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चारधाम यात्रा 2026: 18 दिन में 34 श्रद्धालुओं की मौत, केदारनाथ में सबसे ज्यादा जोखिम; स्वास्थ्य विभाग ने जारी की कड़ी चेतावनी

The Hill India News
Last updated: May 9, 2026 1:51 pm
The Hill India News
Published: May 9, 2026
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देहरादून: उत्तराखंड की विश्वप्रसिद्ध चारधाम यात्रा इस समय अपने पूरे चरम पर है। हिमालय की गोद में स्थित बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के दर्शन के लिए देश-विदेश से श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ रहा है। लेकिन, इस पावन आध्यात्मिक यात्रा के बीच एक विचलित करने वाली खबर सामने आ रही है। तीर्थयात्रियों की बढ़ती संख्या के साथ-साथ मौतों का आंकड़ा भी तेजी से ऊपर जा रहा है, जिसने राज्य सरकार और स्वास्थ्य महकमे की रातों की नींद उड़ा दी है।

Contents
18 दिनों में 34 मौतें: केदारनाथ मार्ग बना सबसे संवेदनशीलक्यों हो रही हैं मौतें? विशेषज्ञ की रायश्रद्धालुओं का सैलाब: प्रशासन के लिए अग्निपरीक्षाएडवाइजरी की अनदेखी और ‘स्क्रीनिंग’ का डरसावधानी ही बचाव है: यात्रियों के लिए मुख्य सुझाव

18 दिनों में 34 मौतें: केदारनाथ मार्ग बना सबसे संवेदनशील

राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (SEOC) द्वारा 9 मई 2026 को जारी ताजा आंकड़ों ने सबको चौंका दिया है। यात्रा शुरू होने के महज तीन सप्ताह के भीतर अब तक कुल 34 श्रद्धालुओं की जान जा चुकी है। इसमें सबसे चिंताजनक स्थिति बाबा केदार की नगरी की है। आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि केदारनाथ यात्रा मार्ग पर सबसे अधिक 18 यात्रियों ने दम तोड़ा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि केदारनाथ की कठिन भौगोलिक परिस्थितियाँ और अत्यधिक ऊंचाई इसका मुख्य कारण हैं। 22 अप्रैल को कपाट खुलने के बाद से अब तक केदारनाथ धाम में 4 लाख 1 हजार 748 से अधिक श्रद्धालु मत्था टेक चुके हैं। भारी भीड़ और पैदल मार्ग की खड़ी चढ़ाई श्रद्धालुओं के हृदय और फेफड़ों पर अतिरिक्त दबाव डाल रही है।

क्यों हो रही हैं मौतें? विशेषज्ञ की राय

स्वास्थ्य विभाग के गहन परीक्षण में यह तथ्य सामने आया है कि जान गंवाने वाले अधिकांश श्रद्धालु पहले से ही किसी न किसी स्वास्थ्य समस्या से जूझ रहे थे। महानिदेशक (स्वास्थ्य) डॉ. सुनीता टम्टा ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा, “जितनी भी दुर्भाग्यपूर्ण मौतें हुई हैं, वे मुख्य रूप से चढ़ाई चढ़ते समय हुई हैं। केदारनाथ धाम अत्यधिक ऊंचाई पर स्थित है और वहां पहुंचने वाला पैदल मार्ग अत्यंत दुर्गम है। ऑक्सीजन की कमी और अचानक बदलते मौसम के कारण हृदय रोग, उच्च रक्तचाप (High Blood Pressure), और सांस संबंधी बीमारियों से ग्रस्त मरीजों के लिए यह जोखिम भरा साबित हो रहा है।“

डॉ. टम्टा ने इस बात पर भी चिंता जताई कि आजकल लोग बहुत कम समय में सभी चारों धामों के दर्शन करना चाहते हैं। शरीर को पहाड़ों के अनुकूल (Acclimatization) बनाए बिना लगातार यात्रा करना ‘हाई एल्टीट्यूड सिकनेस’ को न्योता देना है, जो जानलेवा साबित हो सकता है।


श्रद्धालुओं का सैलाब: प्रशासन के लिए अग्निपरीक्षा

उत्तराखंड में इस वर्ष चारधाम यात्रा की शुरुआत 19 अप्रैल को हुई थी। अब तक के आंकड़े बताते हैं कि आस्था का सैलाब पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ सकता है:

  • कुल श्रद्धालु: 18 दिनों में 9 लाख 21 हजार 342 से अधिक।

  • बदरीनाथ धाम: 2,30,048 तीर्थयात्री।

  • यमुनोत्री व गंगोत्री: क्रमशः 1.45 लाख और 1.42 लाख श्रद्धालु।

श्रद्धालुओं की इस अप्रत्याशित संख्या ने यात्रा मार्गों पर बुनियादी सुविधाओं—जैसे होटल, पार्किंग, और मेडिकल सपोर्ट—पर भारी दबाव बना दिया है। ट्रैफिक प्रबंधन प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बनकर उभरा है।

एडवाइजरी की अनदेखी और ‘स्क्रीनिंग’ का डर

स्वास्थ्य विभाग ने यात्रा शुरू होने से पूर्व ही एक विस्तृत हेल्थ एडवाइजरी जारी की थी। इसमें स्पष्ट निर्देश थे कि गंभीर बीमारियों से ग्रसित लोग डॉक्टर के फिटनेस सर्टिफिकेट के बिना यात्रा न करें। विभाग ने यात्रा मार्ग पर 47 विशेष अस्पताल, 28 विशेषज्ञ डॉक्टर और 400 से अधिक चिकित्सकों की तैनाती की है।

हालांकि, जमीनी हकीकत यह है कि श्रद्धालु स्क्रीनिंग से बच रहे हैं। डॉ. सुनीता टम्टा के अनुसार, “हमने अब तक 1.5 लाख लोगों की स्क्रीनिंग की है, लेकिन कई लोग चेकअप कराने से कतरा रहे हैं। उन्हें डर है कि यदि कोई स्वास्थ्य समस्या निकली तो प्रशासन उन्हें आगे जाने से रोक देगा। हम किसी को मजबूर नहीं कर सकते, लेकिन आस्था के साथ स्वास्थ्य का तालमेल बिठाना अनिवार्य है।“

सावधानी ही बचाव है: यात्रियों के लिए मुख्य सुझाव

हिमालयी क्षेत्रों की यात्रा केवल धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि एक शारीरिक चुनौती भी है। विशेषज्ञों ने यात्रियों को निम्नलिखित सावधानियां बरतने की सलाह दी है:

  1. मेडिकल चेकअप: यात्रा शुरू करने से पहले पूर्ण स्वास्थ्य परीक्षण अवश्य कराएं।

  2. विश्राम का महत्व: चढ़ाई के दौरान पर्याप्त अंतराल पर आराम करें और शरीर को हाइड्रेटेड रखें।

  3. दवाइयां साथ रखें: अपनी नियमित दवाओं के साथ-साथ पोर्टेबल ऑक्सीजन सिलेंडर का उपयोग करें।

  4. लक्षणों को न छुपाएं: घबराहट, सांस फूलने या सीने में दर्द होने पर तुरंत नजदीकी मेडिकल कैंप से संपर्क करें।

उत्तराखंड सरकार ने एक बार फिर अपील की है कि श्रद्धालु अपनी मर्यादा और स्वास्थ्य सीमाओं का ध्यान रखते हुए ही इस पावन यात्रा को पूर्ण करें, ताकि उनकी यह आध्यात्मिक यात्रा सुखद और सुरक्षित बनी रहे।

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