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उत्तराखंड: देहरादून में प्रॉपर्टी फर्जीवाड़ा, भाई पर एमडीडीए कर्मियों से मिलीभगत कर फर्जी नक्शा पास कराने का आरोप

The Hill India News
Last updated: April 23, 2026 6:21 am
The Hill India News
Published: April 23, 2026
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देहरादून: राजधानी देहरादून से प्रॉपर्टी फर्जीवाड़े का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक व्यक्ति ने अपने ही भाई पर गंभीर आरोप लगाए हैं। शिकायतकर्ता का दावा है कि उसके भाई ने एमडीडीए (मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण) के कुछ कर्मचारियों के साथ मिलकर फर्जी दस्तावेज तैयार किए, नक्शा पास कराया और फिर उस जमीन पर निर्माण कार्य भी शुरू कर दिया। इस मामले के सामने आने के बाद पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

जानकारी के अनुसार, राजपुर रोड निवासी प्रेम भूटानी ने इस पूरे प्रकरण को लेकर उच्च अधिकारियों से शिकायत की थी। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके भाई ने सुनियोजित तरीके से धोखाधड़ी करते हुए उनके नाम और अधिकारों को हटाकर अपने नाम से नक्शा पास करा लिया। इस पूरे मामले में एमडीडीए के कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत भी सामने आ रही है, जिससे मामला और गंभीर हो गया है।

प्रेम भूटानी के अनुसार, उन्हें इस फर्जीवाड़े की जानकारी तब हुई जब साल 2024 में उनके प्लॉट पर निर्माण कार्य शुरू हुआ। पहले तो उन्हें लगा कि कोई गलतफहमी है, लेकिन जब उन्होंने मामले की गहराई से जांच की, तो सच्चाई सामने आई। इसके बाद उन्होंने एमडीडीए से 24 अक्टूबर 2024 को लिखित रूप में जानकारी मांगी और नक्शा पास कराने से जुड़े दस्तावेजों की प्रतियां प्राप्त करने की कोशिश की।

दस्तावेजों की जांच में यह खुलासा हुआ कि 3 जून 2023 और 8 अगस्त 2023 को एमडीडीए में ऐसे शपथ पत्र जमा किए गए थे, जिन पर प्रेम भूटानी के फर्जी हस्ताक्षर किए गए थे। यही नहीं, 3 अगस्त 2023 के शपथ पत्र के लिए इस्तेमाल किया गया स्टांप पेपर 21 जुलाई 2023 को खरीदा गया था, जिससे यह साफ होता है कि पूरी साजिश पहले से योजनाबद्ध थी। आरोप है कि इन दस्तावेजों के आधार पर नक्शा पास कराया गया और फिर निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया।

इस मामले में एमडीडीए द्वारा एक आंतरिक जांच भी कराई गई थी, जिसकी रिपोर्ट 10 फरवरी 2025 को प्रस्तुत की गई। इस रिपोर्ट में भी कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। रिपोर्ट के अनुसार, आरोपी भाई ने फर्जी तरीके से नक्शे से प्रेम भूटानी का नाम हटा दिया और अपने नाम से प्राधिकरण से मानचित्र स्वीकृत करा लिया। इतना ही नहीं, दस्तावेजों पर किए गए हस्ताक्षर भी जाली पाए गए।

इस पूरे मामले में यह भी सामने आया है कि आरोपी ने प्राधिकरण के कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत से यह फर्जीवाड़ा किया और अनुचित लाभ उठाया। इससे एमडीडीए की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। आम जनता के बीच यह चिंता बढ़ रही है कि यदि सरकारी संस्थाओं में इस तरह की मिलीभगत होती रही, तो संपत्ति से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और सुरक्षा पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रेम भूटानी ने उच्च अधिकारियों से कार्रवाई की मांग की। उनकी शिकायत के आधार पर पुलिस ने आरोपी भाई, उसके सहयोगियों और एमडीडीए के अज्ञात कर्मचारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है।

नगर कोतवाली प्रभारी हरि ओम चौहान ने बताया कि शिकायत के आधार पर केस दर्ज कर लिया गया है और मामले की जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

यह मामला न केवल पारिवारिक विवाद का है, बल्कि इसमें सरकारी तंत्र की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। ऐसे मामलों से यह स्पष्ट होता है कि दस्तावेजों की जांच और सत्यापन प्रक्रिया को और अधिक मजबूत करने की जरूरत है। साथ ही, दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर एक उदाहरण पेश करना भी जरूरी है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर रोक लगाई जा सके।

फिलहाल पुलिस जांच जारी है और सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि इस हाई-प्रोफाइल मामले में आगे क्या खुलासे होते हैं और दोषियों पर क्या कार्रवाई की जाती है।

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