चमोली/देहरादून: उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेनि) ने आज विश्व प्रसिद्ध हिम क्रीड़ा केंद्र औली (चमोली) का दौरा किया। यहाँ आयोजित एक भव्य ‘सैनिक सम्मेलन’ में प्रतिभाग करते हुए राज्यपाल ने भारतीय सेना और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के जवानों के अदम्य साहस, वीरता और कर्तव्यनिष्ठा की जमकर सराहना की।
बर्फीली चोटियों के बीच आयोजित इस कार्यक्रम में राज्यपाल ने न केवल जवानों का हौसला बढ़ाया, बल्कि उत्कृष्ट सेवा देने वाले वीर सैनिकों को सम्मानित कर उनके मनोबल को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि प्रतिकूल मौसम और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद हमारे जवानों का समर्पण राष्ट्र की सुरक्षा का सबसे मजबूत कवच है।
‘औली बटालियन’ के गौरवशाली इतिहास को किया नमन
सैनिक सम्मेलन को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने भारतीय सेना की 7वीं बटालियन असम रेजिमेंट, जिसे ‘औली बटालियन’ के नाम से भी जाना जाता है, के ऐतिहासिक योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने ‘ऑपरेशन पवन’ जैसे चुनौतीपूर्ण सैन्य अभियानों का जिक्र करते हुए कहा कि असम रेजिमेंट के जवानों ने हर मोर्चे पर अपनी वीरता का लोहा मनवाया है।
राज्यपाल ने वर्तमान सुरक्षा परिदृश्य पर चर्चा करते हुए कहा, “वर्तमान में माणा सब-सेक्टर में ‘ऑपरेशन स्नो लेपर्ड’ के तहत सीमा सुरक्षा का उत्तरदायित्व संभाल रहे हमारे जवान हिमालय की शून्य से नीचे की कड़ाके की ठंड में भी अदम्य साहस का परिचय दे रहे हैं। कठिन हिमालयी परिस्थितियों में उनकी कर्तव्यनिष्ठा यह सिद्ध करती है कि भारतीय सेना दुनिया की सबसे पेशेवर और साहसी सेना क्यों है।”
ITBP के स्कीइंग संस्थान (M&SI) की वैश्विक पहचान
कार्यक्रम के दौरान राज्यपाल ने आईटीबीपी के माउंटेनियरिंग एवं स्कीइंग इंस्टिट्यूट (M&SI), औली की उपलब्धियों को राष्ट्र के लिए गौरव का विषय बताया। वर्ष 1976 में स्थापित इस संस्थान की प्रशंसा करते हुए उन्होंने कहा कि यह संस्थान न केवल भारत, बल्कि दुनिया भर में पर्वतारोहण और साहसिक खेलों के प्रशिक्षण का एक प्रमुख केंद्र बनकर उभरा है।
उन्होंने रेखांकित किया कि ITBP के जवानों ने माउंट एवरेस्ट सहित विश्व की अनेक दुर्गम चोटियों पर तिरंगा फहराकर भारत के सामर्थ्य और संकल्प का प्रदर्शन किया है। राज्यपाल के अनुसार, यह संस्थान पर्वतीय युद्ध कौशल (Mountain Warfare), स्कीइंग और राफ्टिंग के क्षेत्र में देश को विश्वस्तरीय प्रशिक्षित मानव संसाधन उपलब्ध करा रहा है।
देवभूमि के युवाओं के लिए प्रेरणा का केंद्र
राज्यपाल गुरमीत सिंह ने सुरक्षा बलों के मानवीय और सामाजिक पक्ष पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि सेना और अर्धसैनिक बल केवल सीमाओं के प्रहरी ही नहीं हैं, बल्कि वे समाज के लिए सेवा और अनुशासन के उत्कृष्ट रोल मॉडल भी हैं। उन्होंने विशेष रूप से आईटीबीपी द्वारा स्थानीय युवाओं के लिए चलाए जा रहे कौशल विकास कार्यक्रमों की सराहना की।
“यह अत्यंत सराहनीय है कि ITBP का यह संस्थान उत्तराखंड के स्थानीय युवाओं को राफ्टिंग, स्कीइंग और पर्वतीय प्रशिक्षण देकर उन्हें स्वरोजगार और मुख्यधारा से जोड़ने का कार्य कर रहा है। भविष्य में यह केंद्र युवाओं के लिए और भी अधिक प्रेरणादायी बनेगा और राज्य में साहसिक पर्यटन के विकास में मील का पत्थर साबित होगा,“ राज्यपाल ने विश्वास व्यक्त करते हुए कहा।
सीमा सुरक्षा और आधुनिक चुनौतियां
सैनिक सम्मेलन के दौरान राज्यपाल ने आधुनिक युद्धकला और तकनीक के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि बदलती वैश्विक परिस्थितियों में जवानों को तकनीक से लैस होना और हर परिस्थिति के लिए तैयार रहना आवश्यक है। उन्होंने जवानों को विश्वास दिलाया कि पूरा देश और उत्तराखंड की सरकार उनके और उनके परिवारों के साथ मजबूती से खड़ी है।
सम्मेलन के अंत में राज्यपाल ने सेना और आईटीबीपी के उन जवानों को स्मृति चिन्ह प्रदान किए जिन्होंने अपनी ड्यूटी के दौरान विशिष्ट और उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। यह क्षण अत्यंत भावुक और गर्व से भरा था, जब देश के प्रथम नागरिक के हाथों सम्मान पाकर जवानों के चेहरे आत्मविश्वास से खिल उठे।
राष्ट्र प्रथम की भावना
औली का यह सैनिक सम्मेलन केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि यह राष्ट्र की सुरक्षा में जुटे उन गुमनाम नायकों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का एक मंच था। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेनि) का यह दौरा सीमावर्ती क्षेत्रों में तैनात जवानों के लिए ऊर्जा का संचार करने वाला सिद्ध होगा। उन्होंने अपने संबोधन का समापन ‘राष्ट्र प्रथम’ के संकल्प के साथ किया, जो वहां मौजूद हर जवान के दिल में गूंज उठा।



