नई दिल्ली। इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल करने वाले टैक्सपेयर्स के लिए आज यानी 31 अगस्त 2026 बेहद महत्वपूर्ण तारीख है। असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए ऐसे नॉन-ऑडिट बिजनेस और प्रोफेशनल टैक्सपेयर्स, जिनके लिए ITR दाखिल करने की यह निर्धारित समयसीमा लागू है, उन्हें समय पर अपना रिटर्न दाखिल करने के साथ उसका ई-वेरिफिकेशन भी पूरा करना जरूरी है। आखिरी तारीख निकलने के बाद रिटर्न दाखिल करने पर यह प्रक्रिया बिलेटेड रिटर्न के तौर पर करनी पड़ सकती है और टैक्सपेयर को अतिरिक्त शुल्क या कुछ टैक्स लाभों के नुकसान का सामना करना पड़ सकता है।
इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करते समय सबसे बड़ी चुनौती सिर्फ समय पर फॉर्म जमा करना नहीं है, बल्कि सही ITR फॉर्म चुनना, आय का सही विवरण देना, टीडीएस का मिलान करना और टैक्स रिजीम का सही चुनाव करना भी है। खासतौर पर फ्रीलांसर्स, डॉक्टर, वकील, इंजीनियर, कंसल्टेंट और छोटे कारोबारियों को रिटर्न भरते समय कई बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
31 अगस्त की डेडलाइन निकल गई तो क्या होगा?
अगर कोई पात्र टैक्सपेयर निर्धारित अंतिम तारीख तक अपना ITR दाखिल नहीं कर पाता है, तो आयकर कानून के तहत बिलेटेड रिटर्न दाखिल करने का विकल्प उपलब्ध होता है। यानी समयसीमा निकलने के बाद भी रिटर्न दाखिल किया जा सकता है, लेकिन इसके लिए लागू नियमों के अनुसार लेट फाइलिंग फीस देनी पड़ सकती है। इसके अलावा देर से रिटर्न दाखिल करने पर कुछ टैक्स लाभ और नुकसान को आगे ले जाने की सुविधा प्रभावित हो सकती है।
इसलिए आखिरी समय तक इंतजार करने के बजाय टैक्सपेयर्स को जल्द से जल्द अपनी जानकारी तैयार करके रिटर्न जमा करना चाहिए। सिर्फ ITR सबमिट कर देना पर्याप्त नहीं माना जाना चाहिए; रिटर्न का वेरिफिकेशन भी समय पर पूरा करना जरूरी है।
1. सबसे पहले सही ITR फॉर्म चुनें
फ्रीलांसर्स और बिजनेस या प्रोफेशन से आय अर्जित करने वाले टैक्सपेयर्स को सबसे पहले यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनके लिए कौन-सा ITR फॉर्म लागू होता है। बिजनेस या प्रोफेशन से होने वाली आय वाले हर व्यक्ति के लिए ITR-1 या ITR-2 सही फॉर्म नहीं होता।
ऐसे मामलों में परिस्थितियों के अनुसार ITR-3 या ITR-4 लागू हो सकता है। गलत फॉर्म चुनकर रिटर्न दाखिल करने से आगे चलकर परेशानी हो सकती है और आयकर विभाग की ओर से स्पष्टीकरण मांगा जा सकता है। इसलिए रिटर्न भरने से पहले अपनी आय की प्रकृति और लागू ITR फॉर्म को अच्छी तरह जांचना जरूरी है।
2. सेक्शन 44ADA को लेकर न करें जल्दबाजी
कई फ्रीलांसर्स यह मान लेते हैं कि उनकी हर तरह की प्रोफेशनल या स्वतंत्र आय पर धारा 44ADA के तहत प्रिजम्प्टिव टैक्सेशन लागू हो जाएगा। ऐसा जरूरी नहीं है।
धारा 44ADA कुछ निर्दिष्ट प्रोफेशनल सेवाओं पर लागू होती है। इसलिए किसी भी फ्रीलांसर को सिर्फ इसलिए इस प्रावधान का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए क्योंकि वह स्वतंत्र रूप से काम करता है। अपनी पेशेवर गतिविधि की प्रकृति और लागू नियमों की जांच करने के बाद ही इसका विकल्प चुनना चाहिए।
3. टैक्स रिजीम चुनते समय रहें बेहद सावधान
रिटर्न दाखिल करते समय पुरानी और नई टैक्स व्यवस्था में से सही विकल्प चुनना भी महत्वपूर्ण है। खासकर वे टैक्सपेयर्स जो पुरानी टैक्स व्यवस्था का लाभ लेना चाहते हैं, उन्हें लागू नियमों और आवश्यक फॉर्म की प्रक्रिया का ध्यान रखना चाहिए।
आपके लिए कौन-सी टैक्स व्यवस्था फायदेमंद है, यह आपकी आय, निवेश, कटौतियों और उपलब्ध टैक्स लाभों पर निर्भर करता है। इसलिए बिना हिसाब लगाए केवल किसी दूसरे व्यक्ति की सलाह पर टैक्स रिजीम चुनना सही नहीं है।
4. बिजनेस खर्चों का सही रिकॉर्ड रखें
फ्रीलांसर्स और छोटे कारोबारियों के लिए खर्चों का सही हिसाब रखना बेहद जरूरी है। एक तरफ कुछ लोग व्यक्तिगत खर्चों को बिजनेस खर्च के रूप में दिखाने की गलती कर देते हैं, वहीं दूसरी तरफ वास्तविक और पात्र कारोबारी खर्चों का दावा करना भूल जाते हैं।
इंटरनेट खर्च, जरूरी सॉफ्टवेयर सब्सक्रिप्शन, काम के लिए इस्तेमाल होने वाले उपकरणों की पात्र लागत या डिप्रेशिएशन जैसे खर्च परिस्थितियों के अनुसार महत्वपूर्ण हो सकते हैं। हालांकि किसी भी खर्च का दावा करने से पहले यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वह वास्तव में व्यवसाय या पेशे से संबंधित और नियमों के अनुसार पात्र है।
5. बैंक खाते में आई रकम को ही पूरी आय न मानें
फ्रीलांसर्स के लिए यह एक आम गलती हो सकती है। उदाहरण के लिए किसी क्लाइंट ने ₹1 लाख की फीस जारी की, लेकिन टीडीएस या प्लेटफॉर्म शुल्क कटने के बाद बैंक खाते में कम रकम पहुंची। ऐसी स्थिति में केवल बैंक खाते में प्राप्त नेट रकम देखकर आय घोषित करना गलत हो सकता है।
टैक्सपेयर को अपनी ग्रॉस रिसीट, टीडीएस और लागू शुल्क का सही हिसाब रखना चाहिए। बैंक स्टेटमेंट, इनवॉइस और Form 26AS/AIS जैसे दस्तावेजों का मिलान करके ही आय का विवरण भरना बेहतर है।
6. AIS और Form 26AS का मिलान जरूर करें
ITR दाखिल करने से पहले Annual Information Statement (AIS) और Form 26AS की जांच करना बेहद महत्वपूर्ण है। इनमें दिखाई देने वाली आय, टीडीएस और अन्य वित्तीय जानकारी को अपने रिकॉर्ड से मिलाएं।
अगर आपके हिसाब से किसी भुगतान या टीडीएस की जानकारी गलत दिखाई दे रही है, तो रिटर्न दाखिल करने से पहले उपलब्ध सुधार प्रक्रिया का इस्तेमाल करना चाहिए। AIS या Form 26AS और ITR में बड़े अंतर होने पर आयकर विभाग की ओर से सवाल या नोटिस आ सकता है।
7. विदेशी आय और संपत्ति की जानकारी न छिपाएं
जिन टैक्सपेयर्स की विदेशी क्लाइंट्स से आय है या जिनके पास विदेश में बैंक खाता, निवेश अथवा अन्य रिपोर्ट योग्य संपत्ति है, उन्हें रिटर्न भरते समय लागू विदेशी आय और संपत्ति संबंधी विवरण का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
विदेश से प्राप्त आय को सिर्फ इसलिए नजरअंदाज नहीं किया जा सकता क्योंकि भुगतान विदेशी बैंक या किसी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से आया है। ऐसे मामलों में लागू नियमों के अनुसार संबंधित शेड्यूल में सही जानकारी देना जरूरी हो सकता है।
आखिरी समय में ये दस्तावेज जरूर जांच लें
ITR जमा करने से पहले टैक्सपेयर को PAN, आधार, बैंक स्टेटमेंट, Form 26AS, AIS, TDS सर्टिफिकेट, निवेश संबंधी दस्तावेज, बिजनेस या प्रोफेशनल आय का रिकॉर्ड और जरूरी खर्चों के प्रमाण तैयार रखने चाहिए। सभी आंकड़ों को आपस में मिलाने के बाद ही रिटर्न फाइल करना बेहतर है।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ITR दाखिल करने के बाद उसका वेरिफिकेशन जरूर करें। यदि रिटर्न जमा करने के बावजूद निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार वेरिफिकेशन पूरा नहीं किया जाता, तो रिटर्न की प्रक्रिया अधूरी रह सकती है।
इसलिए 31 अगस्त की समयसीमा वाले टैक्सपेयर्स के लिए आज का दिन बेहद अहम है। आखिरी समय में पोर्टल पर तकनीकी समस्या, दस्तावेजों की कमी या जानकारी में गलती से बचने के लिए रिटर्न जल्द दाखिल करना समझदारी होगी। सही फॉर्म, सही आय, सही टैक्स रिजीम और सही दस्तावेज—इन चार बातों का ध्यान रखकर टैक्सपेयर न सिर्फ समय पर ITR दाखिल कर सकता है, बल्कि भविष्य में अनावश्यक टैक्स नोटिस और जुर्माने जैसी परेशानियों से भी बच सकता है।
