By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
The Hill IndiaThe Hill IndiaThe Hill India
Notification Show More
Font ResizerAa
  • होम
  • फीचर्ड
  • उत्तराखंड
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • पर्यावरण
  • क्राइम
  • पर्यटन
  • शिक्षा
  • स्वास्थय
  • सामाजिक
  • स्पोर्ट्स
  • वीडियो
  • Contact Us
Reading: जापान की देरी के बीच भारत का बड़ा फैसला: 2027 से दौड़ेगी स्वदेशी बुलेट ट्रेन B-28, हाई स्पीड रेल परियोजना को मिली नई रफ्तार
Share
Font ResizerAa
The Hill IndiaThe Hill India
  • होम
  • फीचर्ड
  • उत्तराखंड
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • पर्यावरण
  • क्राइम
  • पर्यटन
  • शिक्षा
  • स्वास्थय
  • सामाजिक
  • स्पोर्ट्स
  • वीडियो
  • Contact Us
Search
  • होम
  • फीचर्ड
  • उत्तराखंड
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • पर्यावरण
  • क्राइम
  • पर्यटन
  • शिक्षा
  • स्वास्थय
  • सामाजिक
  • स्पोर्ट्स
  • वीडियो
  • Contact Us
Have an existing account? Sign In
Follow US
The Hill India > Blog > देश > जापान की देरी के बीच भारत का बड़ा फैसला: 2027 से दौड़ेगी स्वदेशी बुलेट ट्रेन B-28, हाई स्पीड रेल परियोजना को मिली नई रफ्तार
देशफीचर्ड

जापान की देरी के बीच भारत का बड़ा फैसला: 2027 से दौड़ेगी स्वदेशी बुलेट ट्रेन B-28, हाई स्पीड रेल परियोजना को मिली नई रफ्तार

The Hill India News
Last updated: July 20, 2026 6:17 am
The Hill India News
Published: July 20, 2026
Share
SHARE

भारत की बहुप्रतीक्षित मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल परियोजना को लेकर लंबे समय से उठ रहे सवालों के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। जापान से मिलने वाली नई पीढ़ी की E10 शिंकान्सेन ट्रेनों की डिलीवरी में हो रही देरी के कारण अब भारत ने स्वदेशी हाई स्पीड ट्रेन B-28 के साथ इस परियोजना की शुरुआत करने का निर्णय लिया है। सरकार का लक्ष्य है कि 15 अगस्त 2027 तक सूरत से बिलिमोरा के बीच पहले चरण में हाई स्पीड रेल सेवा शुरू कर दी जाए, ताकि देश में बुलेट ट्रेन का सपना और अधिक विलंबित न हो।

मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना भारत की सबसे महत्वाकांक्षी परिवहन परियोजनाओं में से एक है। लगभग 508 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर का निर्माण कार्य तेजी से जारी है। परियोजना में जापान तकनीकी सहयोग और वित्तीय सहायता प्रदान कर रहा है। शुरुआत में योजना थी कि इस कॉरिडोर पर जापान की अत्याधुनिक E10 सीरीज की शिंकान्सेन ट्रेनें चलाई जाएंगी, लेकिन चूंकि E10 ट्रेनें अभी विकास के चरण में हैं और उनके 2030 से पहले उपलब्ध होने की संभावना नहीं है, इसलिए भारत ने स्वदेशी विकल्प अपनाने का निर्णय लिया है।

सरकार के इस फैसले को ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। अब शुरुआती संचालन भारतीय तकनीक से तैयार की जा रही हाई स्पीड ट्रेन B-28 के जरिए किया जाएगा। इस निर्णय का सबसे बड़ा उद्देश्य यह है कि परियोजना तय समय पर शुरू हो सके और यात्रियों को वर्षों तक इंतजार न करना पड़े।

स्वदेशी B-28 हाई स्पीड ट्रेन का निर्माण भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड (BEML) और इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) के सहयोग से किया जा रहा है। ट्रेन के डिजाइन और निर्माण में भारतीय इंजीनियरों के साथ-साथ उच्च तकनीकी संस्थानों की विशेषज्ञता का भी उपयोग किया जा रहा है। बेंगलुरु स्थित विशेष निर्माण केंद्र में इस ट्रेन के कोच तैयार किए जा रहे हैं। यह परियोजना केवल एक ट्रेन निर्माण कार्यक्रम नहीं, बल्कि भारत में हाई स्पीड रेल तकनीक विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

B-28 ट्रेन की खासियत इसकी आधुनिक डिजाइन और उच्च गति है। शुरुआती चरण में इस ट्रेन के आठ कोच होंगे, जिनमें लगभग 560 यात्रियों के बैठने की क्षमता होगी। ट्रेन की अधिकतम परिचालन गति 250 से 280 किलोमीटर प्रति घंटा होगी। हालांकि यह गति जापान की E10 शिंकान्सेन या E5 सीरीज की ट्रेनों से कुछ कम है, लेकिन भारतीय परिस्थितियों और शुरुआती संचालन के लिए इसे पर्याप्त माना जा रहा है। भविष्य में आवश्यकता के अनुसार ट्रेन के कोचों की संख्या और तकनीकी क्षमताओं में भी विस्तार किया जा सकेगा।

जापान की E10 शिंकान्सेन ट्रेनें लगभग 320 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने के लिए विकसित की जा रही हैं। लेकिन चूंकि उनका विकास कार्य अभी पूरा नहीं हुआ है, इसलिए जापान भारत को इन ट्रेनों की आपूर्ति 2030 के शुरुआती वर्षों से पहले नहीं कर पाएगा। यदि भारत केवल जापानी ट्रेनों का इंतजार करता, तो मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल परियोजना कई वर्षों तक आगे खिसक सकती थी। इसी संभावना को देखते हुए भारत और जापान ने मिलकर यह निर्णय लिया कि शुरुआती सेवाएं भारतीय हाई स्पीड ट्रेन से शुरू की जाएंगी और बाद में आवश्यकता अनुसार E10 ट्रेनों को शामिल किया जाएगा।

परियोजना के निर्माण कार्य की बात करें तो अधिकांश सिविल इंफ्रास्ट्रक्चर तेजी से तैयार किया जा रहा है। पुल, सुरंगें, एलिवेटेड ट्रैक, स्टेशन और अन्य आवश्यक ढांचे पर तेजी से काम चल रहा है। भारत इस परियोजना में निर्माण कार्य का बड़ा हिस्सा स्वयं कर रहा है। इससे देश में इंजीनियरिंग क्षमता, निर्माण तकनीक और बड़े बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करने का अनुभव भी बढ़ रहा है।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि स्वदेशी B-28 ट्रेन आधुनिक अंतरराष्ट्रीय सिग्नलिंग प्रणाली यूरोपियन ट्रेन कंट्रोल सिस्टम (ETCS) पर संचालित होगी। यही तकनीक यूरोप के कई देशों, दक्षिण कोरिया, चीन, ताइवान और भारत की नमो भारत (रैपिड रेल) परियोजना में भी उपयोग की जा रही है। इस प्रणाली की मदद से ट्रेनों की गति, सुरक्षा और संचालन को अत्यधिक सटीक तरीके से नियंत्रित किया जा सकता है। इससे यात्रियों को सुरक्षित और विश्वसनीय यात्रा अनुभव मिलने की उम्मीद है।

हाई स्पीड रेल परियोजना के माध्यम से केवल तेज यात्रा ही नहीं, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था को भी बड़ा लाभ मिलने की संभावना है। तेज परिवहन व्यवस्था से व्यापार, पर्यटन, निवेश और औद्योगिक विकास को नई गति मिलेगी। मुंबई और अहमदाबाद जैसे बड़े आर्थिक केंद्रों के बीच यात्रा का समय काफी कम हो जाएगा, जिससे उद्योगों, व्यापारिक गतिविधियों और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। साथ ही हाई स्पीड रेल तकनीक में भारत की आत्मनिर्भरता भी मजबूत होगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि स्वदेशी हाई स्पीड ट्रेन के निर्माण से भारत भविष्य में अन्य हाई स्पीड रेल परियोजनाओं के लिए भी अपनी तकनीक विकसित कर सकेगा। इससे विदेशी तकनीक पर निर्भरता कम होगी और घरेलू उद्योगों को भी बढ़ावा मिलेगा। हाई स्पीड ट्रेन के लिए आवश्यक उपकरण, ट्रैक सिस्टम, इलेक्ट्रिकल सिस्टम, कंट्रोल तकनीक और अन्य महत्वपूर्ण पुर्जों का निर्माण भी भारत में होने से स्थानीय विनिर्माण क्षेत्र को नई ऊर्जा मिलेगी।

मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल परियोजना को भविष्य में देश के अन्य हिस्सों तक विस्तार देने की भी योजना है। केंद्र सरकार सात नए संभावित बुलेट ट्रेन कॉरिडोरों पर अध्ययन कर रही है। इनमें दिल्ली-वाराणसी, दिल्ली-वाराणसी-सिलीगुड़ी, मुंबई-पुणे, पुणे-हैदराबाद, हैदराबाद-बेंगलुरु, हैदराबाद-चेन्नई तथा चेन्नई-बेंगलुरु जैसे महत्वपूर्ण मार्ग शामिल हैं। यदि ये परियोजनाएं चरणबद्ध तरीके से साकार होती हैं तो भारत में हाई स्पीड रेल का एक व्यापक नेटवर्क विकसित हो सकता है, जिससे देश के प्रमुख आर्थिक और औद्योगिक शहर अत्याधुनिक परिवहन प्रणाली से जुड़ जाएंगे।

हाल के दिनों में जापान के कुछ राजनीतिक नेताओं द्वारा इस परियोजना को लेकर सवाल भी उठाए गए थे। सोशल मीडिया पर यह दावा किया गया कि परियोजना में देरी भारत की वजह से हुई है। हालांकि भारतीय पक्ष का कहना है कि परियोजना का सिविल निर्माण कार्य लगातार प्रगति पर है और भारत ने समयबद्ध संचालन सुनिश्चित करने के लिए स्वदेशी तकनीक अपनाने का निर्णय लिया है। इस फैसले से परियोजना को नई गति मिली है और दोनों देशों के बीच सहयोग भी जारी रहेगा।

कुल मिलाकर, भारत का स्वदेशी बुलेट ट्रेन B-28 के साथ आगे बढ़ने का फैसला केवल एक परिवहन परियोजना नहीं, बल्कि देश की तकनीकी क्षमता, आत्मनिर्भरता और भविष्य की हाई स्पीड रेल व्यवस्था की मजबूत नींव माना जा रहा है। यदि निर्धारित समय के अनुसार 2027 में पहला सेक्शन शुरू हो जाता है, तो यह भारतीय रेलवे के इतिहास में एक ऐतिहासिक उपलब्धि होगी। आने वाले वर्षों में यही पहल भारत को दुनिया के उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में शामिल कर सकती है, जहां आधुनिक, सुरक्षित और स्वदेशी हाई स्पीड रेल नेटवर्क व्यापक स्तर पर संचालित होगा।

You Might Also Like

कुंभ 2027 की तैयारी तेज़: धामी ने केंद्रीय विद्युत मंत्री से मांगा सहयोग, रिवरफ्रंट और आवास योजनाओं पर भी हुई चर्चा
प्रधानमंत्री मोदी से मिले कमल हासन: तमिल अस्मिता और कीलाडी की विरासत को लेकर रखी बात
बच्ची से दुष्कर्म की घटना के बाद देर रात तक बवाल
उत्तराखंड में निंदा प्रस्ताव की आहट से सियासी पारा हाई, महिला आरक्षण बिल पर फिर तेज हुई बहस
New Delhi: पुलिस ने सिर्फ 15 घंटे में 10 साल की बच्ची के अपहरण का मामला सुलझाया, आरोपी गिरफ्तार
TAGGED:Atmanirbhar BharatB28Bullet TrainHigh Speed Railindian railwaysMake in IndiaMumbai AhmedabadShinkansen
Share This Article
Facebook Email Print
Leave a Comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Follow US

Find US on Social Medias
FacebookLike
XFollow
YoutubeSubscribe
TelegramFollow
Popular News
देशफीचर्ड

जेपी नड्डा और CJP के बीच बैठक: ‘धरना प्रदर्शन समाप्त’ करने के लिए प्रदर्शनकारियों ने रखीं तीन बड़ी शर्तें, दिल्ली में तनाव बरकरार

The Hill India News
The Hill India News
July 20, 2026
बदरीनाथ धाम दान चोरी मामला: गणेश गोदियाल और BKTC अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी में आर-पार, ‘संगठित अपराध’ के आरोपों से गरमाई उत्तराखंड की सियासत
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: सुप्रीम कोर्ट सख्त, नई SIT गठित करने के निर्देश, वरिष्ठ IPS अधिकारी करेंगे जांच की अगुवाई
उत्तराखंड में बारिश का कहर: रेड अलर्ट के बीच 24 घंटे में तीन मौतें, भूस्खलन और हादसों से कई जिले प्रभावित
संसद मार्च पर बवाल: CJP प्रदर्शन के बीच पुलिस की सख्ती, नड्डा से वार्ता के बाद खत्म हुआ अनशन, कई नेताओं और प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया
50 कोशिशें, गोल्ड मेडल और टूटा सपना: सरकारी नौकरी की दौड़ में हारकर होनहार इंजीनियर ने दी जान
बरसात में मकड़ी ने काट लिया तो घबराएं नहीं! WHO के तकनीकी सलाहकार ने बताए सही इलाज के तरीके और खतरे के संकेत
उत्तराखंड में सुपरफूड किनोवा की दस्तक: थलीसैंण से शुरू होगा खेती का नया अध्याय, कम पानी में अधिक मुनाफे की उम्मीद
बेटी का भविष्य संवारने निकला परिवार काल के मुंह में समाया: समृद्धि हाईवे पर भीषण हादसे में 6 लोगों की जिंदा जलकर मौत
रुद्रप्रयाग में बारिश का रौद्र रूप: उफनाईं अलकनंदा-मंदाकिनी, हाईवे बंद, भूस्खलन से बढ़ा खतरा; प्रशासन ने जारी किया हाई अलर्ट
© The Hill India. All Rights Reserved | Developed By: Tech Yard Labs
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?