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तमिलनाडु में CM विजय ने संभाली कमान, 200 यूनिट मुफ्त बिजली पर लगी ‘शर्त’ और खाली खजाने ने बढ़ाई टेंशन

The Hill India News
Last updated: May 11, 2026 2:10 am
The Hill India News
Published: May 11, 2026
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चेन्नई: दक्षिण भारतीय सिनेमा के सुपरस्टार से जननायक बने सी. जोसेफ विजय, जिन्हें उनके प्रशंसक प्यार से ‘थलापति’ (कमांडर) कहते हैं, अब आधिकारिक रूप से तमिलनाडु की सत्ता के ‘कैप्टन’ बन चुके हैं। तमाम राजनीतिक उठापटक और बाधाओं को पार करते हुए विजय ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली और कार्यभार संभाल लिया है। हालांकि, सत्ता की इस कुर्सी के साथ उन्हें विरासत में फूलों की सेज नहीं, बल्कि 10 लाख करोड़ रुपये के कर्ज का कांटों भरा ताज मिला है। पदभार ग्रहण करने के चंद घंटों के भीतर ही विजय ने अपनी सरकार की प्राथमिकताएं स्पष्ट कर दी हैं, लेकिन उनके पहले ही फैसले ने राज्य में नई बहस छेड़ दी है।

Contents
मुफ्त बिजली का वादा और पहली ‘शर्त’: सोशल मीडिया पर छिड़ी जंगमहिला सुरक्षा के लिए ‘सिंगा पेन’ और नशे के खिलाफ जंगकर्ज का पहाड़ और खाली खजाना: ‘थलापति’ की सबसे बड़ी अग्निपरीक्षासोना, साड़ी और ‘मामा की अंगूठी’: वादों की लंबी फेहरिस्तक्या लोकलुभावनवाद और अर्थशास्त्र में तालमेल बिठा पाएंगे विजय?

मुफ्त बिजली का वादा और पहली ‘शर्त’: सोशल मीडिया पर छिड़ी जंग

मुख्यमंत्री विजय ने रविवार को अपनी पहली कैबिनेट फाइल पर हस्ताक्षर करते हुए तीन प्रमुख घोषणाएं कीं। इनमें सबसे प्रतीक्षित घोषणा घरेलू उपभोक्ताओं को हर बिल पर 200 यूनिट मुफ्त बिजली उपलब्ध कराने की थी। लेकिन, इस लोकलुभावन वादे के साथ जुड़ी एक ‘कंडीशन’ ने विपक्ष और जनता के एक वर्ग को बोलने का मौका दे दिया है।

नई नीति के अनुसार, इस छूट का लाभ केवल वही परिवार उठा सकेंगे जिनका दो महीने का कुल बिजली उपभोग 500 यूनिट से कम होगा। यदि खपत 500 यूनिट की सीमा को पार करती है, तो उपभोक्ता को पूरी यूनिट का भुगतान करना पड़ सकता है। इस ‘कैप’िंग के बाद सोशल मीडिया पर आलोचकों ने विजय को उनके चुनावी भाषणों की याद दिलाई, जहाँ उन्होंने बिना किसी शर्त के मुफ्त बिजली का वादा किया था। हालांकि, सरकार का तर्क है कि यह कदम बिजली चोरी रोकने और संसाधनों के सही वितरण के लिए उठाया गया है।

महिला सुरक्षा के लिए ‘सिंगा पेन’ और नशे के खिलाफ जंग

मुख्यमंत्री ने अपनी दूसरी और तीसरी घोषणाओं के जरिए राज्य की कानून-व्यवस्था को लेकर कड़े संकेत दिए हैं। महिलाओं की सुरक्षा के लिए ‘सिंगा पेन सिरप्पु अथिराडी पदाई’ (शेरनी विशेष त्वरित कार्रवाई बल) नामक एक समर्पित टास्क फोर्स के गठन का आदेश दिया गया है। यह बल विशेष रूप से महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों और शिकायतों पर तत्काल रिस्पांस सुनिश्चित करेगा।

इसके साथ ही, राज्य में युवाओं को नशे की गर्त से बाहर निकालने के लिए 65 मादक पदार्थ रोधी कार्य बल (Anti-Drug Task Force) इकाइयों की स्थापना का ऐलान किया गया है। विजय ने स्पष्ट किया कि नशा तस्करी के खिलाफ उनकी सरकार ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाएगी।

कर्ज का पहाड़ और खाली खजाना: ‘थलापति’ की सबसे बड़ी अग्निपरीक्षा

घोषणाओं के बीच मुख्यमंत्री विजय ने राज्य की वित्तीय स्थिति पर जो श्वेत पत्र जैसा बयान दिया, उसने विशेषज्ञों को चिंता में डाल दिया है। विजय ने स्वीकार किया कि तमिलनाडु वर्तमान में 10 लाख करोड़ रुपये से अधिक के कर्ज के नीचे दबा हुआ है।

“मुझे आपको तमिलनाडु सरकार की मौजूदा जमीनी हकीकत बतानी होगी। खजाना खाली है और हम पर असहनीय वित्तीय बोझ है।” – मुख्यमंत्री विजय

यह बयान इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि विजय की पार्टी के घोषणापत्र में ऐसी कई योजनाएं हैं, जिनके लिए अरबों रुपये के फंड की आवश्यकता होगी। खाली खजाने के बीच इन वादों को पूरा करना विजय के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं होगा।

सोना, साड़ी और ‘मामा की अंगूठी’: वादों की लंबी फेहरिस्त

तमिलनाडु की राजनीति हमेशा से कल्याणकारी योजनाओं (Welfare Schemes) के इर्द-गिर्द घूमती रही है, और विजय ने इस परंपरा को एक नए स्तर पर पहुंचा दिया है। उनके सामने अब इन वादों को निभाने की चुनौती है:

  1. मासिक सहायता: 60 वर्ष से कम आयु की महिलाओं को 2,500 रुपये प्रति माह।

  2. शादी का उपहार: गरीब दुल्हनों के लिए 8 ग्राम सोना (22 कैरेट) और उच्च गुणवत्ता वाली रेशमी साड़ी।

  3. थाई ममन थंगा मोथिरम योजना: राज्य में पैदा होने वाले हर बच्चे को सरकार की ओर से सोने की अंगूठी और एक ‘बेबी वेलकम किट’।

  4. मुफ्त गैस: हर परिवार को साल में छह मुफ्त रसोई गैस सिलेंडर।

  5. ब्याज मुक्त ऋण: महिला स्वयं सहायता समूहों के लिए 5 लाख रुपये तक का ब्याज मुक्त कर्ज।

क्या लोकलुभावनवाद और अर्थशास्त्र में तालमेल बिठा पाएंगे विजय?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मुख्यमंत्री विजय तमिलनाडु के लिए एक नई उम्मीद बनकर उभरे हैं, लेकिन सिनेमाई पर्दे और प्रशासनिक दफ्तर की हकीकत में बहुत अंतर है। एक तरफ राज्य की जनता ‘सोने की अंगूठी’ और ‘मुफ्त बिजली’ का इंतजार कर रही है, तो दूसरी तरफ आर्थिक विशेषज्ञ कर्ज के ब्याज को लेकर चेतावनी दे रहे हैं।

यदि विजय इन योजनाओं को लागू करने के लिए और अधिक कर्ज लेते हैं, तो राज्य की रेटिंग गिर सकती है, और यदि वे वादों से पीछे हटते हैं, तो उनका राजनीतिक भविष्य दांव पर लग सकता है।

‘थलापति’ विजय ने अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत बहुत ही आक्रामक ढंग से की है। उन्होंने अपनी मंशा जाहिर कर दी है कि वे गरीबों और महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए प्रतिबद्ध हैं। लेकिन, 200 यूनिट बिजली पर लगी शर्त यह संकेत देती है कि सरकार अब ‘फूंक-फूंक कर कदम’ रख रही है। आने वाले बजट सत्र में यह साफ हो जाएगा कि विजय का ‘तमिलनाडु मॉडल’ वित्तीय अनुशासन और लोक कल्याण के बीच संतुलन बना पाता है या नहीं।

फिलहाल, तमिलनाडु की जनता अपने ‘कमांडर’ के अगले कदम का बेसब्री से इंतजार कर रही है।

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