देश के कई हिस्सों में मानसून इस समय राहत के बजाय भारी तबाही लेकर आया है। विशेष रूप से असम और गुजरात में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश और बाढ़ ने जनजीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। हजारों गांव जलमग्न हैं, लाखों लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हो गए हैं और प्रशासन युद्धस्तर पर राहत एवं बचाव कार्यों में जुटा हुआ है। असम में अब तक 62 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 7 लाख से अधिक लोग बाढ़ की चपेट में हैं। वहीं गुजरात में भारी बारिश और बाढ़ के कारण 31 लोगों की जान जा चुकी है। दोनों राज्यों में हालात इतने गंभीर हैं कि सेना, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF), राज्य आपदा मोचन बल (SDRF), तटरक्षक बल और स्थानीय प्रशासन लगातार लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने में लगे हुए हैं।
असम में बाढ़ की भयावह स्थिति ने पूरे राज्य को झकझोर दिया है। असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (ASDMA) के अनुसार पिछले 24 घंटों के दौरान 14 और लोगों की मौत होने से मृतकों की संख्या बढ़कर 62 पहुंच गई है। सबसे अधिक मौतें चराइदेव जिले में दर्ज की गई हैं, जहां सात लोगों ने जान गंवाई। इसके अलावा शिवसागर में छह और जोरहाट में एक व्यक्ति की मौत हुई है। शिवसागर जिले में अभी भी एक व्यक्ति लापता बताया जा रहा है, जिसकी तलाश लगातार जारी है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने मृतकों के परिजनों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार हर प्रभावित परिवार के साथ खड़ी है और राहत कार्यों में कोई कमी नहीं आने दी जाएगी।
असम में बाढ़ का असर अब 12 जिलों तक फैल चुका है। गोलाघाट, चराइदेव, डिब्रूगढ़, होजाई, नगांव, बिस्वनाथ, जोरहाट, धेमाजी, शिवसागर, सोनितपुर, कामरूप महानगर और कार्बी आंगलोंग जिले सबसे अधिक प्रभावित हैं। इनमें शिवसागर सबसे ज्यादा प्रभावित जिला बनकर सामने आया है, जहां लगभग 3.48 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। इसके बाद चराइदेव में करीब 1.88 लाख और जोरहाट में 1.26 लाख लोग इस प्राकृतिक आपदा का सामना कर रहे हैं। राज्य के 856 गांव और 37 राजस्व सर्किल पूरी तरह बाढ़ की चपेट में आ चुके हैं। कई गांवों का संपर्क जिला मुख्यालय से टूट गया है, जिससे राहत सामग्री पहुंचाने में भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
बाढ़ ने केवल लोगों के घर ही नहीं डुबोए, बल्कि कृषि और पशुपालन क्षेत्र को भी भारी नुकसान पहुंचाया है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार 56,606 हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि पूरी तरह जलमग्न हो चुकी है। खेतों में खड़ी धान, सब्जियों और अन्य फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है, जिससे हजारों किसानों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है। पिछले 24 घंटों में ही 17,107 पशु और पोल्ट्री बाढ़ में बह गए, जबकि कुल मिलाकर 3.34 लाख से अधिक पशुधन प्रभावित हुए हैं। यह नुकसान आने वाले महीनों में ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी गंभीर असर डाल सकता है।
बाढ़ से विस्थापित लोगों के लिए राज्य सरकार ने राहत शिविरों की व्यवस्था की है। वर्तमान में लगभग 3.15 लाख लोग राज्यभर में संचालित 363 राहत शिविरों और सहायता केंद्रों में रह रहे हैं। इन शिविरों में भोजन, पेयजल, दवाइयों और आवश्यक वस्तुओं की व्यवस्था की जा रही है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें भी लगातार शिविरों में पहुंचकर बीमारियों की रोकथाम और चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध करा रही हैं ताकि बाढ़ के बाद महामारी जैसी स्थिति पैदा न हो।
असम में स्थिति और गंभीर इसलिए हो गई है क्योंकि ब्रह्मपुत्र नदी और उसकी सहायक नदियां लगातार उफान पर हैं। लगातार हो रही बारिश के कारण जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने बताया कि पड़ोसी राज्य नागालैंड में बादल फटने की घटना के बाद अतिरिक्त पानी असम की ओर आने से बाढ़ की स्थिति और विकराल हो गई है। इसी कारण कई नए क्षेत्रों में भी पानी भर गया है। NDRF, SDRF और स्थानीय प्रशासन ने मिलकर एक ही दिन में करीब 1,000 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया है। बचाव अभियान में नावों, मोटरबोट, हेलीकॉप्टर और विशेष उपकरणों का उपयोग किया जा रहा है।
दूसरी ओर गुजरात भी इस समय भारी बारिश और बाढ़ की मार झेल रहा है। राज्य में अब तक 31 लोगों की मौत हो चुकी है। राहत आयुक्त कार्यालय के अनुसार सबसे अधिक 15 मौतें नवसारी जिले में दर्ज की गई हैं। इसके अलावा वलसाड में सात, खेड़ा में चार, सूरत और अमरेली में दो-दो तथा आनंद जिले में एक व्यक्ति की जान गई है। अधिकांश लोगों की मौत पानी में डूबने की घटनाओं में हुई है। प्रशासन लगातार लोगों से नदियों और जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रहने की अपील कर रहा है।
दक्षिण गुजरात के वलसाड और नवसारी जिले सबसे अधिक प्रभावित हैं। कई इलाकों में सात फीट तक पानी भर गया था, जिससे घर, दुकानें, गोदाम, स्कूल और सड़कें पूरी तरह डूब गईं। अब पानी धीरे-धीरे उतर रहा है, लेकिन उसके बाद की स्थिति भी बेहद चिंताजनक है। चारों ओर कीचड़, मलबा और गंदगी फैली हुई है। नगरपालिकाओं की टीमें लगातार सफाई अभियान चला रही हैं। साथ ही पेयजल आपूर्ति बहाल करने और संक्रमण रोकने के लिए कीटाणुनाशक दवाओं का छिड़काव किया जा रहा है।
गुजरात सरकार के अनुसार अब तक 38 हजार से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा चुका है। इनमें अधिकांश लोगों ने अपने रिश्तेदारों के यहां शरण ली है, जबकि लगभग 2,000 लोग राहत शिविरों में रह रहे हैं। इसके अतिरिक्त अब तक 352 लोगों का सफल रेस्क्यू किया जा चुका है। नवसारी जिले के मेंधर गांव में भारतीय तटरक्षक बल के हेलीकॉप्टर ने बाढ़ में फंसे 60 झींगा फार्म कर्मचारियों को सुरक्षित बाहर निकालकर राहत अभियान की बड़ी सफलता हासिल की। सेना, NDRF और SDRF की संयुक्त टीमें लगातार गांव-गांव पहुंचकर लोगों को सुरक्षित निकालने और राहत सामग्री वितरित करने का कार्य कर रही हैं।
बाढ़ का असर केवल जनजीवन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि परिवहन व्यवस्था भी बुरी तरह प्रभावित हुई है। गुजरात में जलभराव और ट्रैक पर पानी भरने के कारण 50 से अधिक ट्रेनें रद्द करनी पड़ी हैं, जबकि 25 ट्रेनों को बीच रास्ते में ही समाप्त करना पड़ा। कई राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों पर यातायात बाधित है, जिससे आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति भी प्रभावित हुई है। प्रशासन लगातार वैकल्पिक मार्गों की व्यवस्था कर रहा है ताकि राहत सामग्री समय पर प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंच सके।
मौसम विभाग ने दोनों राज्यों में अगले कुछ दिनों तक भारी बारिश की संभावना जताई है। नदियों का बढ़ता जलस्तर और लगातार हो रही वर्षा प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। इसी कारण राहत एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रखा गया है और लोगों से सुरक्षित स्थानों पर रहने, अनावश्यक यात्रा से बचने तथा प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की गई है।
असम और गुजरात की यह त्रासदी एक बार फिर यह याद दिलाती है कि प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए मजबूत आपदा प्रबंधन, समय पर चेतावनी प्रणाली और स्थानीय स्तर पर बेहतर तैयारी कितनी आवश्यक है। फिलहाल दोनों राज्यों की सबसे बड़ी प्राथमिकता लोगों की जान बचाना, राहत पहुंचाना और सामान्य जनजीवन को जल्द से जल्द पटरी पर लाना है। पूरा देश इस कठिन समय में प्रभावित परिवारों के साथ खड़ा है और उम्मीद की जा रही है कि मौसम में जल्द सुधार होगा, जिससे राहत एवं पुनर्वास कार्यों को और गति मिल सकेगी।
