उत्तराखंडफीचर्ड

देवभूमि से वैश्विक धमाका: 21 साल के युवक ने बदली मेडिकल साइंस की तस्वीर, खड़ा किया 500 करोड़ का ‘हेल्थ-टेक’ साम्राज्य

देहरादून: आज के भागदौड़ भरे दौर में ‘हार्ट अटैक’ एक ऐसी साइलेंट किलिंग मशीन बन चुका है, जो उम्र की सीमाएं लांघकर युवाओं को भी अपनी चपेट में ले रहा है। चिकित्सा जगत के लिए यह एक बड़ी चुनौती है कि हृदय संबंधी समस्याओं का समय पर पता कैसे लगाया जाए। इस वैश्विक समस्या का समाधान उत्तराखंड की राजधानी देहरादून की गलियों से निकला है। साल 2016 में एक छोटे से कमरे से शुरू हुआ एक स्टार्टअप आज साल 2026 में 500 करोड़ रुपये की नेटवर्थ वाली दिग्गज कंपनी बन चुका है। हम बात कर रहे हैं सनफॉक्स टेक्नोलॉजीज (Sunfox Technologies) की, जिसने चिकित्सा विज्ञान और तकनीक के संगम से ‘ईसीजी मशीन’ को अस्पताल के बड़े कमरों से निकालकर इंसान की जेब तक पहुंचा दिया है।

एक व्यक्तिगत त्रासदी ने दिया ‘स्पंदन’ को जन्म

हर बड़े आविष्कार के पीछे एक गहरी प्रेरणा होती है। सनफॉक्स टेक्नोलॉजीज के को-फाउंडर अर्पित जैन बताते हैं कि इस सफर की शुरुआत एक दुखद घटना से हुई थी। उनके एक करीबी दोस्त की मृत्यु हार्ट अटैक की वजह से हो गई थी। अस्पताल में महंगी और भारी-भरकम ईसीजी मशीनों की अनुपलब्धता और देरी ने उन्हें सोचने पर मजबूर किया कि क्या कोई ऐसा तरीका है जिससे घर बैठे ही दिल की धड़कनों की सटीक निगरानी की जा सके?

इसी विचार को धरातल पर उतारने के लिए रजत जैन (तत्कालीन 21 वर्षीय बीटेक छात्र) और उनके भाई अर्पित जैन ने अपने साथियों—नितिन, सौरभ और सोबित के साथ मिलकर सनफॉक्स टेक्नोलॉजीज स्पंदन ईसीजी (Sunfox Technologies Spandan ECG) डिवाइस पर काम शुरू किया।

भारी-भरकम मशीनों की छुट्टी, जेब में समाया ‘स्पंदन’

इस स्टार्टअप ने जिस क्रांतिकारी उत्पाद को विकसित किया, उसे ‘स्पंदन’ नाम दिया गया। यह नाम संस्कृत से लिया गया है, जिसका अर्थ है ‘धड़कन’। यह दुनिया का सबसे छोटा और पोर्टेबल ईसीजी डिवाइस है। इसकी विशेषताएं कुछ इस प्रकार हैं:

  • बैटरी रहित संचालन: यह डिवाइस सीधे स्मार्टफोन से कनेक्ट होकर चलती है।

  • सटीकता (Accuracy): रिसर्च और डेवलपमेंट के पांच वर्षों (2016-2021) के दौरान इसके सैकड़ों ट्रायल किए गए, ताकि रिपोर्ट की सटीकता क्लिनिकल ग्रेड की हो।

  • सस्ता और सुलभ: जहाँ सामान्य ईसीजी मशीनें लाखों में आती हैं, स्पंदन ने इसे एक स्मार्टफोन की कीमत से भी कम में उपलब्ध करा दिया।

शार्क टैंक से मिला ‘फाइव स्टार’ ग्लोबल बूस्ट

कंपनी के सफर में सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट ‘शार्क टैंक इंडिया’ शो में उनकी भागीदारी रही। वहां इस तकनीक को न केवल 5-स्टार रेटिंग मिली, बल्कि बड़े निवेशकों का भरोसा और फंडिंग भी हासिल हुई। साल 2022 में मास प्रोडक्शन शुरू होने के बाद कंपनी ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। आज यह कंपनी देहरादून के एक आधुनिक ऑफिस में शिफ्ट हो चुकी है, जहाँ 200 से अधिक विशेषज्ञों की टीम काम कर रही है।

मेक इन इंडिया: सॉफ्टवेयर से हार्डवेयर तक सब स्वदेशी

सनफॉक्स टेक्नोलॉजीज स्पंदन ईसीजी की सबसे बड़ी खूबी इसका पूरी तरह ‘स्वदेशी’ होना है। अर्पित जैन गर्व से बताते हैं कि उनकी तकनीक, हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर का पूरा इकोसिस्टम ‘मेक इन इंडिया’ की भावना से ओतप्रोत है। यह केवल एक असेंबली यूनिट नहीं है, बल्कि यहाँ आइडिया से लेकर फाइनल प्रोडक्ट की सेल तक सब कुछ भारतीय दिमागों द्वारा संचालित है।

चारधाम यात्रा में ‘संजीवनी’ बना स्पंदन

उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियों में यह डिवाइस किसी वरदान से कम नहीं है। दुर्गम पहाड़ी इलाकों में जहाँ अस्पताल मीलों दूर हैं, वहाँ स्पंदन चंद मिनटों में रिपोर्ट तैयार कर देता है। कंपनी पिछले कई वर्षों से केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री जैसी चारधाम यात्राओं में मुफ्त सेवाएं दे रही है। हाई एल्टीट्यूड पर ऑक्सीजन की कमी के कारण होने वाले हार्ट अटैक से तीर्थयात्रियों को बचाने में यह डिवाइस ‘संजीवनी’ साबित हो रही है।

25 देशों में सेवाएं: भारत अब ‘निर्यात’ कर रहा है तकनीक

रजत जैन के अनुसार, अभी तक भारत चिकित्सा उपकरणों के लिए अमेरिका और यूरोप की कंपनियों पर निर्भर था। लेकिन अब तस्वीर बदल रही है। आज सनफॉक्स की 60 हजार से ज्यादा डिवाइस दुनिया के 25 से अधिक देशों में इस्तेमाल हो रही हैं।

“हमने अक्सर देखा है कि विदेशी कंपनियां भारत आती हैं, लेकिन आज हमारी भारतीय कंपनी अमेरिका, यूरोप और अफ्रीका के बाजारों में अपनी तकनीक का लोहा मनवा रही है।” – रजत जैन, फाउंडर

चुनौतियां और भविष्य की राह

सफर आसान नहीं था। मिडिल क्लास परिवार से आने वाले इन भाइयों के पास शुरुआत में न तो बड़ा फंड था और न ही मेडिकल बैकग्राउंड। दोस्तों ने हिस्सेदारी (इक्विटी) पर काम किया और आज वही दोस्त कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में शामिल हैं।

आज जब कंपनी की वैल्यू 500 करोड़ को पार कर गई है, तब भी इनका लक्ष्य नहीं बदला है। संस्थापक सदस्यों का कहना है कि वे हर रोज नई तकनीक सीख रहे हैं ताकि भविष्य में एआई (AI) के जरिए हृदय रोगों की भविष्यवाणी और भी सटीक तरीके से की जा सके।

देहरादून का यह स्टार्टअप उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है जो छोटे शहरों से बड़े सपने देखते हैं। सनफॉक्स टेक्नोलॉजीज स्पंदन ईसीजी ने यह साबित कर दिया है कि अगर आपके पास समस्या का वास्तविक समाधान है, तो आप उत्तराखंड की पहाड़ियों में बैठकर भी पूरी दुनिया का दिल जीत सकते हैं।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button