
हल्द्वानी: उत्तराखंड के नैनीताल जिले के अंतर्गत आने वाली नगर पंचायत लालकुआं एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। विकास कार्यों और खरीद-फरोख्त में कथित वित्तीय व प्रक्रियात्मक गड़बड़ियों की लगातार मिल रही शिकायतों के बाद जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपना लिया है। नैनीताल के जिलाधिकारी (डीएम) ललित मोहन रयाल ने विभिन्न विकास कार्यों और सामग्रियों की खरीद में हुई कथित धांधली का संज्ञान लेते हुए विस्तृत जांच के आदेश जारी कर दिए हैं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच का जिम्मा सिटी मजिस्ट्रेट हल्द्वानी को सौंपा गया है और उन्हें 15 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए गए हैं।
डस्टबिन खरीद और शौचालयों के पुनर्निर्माण पर उठे सवाल
प्राप्त जानकारी के अनुसार, नगर पंचायत लालकुआं में विभिन्न कार्यों के दौरान नियमों की अनदेखी के गंभीर आरोप लगे हैं। शिकायतों में सबसे प्रमुख मामला डस्टबिन (कूड़ेदान) खरीद का बताया जा रहा है। आरोप है कि लगभग 3 लाख रुपए की लागत से डस्टबिन की खरीदारी की गई, लेकिन इस दौरान किसी भी विधिवत निविदा (टेंडर) प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।
इसके साथ ही, नगर के विभिन्न वार्डों में पूर्व में बने शौचालयों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों और शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि करीब 5 साल पहले ही जिन शौचालयों का निर्माण हुआ था, उन्हें तोड़कर दोबारा निर्माण कराया गया। इस निर्णय के पीछे के औचित्य और वित्तीय व्यय को लेकर भी जांच की जाएगी। वहीं, छठ पूजा स्थल पर किए गए पुनर्निर्माण कार्यों पर भी सवाल उठाए गए हैं, जिसके कारण इस पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर संदेह पैदा हो गया है।
अलाव की लकड़ी के भुगतान में गड़बड़ी के आरोप
वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान शीतकाल में अलाव जलाने के लिए की गई लकड़ी की आपूर्ति और खपत को लेकर भी शिकायतें दर्ज की गई हैं। आरोप है कि ठंड के मौसम में लकड़ी की जितनी खपत दिखाई गई है, वह सामान्य से काफी अधिक है। लकड़ी के उठाव और उसके एवज में किए गए वित्तीय भुगतान की पारदर्शिता और बिलों का सत्यापन अब इस जांच का एक अहम हिस्सा होगा।

सिटी मजिस्ट्रेट को सौंपी गई जांच की कमान
जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच के लिए सिटी मजिस्ट्रेट हल्द्वानी को जांच अधिकारी नामित किया है। जांच अधिकारी को निर्देश दिए गए हैं कि वे निम्नलिखित बिंदुओं पर बारीकी से छानबीन करें:
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अभिलेखों की जांच: टेंडर प्रक्रिया, कार्य की स्वीकृतियां और भुगतान से जुड़े सभी रिकॉर्ड्स का विश्लेषण।
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भौतिक सत्यापन (Physical Verification): जिन स्थानों पर शौचालयों और छठ पूजा स्थल का निर्माण कार्य हुआ है, वहां जाकर स्थिति का मौके पर मुआयना करना।
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मापन पुस्तिका (Measurement Book) का मिलान: कार्य के वास्तविक आकलन और भुगतान की गई धनराशि का मिलान करना।
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वित्तीय नियमों की समीक्षा: यह देखना कि क्या सभी खर्चे उत्तराखंड सरकार के शासनादेशों और वित्तीय नियमों के अनुरूप हुए हैं या नहीं।
डीएम ललित मोहन रयाल ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि इस मामले में किसी भी प्रकार की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि जांच में कोई भी अधिकारी या कर्मचारी दोषी पाया जाता है, तो उनके खिलाफ कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई तय की जाएगी।
प्रशासनिक और जनहित के मायने
इस जांच के आदेश के बाद लालकुआं क्षेत्र के राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। आम जनता और बुद्धिजीवियों का मानना है कि सरकारी धन का उपयोग जनकल्याण के लिए होना चाहिए, न कि व्यक्तिगत हितों की पूर्ति के लिए। 15 दिनों के बाद आने वाली रिपोर्ट यह तय करेगी कि नगर पंचायत लालकुआं के विकास कार्यों में किस हद तक अनियमितताएं हुईं और आगे किस तरह के कदम उठाए जाएंगे।



