मुद्दों को प्राथमिकता देना रणनीति का हिस्सा है।
कुल मिलाकर, कुमारी शैलजा का यह प्रस्तावित दौरा उत्तराखंड कांग्रेस के लिए एक बड़ा अवसर माना जा रहा है। यह न केवल संगठन को मजबूत करने में मदद करेगा, बल्कि आगामी चुनावों के लिए एक मजबूत आधार भी तैयार करेगा। अब देखना यह होगा कि इस दौरे का असर पार्टी के प्रदर्शन पर कितना पड़ता है और क्या कांग्रेस अपने लक्ष्य को हासिल कर पाती है या नहीं।



