
वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर अब भारतीय शेयर बाजार पर भी साफ दिखाई देने लगा है। शुक्रवार, 8 मई को कारोबारी सप्ताह के अंतिम दिन भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत भारी गिरावट के साथ हुई। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और संभावित सैन्य टकराव की आशंका ने दुनियाभर के निवेशकों को डरा दिया है। इसका सीधा असर बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) के सेंसेक्स और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के निफ्टी पर देखने को मिला।
सुबह बाजार खुलते ही सेंसेक्स करीब 490.66 अंक टूटकर 77,353.86 के स्तर पर पहुंच गया। वहीं निफ्टी 50 भी 118.10 अंकों की गिरावट के साथ 24,208.55 पर कारोबार करता नजर आया। शुरुआती कारोबार में लगभग सभी सेक्टर्स में बिकवाली का दबाव देखने को मिला। खासकर बैंकिंग, ऑटो, आईटी और मेटल सेक्टर के शेयरों में तेज गिरावट दर्ज की गई।
विशेषज्ञों का कहना है कि बाजार में यह गिरावट केवल घरेलू कारणों से नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों की वजह से आई है। दरअसल, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने मध्य-पूर्व क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ा दी है। आशंका जताई जा रही है कि यदि यह तनाव और बढ़ता है तो वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। इसी डर के कारण कच्चे तेल यानी क्रूड ऑयल की कीमतों में अचानक उछाल देखने को मिला और इसकी कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई।
भारत जैसे देश के लिए यह स्थिति चिंता बढ़ाने वाली है क्योंकि देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयातित तेल से पूरा करता है। तेल महंगा होने से महंगाई बढ़ने का खतरा रहता है, जिससे कंपनियों की लागत बढ़ती है और अर्थव्यवस्था पर दबाव आता है। यही कारण है कि निवेशकों ने एहतियातन बाजार से पैसा निकालना शुरू कर दिया।
बाजार खुलने से पहले ही गिरावट के संकेत मिलने लगे थे। गिफ्ट निफ्टी लगभग 87 अंकों की कमजोरी के साथ ट्रेड कर रहा था, जिससे यह साफ हो गया था कि भारतीय बाजार दबाव में खुल सकते हैं। प्री-ओपनिंग सत्र में भी सेंसेक्स और निफ्टी दोनों लाल निशान में दिखाई दिए थे। सुबह 9:09 बजे सेंसेक्स 212 अंकों से ज्यादा नीचे था जबकि निफ्टी भी करीब 93 अंक कमजोर दिखाई दिया।
शेयर बाजार में गिरावट का सबसे ज्यादा असर छोटे निवेशकों पर पड़ा है। कई निवेशकों ने घबराहट में अपने शेयर बेचने शुरू कर दिए, जिससे बाजार में और दबाव बढ़ गया। हालांकि बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे समय में घबराकर फैसले लेने से बचना चाहिए। उनका कहना है कि भू-राजनीतिक तनाव का असर अक्सर अल्पकालिक होता है और स्थिति सामान्य होने पर बाजार में फिर से रिकवरी देखने को मिल सकती है।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली भी बाजार पर भारी पड़ रही है। डॉलर के मजबूत होने और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के कारण विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) भारतीय बाजार से दूरी बनाते नजर आ रहे हैं। इसके अलावा अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता भी निवेशकों की चिंता बढ़ा रही है।
अब निवेशकों की नजर अमेरिका-ईरान तनाव से जुड़े अगले घटनाक्रम और अंतरराष्ट्रीय बाजारों की चाल पर टिकी हुई है। यदि तनाव और बढ़ता है तो आने वाले दिनों में भारतीय शेयर बाजार में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। वहीं अगर कूटनीतिक स्तर पर कोई समाधान निकलता है तो बाजार में राहत की संभावना भी बन सकती है।



