हरिद्वार: धर्मनगरी हरिद्वार के ज्वालापुर क्षेत्र में एक 15 वर्षीय छात्रा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। छात्रा, जो दो दिनों से लापता थी, पुलिस द्वारा बरामद किए जाने के कुछ ही घंटों बाद रहस्यमय तरीके से दम तोड़ बैठी। इस घटना ने न केवल पुलिसिया कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि शहर में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी आक्रोश पैदा कर दिया है। रविवार को जिला अस्पताल में पोस्टमार्टम के दौरान परिजनों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने पुलिस के खिलाफ जमकर हंगामा किया, जिससे स्थिति तनावपूर्ण बनी रही।
लापता होने से बरामदगी तक का घटनाक्रम
पूरा मामला 8 मई की शाम से शुरू होता है, जब ज्वालापुर निवासी एक 15 वर्षीय नाबालिग छात्रा अपने घर से ट्यूशन जाने की बात कहकर निकली थी। जब वह देर रात तक वापस नहीं लौटी, तो परिजनों ने अनहोनी की आशंका में ज्वालापुर कोतवाली में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने तत्काल अज्ञात के खिलाफ अपहरण की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच महिला उपनिरीक्षक ललिता चुफाल को सौंप दी।
सीसीटीवी कैमरों की मदद और तकनीकी सर्विलांस के आधार पर पुलिस ने 9 मई (शनिवार) की सुबह करीब 11 बजे किशोरी को बरामद कर लिया। पुलिस के अनुसार, छात्रा ने पूछताछ में बताया कि वह अपने दोस्त ऋतिक के साथ हरिद्वार और ऋषिकेश घूमने गई थी। रात भर दोनों कनखल क्षेत्र में गंगा किनारे रुके रहे और अगली सुबह जब उसने अपनी सहेली को फोन किया, तब उसकी लोकेशन का पता चला।
अस्पताल में मौत और ‘विषाक्त पदार्थ’ का खुलासा
पुलिस की थ्योरी के अनुसार, बरामदगी के बाद छात्रा को परिजनों की सहमति से कोतवाली लाया गया और दोपहर करीब 3:30 बजे उसे उनके सुपुर्द कर दिया गया। हालांकि, कहानी में नया मोड़ तब आया जब शनिवार शाम को अचानक छात्रा की तबीयत बिगड़ गई। परिजन उसे आनन-फानन में रानीपुर मोड़ स्थित एक निजी अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
हरिद्वार के एसपी सिटी अभय सिंह ने मीडिया को बताया कि प्रारंभिक जांच और पोस्टमार्टम में मौत की वजह शरीर में मौजूद संदिग्ध ‘विषाक्त पदार्थ’ (Poisonous Substance) सामने आई है। पुलिस ने पुष्टि की है कि छात्रा के शरीर के भीतर जहरीला पदार्थ था, जिसने उसकी जान ले ली। वास्तविकता और पुख्ता सबूतों के लिए विसरा (Viscera) सुरक्षित रख लिया गया है, जिसे जांच के लिए विधि विज्ञान प्रयोगशाला (FSL) भेजा जाएगा।
परिजनों का आक्रोश: पुलिस पर लगाए गंभीर आरोप
छात्रा की मौत के बाद परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा। रविवार को जिला अस्पताल में भारी संख्या में स्थानीय लोग और राजनीतिक कार्यकर्ता एकत्र हुए। परिजनों का सीधा आरोप है कि पुलिस ने छात्रा के साथ दुर्व्यवहार किया और उनकी शिकायत पर समय रहते उचित कार्रवाई नहीं की। उनका दावा है कि यह केवल प्रेम प्रसंग या घूमने का मामला नहीं था, बल्कि छात्रा का अपहरण किया गया था और उसके साथ कुछ गलत हुआ है।
हंगामे के कारण अस्पताल परिसर में काफी समय तक कार्य बाधित रहा। हालांकि, पुलिस के आला अधिकारियों द्वारा निष्पक्ष जांच का आश्वासन देने और वीडियोग्राफी के बीच पैनल द्वारा पोस्टमार्टम कराए जाने के बाद मामला शांत हुआ और शव परिजनों के सुपुर्द किया गया।
जांच के घेरे में ‘दोस्त’ और तकनीकी साक्ष्य
पुलिस ने इस मामले में छात्रा के मित्र ऋतिक को हिरासत में लिया है और उससे गहन पूछताछ की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि ऋषिकेश से लेकर कनखल के बीच क्या हुआ था? क्या छात्रा ने खुद किसी दबाव में विषाक्त पदार्थ का सेवन किया या उसे जानबूझकर कुछ दिया गया?
एसपी सिटी अभय सिंह ने कहा:
“मामला बेहद संवेदनशील है। हमने सीसीटीवी फुटेज और छात्रा के कॉल डिटेल्स रिकॉर्ड (CDR) खंगाले हैं। शुरुआती तौर पर यह विषाक्त पदार्थ का मामला लग रहा है, लेकिन हम हर पहलू की जांच कर रहे हैं। परिजनों ने जिन लोगों पर आरोप लगाए हैं, उन्हें भी जांच के दायरे में लिया गया है। किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।”
कानूनी प्रक्रिया और वर्तमान स्थिति
ज्वालापुर पुलिस ने फिलहाल आरोपी युवक से पूछताछ के साथ-साथ छात्रा के अन्य पुरुष और महिला मित्रों के बयान दर्ज करना शुरू कर दिया है। पुलिस उन स्थानों का भी मुआयना कर रही है जहां छात्रा और उसका मित्र रुके थे।
स्थानीय निवासियों में इस घटना को लेकर गहरा रोष है। लोगों का कहना है कि नाबालिगों के खिलाफ बढ़ते अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए पुलिस को और अधिक मुस्तैद होना होगा। फिलहाल, पूरे ज्वालापुर और कनखल क्षेत्र में पुलिस की गश्त बढ़ा दी गई है और विसरा रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है, जो इस रहस्यमयी मौत की गुत्थी सुलझाने में सबसे बड़ा साक्ष्य साबित होगी।
सुलगते सवाल
हरिद्वार छात्रा संदिग्ध मौत मामले ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस द्वारा सुपुर्द किए जाने के तुरंत बाद तबीयत खराब होना और फिर शरीर में जहर मिलना, घटना को संदिग्ध बनाता है। क्या यह आत्महत्या का मामला है या हत्या की कोई बड़ी साजिश? क्या पुलिस की हिरासत या पूछताछ के दौरान कुछ ऐसा हुआ जिसने छात्रा को हताश कर दिया? इन सभी सवालों के जवाब अब फॉरेंसिक रिपोर्ट और विस्तृत पुलिस जांच पर टिके हैं।



