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उत्तराखंडफीचर्ड

खटीमा में ‘आदमखोर’ का खौफ: सुरई वन रेंज में बाघ ने बुजुर्ग को उतारा मौत के घाट, क्षत-विक्षत हालत में मिला शव

The Hill India News
Last updated: January 12, 2026 12:48 pm
The Hill India News
Published: January 12, 2026
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खटीमा (उधम सिंह नगर): उत्तराखंड के सीमांत क्षेत्र खटीमा में मानव-वन्यजीव संघर्ष की एक रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना सामने आई है। सुरई वन रेंज के अंतर्गत आने वाले बग्गा चौवन इलाके में एक बाघ ने मवेशी चराने गए 69 वर्षीय बुजुर्ग पर हमला कर उन्हें अपना निवाला बना लिया। इस घटना के बाद से पूरे इलाके में दहशत का माहौल है और वन विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों का दावा है कि उन्होंने घटनास्थल के पास एक नहीं, बल्कि दो बाघों को देखा है, जिससे क्षेत्र में किसी बड़े खतरे की आशंका बनी हुई है।

Contents
मवेशी घर लौटे, पर मालिक नहीं: दिल दहला देने वाली घटनावन विभाग की कार्रवाई: ट्रैप कैमरे और गश्त तेजराजनीतिक गलियारों में गूंज: विधायक ने उठाई फेंसिंग की मांगमानव-वन्यजीव संघर्ष: एक गंभीर चुनौतीप्रशासन की अपील: बरते सावधानी

मवेशी घर लौटे, पर मालिक नहीं: दिल दहला देने वाली घटना

प्राप्त विवरण के अनुसार, बग्गा चौवन निवासी राम सिंह कन्याल (69 वर्ष) रविवार को अपनी दिनचर्या के अनुसार मवेशियों को लेकर जंगल की ओर गए थे। शाम ढलते ही मवेशी तो सुरक्षित घर लौट आए, लेकिन राम सिंह का कोई सुराग नहीं लगा। परिजनों ने अनहोनी की आशंका जताते हुए ग्रामीणों को सूचित किया, जिसके बाद बड़े स्तर पर खोजबीन अभियान शुरू किया गया।

जंगल में अंधेरा होने के कारण ग्रामीणों ने ट्रैक्टरों की हेडलाइट्स की मदद ली। तलाशी के दौरान सबसे पहले जंगल के भीतर राम सिंह की जैकेट बरामद हुई। मौके पर जमीन पर घसीटे जाने के निशान और खून के धब्बे देखकर ग्रामीणों का कलेजा कांप गया। इन निशानों का पीछा करने पर कुछ ही दूरी पर राम सिंह कन्याल का क्षत-विक्षत शव बरामद हुआ। प्रत्यक्षदर्शी ग्रामीणों के अनुसार, जब वे शव के पास पहुंचे, तो वहां दो बाघ मौजूद थे, जो शोर मचाने और ट्रैक्टर की रोशनी पड़ने के बाद जंगल की गहराई में ओझल हो गए।

वन विभाग की कार्रवाई: ट्रैप कैमरे और गश्त तेज

घटना की सूचना मिलते ही सुरई वन रेंज की टीम मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए नागरिक चिकित्सालय खटीमा भेजा। सुरई वन रेंज के रेंजर राजेंद्र सिंह मनराल ने बताया कि स्थिति की गंभीरता को देखते हुए घटनास्थल और आसपास के क्षेत्रों में बाघों की मूवमेंट ट्रैक करने के लिए तत्काल ट्रैप कैमरे लगा दिए गए हैं।

रेंजर मनराल के अनुसार:

  • वनों से लगे ग्रामीण इलाकों में वन कर्मियों की गश्त (Patrolling) बढ़ा दी गई है।

  • उच्चाधिकारियों को पत्र लिखकर क्षेत्र में पिंजरा लगाने की अनुमति मांगी गई है।

  • मृतक के परिजनों को वन अधिनियम के तहत निर्धारित मुआवजा दिलाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

  • ग्रामीणों से अपील की गई है कि वे अकेले या बिना किसी सुरक्षा के जंगल की ओर न जाएं।

राजनीतिक गलियारों में गूंज: विधायक ने उठाई फेंसिंग की मांग

इस हृदयविदारक घटना पर स्थानीय विधायक और विधानसभा में उपनेता प्रतिपक्ष भुवन कापड़ी ने गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने अस्पताल पहुंचकर पीड़ित परिवार को ढांढस बंधाया और वन विभाग की सुस्त कार्यप्रणाली पर नाराजगी जाहिर की।

विधायक कापड़ी ने सरकार और प्रशासन के समक्ष एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखा है। उन्होंने मांग की कि:

  1. एक किलोमीटर की फेंसिंग: वन क्षेत्र से लगे गांवों की सीमा से कम से कम एक किलोमीटर अंदर तक मजबूत फेंसिंग की जाए, ताकि वन्यजीवों के गांवों में प्रवेश को रोका जा सके।

  2. सुरक्षित चारागाह: फेंसिंग होने से ग्रामीण अपने मवेशियों के लिए चारा और पानी सुरक्षित रूप से प्राप्त कर सकेंगे और मानव-वन्यजीव संघर्ष (Human-Wildlife Conflict) में कमी आएगी।

  3. त्वरित सहायता: मृतक राम सिंह के आश्रितों को अविलंब आर्थिक सहायता और परिवार के एक सदस्य को राहत देने की मांग की गई है।

मानव-वन्यजीव संघर्ष: एक गंभीर चुनौती

खटीमा का सुरई रेंज और तराई का यह पूरा बेल्ट बाघों और हाथियों के मूवमेंट के लिए जाना जाता है। पिछले कुछ वर्षों में टाइगर अटैक उत्तराखंड की घटनाओं में इजाफा हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि जंगलों में मानवीय दखल और वन्यजीवों के प्राकृतिक गलियारों (Corridors) में बाधा आने के कारण ये जानवर आबादी वाले क्षेत्रों की ओर रुख कर रहे हैं।

राम सिंह कन्याल की मौत ने एक बार फिर उस पुराने जख्म को हरा कर दिया है, जहाँ ग्रामीण अपनी आजीविका (मवेशी पालन) और अपनी जान के बीच संतुलन बनाने की कोशिश में लगे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि विभाग ने समय रहते सुरक्षा उपाय नहीं किए, तो वे उग्र आंदोलन को बाध्य होंगे।

प्रशासन की अपील: बरते सावधानी

फिलहाल, प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में हाई अलर्ट जारी किया है। बग्गा चौवन और आसपास के गांवों में मुनादी करवाई गई है कि शाम के बाद घरों से बाहर न निकलें और बच्चों व बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखें। वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि जब तक बाघों की लोकेशन स्पष्ट नहीं हो जाती और उन्हें ट्रanquilize (बेहोश) या पिंजरे में कैद नहीं कर लिया जाता, तब तक खतरा बना रहेगा।

खटीमा की यह घटना केवल एक व्यक्ति की मौत नहीं है, बल्कि यह बढ़ती आबादी और सिकुड़ते जंगलों के बीच बढ़ते टकराव का संकेत है। अब देखना यह होगा कि वन विभाग केवल मुआवजे तक सीमित रहता है या विधायक भुवन कापड़ी द्वारा सुझाई गई ‘फेंसिंग’ जैसी दीर्घकालिक योजनाओं पर अमल करता है।

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