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उत्तराखंडफीचर्ड

काशीपुर किसान सुसाइड केस: ‘न्याय नहीं तो आंदोलन’, किसान सुखदेव सिंह की मौत पर परिजनों ने प्रशासन को दी अल्टीमेटम

The Hill India News
Last updated: January 12, 2026 2:53 am
The Hill India News
Published: January 12, 2026
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काशीपुर/हल्द्वानी। उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र में एक प्रगतिशील किसान की आत्महत्या ने राज्य की कानून व्यवस्था और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हल्द्वानी के काठगोदाम स्थित एक होटल में खुद को गोली मारकर मौत के गले लगाने वाले किसान सुखदेव सिंह का शव जब उनके पैतृक नगर काशीपुर पहुंचा, तो पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई। परिजनों के करुण क्रंदन और आक्रोशित किसानों की भीड़ ने अब इस मामले को एक बड़े आंदोलन का रूप दे दिया है।

Contents
शव पहुंचते ही उमड़ा जनसैलाब, माहौल तनावपूर्णसुसाइड वीडियो: ‘अधिकारियों और ठगों ने बनाया मौत का आधार’मुख्यमंत्री ने दिए मजिस्ट्रेट जांच के आदेशआर्थिक और मानसिक प्रताड़ना की कहानीप्रशासनिक चुनौती और आगे की राह

मृतक के परिजनों ने सरकार और प्रशासन के समक्ष तीन सूत्रीय मांगें रखी हैं और चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समय तक कार्रवाई नहीं हुई, तो वे शव के साथ प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे।

शव पहुंचते ही उमड़ा जनसैलाब, माहौल तनावपूर्ण

देर शाम जब किसान सुखदेव सिंह का पार्थिव शरीर पोस्टमार्टम के बाद काशीपुर पहुंचा, तो वहां पहले से ही सैकड़ों की संख्या में किसान, रिश्तेदार और स्थानीय लोग मौजूद थे। माहौल उस वक्त बेहद गमगीन और तनावपूर्ण हो गया जब परिजनों ने मृतक के अंतिम संस्कार से पहले न्याय की गुहार लगाई। किसानों के बड़े समूहों ने मृतक के घर पर डेरा डाल दिया है, जिसे देखते हुए सुरक्षा के भी पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।

सुसाइड वीडियो: ‘अधिकारियों और ठगों ने बनाया मौत का आधार’

परिजनों का सबसे बड़ा आरोप उन लोगों पर है जिनका नाम सुखदेव सिंह ने मरने से पहले रिकॉर्ड किए गए एक वीडियो में लिया है। परिजनों का दावा है कि सुखदेव सिंह ने आत्महत्या से ठीक पहले एक वीडियो साक्ष्य (Video Evidence) बनाया था, जिसमें उन्होंने स्पष्ट रूप से कुछ रसूखदार लोगों और प्रशासनिक अधिकारियों को अपनी मौत के लिए जिम्मेदार ठहराया है।

परिजनों की प्रमुख मांगें:

  1. वीडियो को मुख्य साक्ष्य माना जाए: परिवार की पहली मांग है कि इस वीडियो को ठोस डिजिटल एविडेंस माना जाए और इसमें नामजद सभी आरोपियों व अधिकारियों के खिलाफ तत्काल हत्या के लिए उकसाने का मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तारी की जाए।

  2. संपत्ति की कुर्की और वसूली: किसानों का आरोप है कि सुखदेव सिंह के साथ करोड़ों रुपये की ठगी की गई थी। ठगों ने उन्हें न केवल आर्थिक रूप से कंगाल किया, बल्कि मानसिक रूप से इस कदर प्रताड़ित किया कि उन्होंने आत्मघाती कदम उठा लिया। परिजनों की मांग है कि ठगों की संपत्तियां कुर्क कर उन्हें बेचकर ठगी गई रकम परिवार को वापस दिलाई जाए।

  3. समय सीमा का अल्टीमेटम: परिजनों और किसान संगठनों ने प्रशासन को आज दोपहर 12 बजे तक का समय दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि इस समय सीमा के भीतर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो वे शव को थाना आईटीआई के सामने रखकर विशाल प्रदर्शन करेंगे।

मुख्यमंत्री ने दिए मजिस्ट्रेट जांच के आदेश

मामले की गंभीरता और बढ़ते राजनीतिक दबाव को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने तत्काल प्रभाव से इस पूरे प्रकरण की मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दे दिए हैं। सरकार ने जांच की जिम्मेदारी कुमाऊं कमिश्नर दीपक रावत को सौंपी है। मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा और जांच निष्पक्ष तरीके से की जाएगी।

हालांकि, विपक्षी दल कांग्रेस ने सरकार के इस कदम को नाकाफी बताया है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि जब मामला स्पष्ट रूप से ठगी और प्रशासनिक लापरवाही का है, तो अब तक आरोपियों की गिरफ्तारी क्यों नहीं हुई? उत्तराखंड किसान सुसाइड के इस मामले ने अब सियासी रंग भी लेना शुरू कर दिया है।

आर्थिक और मानसिक प्रताड़ना की कहानी

सुखदेव सिंह के करीबी बताते हैं कि वे एक मेहनती और सम्मानित किसान थे। पिछले कुछ समय से वे कुछ जमीनी सौदों और व्यापारिक लेन-देन में ठगी का शिकार हुए थे। आरोप है कि उन्होंने न्याय के लिए कई बार प्रशासनिक दरवाजों पर दस्तक दी, लेकिन उन्हें मदद के बजाय आश्वासन ही मिले। इसी ‘सिस्टम’ की बेरुखी और करोड़ों के कर्ज के बोझ ने उन्हें काठगोदाम के होटल में अपनी जीवनलीला समाप्त करने पर मजबूर कर दिया।

प्रशासनिक चुनौती और आगे की राह

प्रशासन के लिए अब सबसे बड़ी चुनौती दोपहर 12 बजे की समय सीमा है। काशीपुर और हल्द्वानी की पुलिस सतर्क है और खुफिया विभाग स्थिति पर नजर बनाए हुए है। कुमाऊं कमिश्नर दीपक रावत ने कहा है कि जांच पारदर्शी होगी और साक्ष्यों के आधार पर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

लेकिन सवाल वही है कि क्या जांच के नाम पर होने वाली देरी पीड़ित परिवार के जख्मों पर मरहम लगा पाएगी? क्या उत्तराखंड में किसानों को ठगने वाले ‘सफेदपोश’ और भ्रष्ट अधिकारी कानून के शिकंजे में आएंगे? फिलहाल, पूरा काशीपुर इस समय न्याय की उम्मीद में अपनी सांसें थामे बैठा है।


किसान सुखदेव सिंह आत्महत्या मामला केवल एक व्यक्ति की मौत नहीं, बल्कि उस पीड़ा का प्रतीक है जिसे आज का अन्नदाता झेल रहा है। ठगी, कर्ज और प्रशासनिक उदासीनता के इस कॉकटेल ने एक और हंसते-खेलते परिवार को उजाड़ दिया है। अब देखना यह होगा कि धामी सरकार इस मामले में कितनी तेजी से कार्रवाई कर किसानों के विश्वास को बहाल करती है।

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