
देहरादून: डिजिटल क्रांति के इस दौर में जहां तकनीक ने हमारी राहें आसान की हैं, वहीं साइबर अपराधियों ने ठगी के नए-नए और बेहद “ग्लैमरस” तरीके ईजाद कर लिए हैं। ताजा मामला उत्तराखंड की राजधानी देहरादून सहित देशभर के सोशल मीडिया यूजर्स से जुड़ा है। अब ठग आपको डराकर नहीं, बल्कि आपका मनोरंजन (Entertainment) करके आपकी जेब काट रहे हैं। फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म्स पर इन दिनों ‘चाइनीज और कोरियन शॉर्ट ड्रामा’ के नाम पर एक बड़ा स्कैम तेजी से पांव पसार रहा है।
उत्सुकता का जाल और संदिग्ध लिंक्स
इस ठगी की कार्यप्रणाली (Modus Operandi) मनोवैज्ञानिक खेल पर आधारित है। ठग सबसे पहले फेसबुक और इंस्टाग्राम पर किसी बेहद दिलचस्प, सस्पेंस और ड्रामा से भरपूर कोरियन या चाइनीज शॉर्ट फिल्म का 30 से 40 सेकंड का विज्ञापन या प्रोमो चलाते हैं। जब यूजर उस कहानी के अंत को जानने के लिए उत्सुक होता है, तो वीडियो के ठीक नीचे ‘वॉच फुल मूवी’ (Watch Full Movie) या ‘देखना जारी रखें’ जैसे आकर्षक बटन दिए जाते हैं।
जैसे ही यूजर इन लिंक्स पर क्लिक करता है, उसे सीधे प्ले स्टोर या किसी थर्ड-पार्टी वेबसाइट पर ले जाया जाता है, जहां एक अनजान ऐप इंस्टॉल करने का दबाव बनाया जाता है। यहीं से शुरू होता है डिजिटल सब्सक्रिप्शन स्कैम का असली खेल।
7 दिन का ‘फ्री ट्रायल’ और ऑटो-पेमेंट का फंदा
साइबर एक्सपर्ट्स के मुताबिक, ऐप इंस्टॉल होते ही यूजर को लुभाने के लिए ‘7-डे फ्री ट्रायल’ का विकल्प दिया जाता है। इस ट्रायल को एक्टिवेट करने के लिए ऐप आपसे यूपीआई (UPI) पिन या क्रेडिट/डेबिट कार्ड की डिटेल्स मांगता है। अधिकांश यूजर्स यह सोचकर बेफिक्र रहते हैं कि अभी तो पैसे कट नहीं रहे हैं और ट्रायल खत्म होने से पहले वे ऐप हटा देंगे।
लेकिन, हकीकत इसके उलट है। ‘स्टार्ट फ्री ट्रायल’ पर क्लिक करते ही यूजर अनजाने में ‘ऑटो-डेबिट’ (Auto-Debit) या ‘रेकरिंग पेमेंट’ (Recurring Payment) को अनुमति दे देता है। जैसे ही 7 दिन की अवधि समाप्त होती है, बैंक खाते से बिना किसी ओटीपी (OTP) के 500 रुपये से लेकर 5,000 रुपये तक की राशि स्वतः ही कटनी शुरू हो जाती है।
अनइंस्टॉल करने से नहीं रुकती ठगी
इस डिजिटल सब्सक्रिप्शन स्कैम की सबसे खतरनाक बात यह है कि पीड़ित यूजर जब परेशान होकर ऐप को फोन से डिलीट या अनइंस्टॉल कर देता है, तब भी पैसे कटना बंद नहीं होते। तकनीकी रूप से, आपने ऐप हटाया है, लेकिन बैंक या यूपीआई प्लेटफॉर्म पर दिया गया ‘पेमेंट मैंडेट’ अभी भी सक्रिय रहता है। जब तक यूजर मैन्युअल रूप से अपने पेमेंट ऐप (जैसे Google Pay, PhonePe या बैंक सेटिंग्स) में जाकर ‘सब्सक्रिप्शन’ या ‘ऑटो-पे’ को कैंसिल नहीं करता, तब तक ठगी का यह सिलसिला हर महीने चलता रहता है।
साइबर एक्सपर्ट्स की राय: क्यों आसान है यह शिकार?
देहरादून के साइबर सेल विशेषज्ञों का कहना है कि लोग अक्सर ओटीपी (OTP) शेयर करने को ही ठगी मानते हैं, लेकिन अब ठग ‘मैंडेट अप्रूवल’ का सहारा ले रहे हैं। लोग नियमों और शर्तों (Terms & Conditions) को पढ़े बिना ‘एक्सेप्ट’ बटन दबा देते हैं।
एक विशेषज्ञ ने बताया, “यह डिजिटल सब्सक्रिप्शन स्कैम इसलिए सफल हो रहा है क्योंकि इसमें रकम शुरुआत में छोटी होती है और लोगों को लगता है कि उन्होंने गलती से कोई सर्विस ली है। कई बार लोग शर्म या जानकारी के अभाव में इसकी शिकायत भी दर्ज नहीं कराते।”
बचाव के लिए क्या करें? (सुरक्षा गाइडलाइन)
अगर आप भी सोशल मीडिया पर वीडियो देखने के शौकीन हैं, तो इन सावधानियों को जरूर बरतें:
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अज्ञात ऐप्स से बचें: फेसबुक या इंस्टाग्राम के विज्ञापनों के जरिए किसी भी अनजान वीडियो स्ट्रीमिंग ऐप को डाउनलोड न करें। हमेशा आधिकारिक प्लेटफॉर्म (Netflix, Amazon Prime, आदि) का ही चुनाव करें।
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फ्री ट्रायल की हकीकत: कोई भी ऐप अगर फ्री ट्रायल के लिए कार्ड डिटेल्स या यूपीआई पिन मांगता है, तो वह संदिग्ध हो सकता है। बिना आवश्यकता के कार्ड की जानकारी न भरें।
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ऑटो-पे सेटिंग्स की जांच: समय-समय पर अपने यूपीआई ऐप्स (PhonePe, Paytm, Google Pay) की सेटिंग्स में जाकर ‘Autopay’ विकल्प की जांच करें। यदि कोई अनजान मैंडेट दिखे, तो उसे तुरंत रद्द करें।
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बैंक स्टेटमेंट पर नजर: अपने बैंक मैसेज और स्टेटमेंट को नियमित रूप से चेक करें। यदि छोटी रकम भी बिना वजह कट रही है, तो तुरंत बैंक को सूचित करें।
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शिकायत दर्ज कराएं: यदि आप किसी डिजिटल सब्सक्रिप्शन स्कैम का शिकार हो गए हैं, तो तुरंत राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें या
www.cybercrime.gov.inपर शिकायत दर्ज करें।
मनोरंजन की भूख और तकनीक की कम जानकारी हमें बड़े आर्थिक नुकसान में डाल सकती है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को भी अपनी विज्ञापन नीतियों पर पुनर्विचार करने की आवश्यकता है ताकि ऐसे संदिग्ध ऐप्स को बढ़ावा न मिले। याद रखें, इंटरनेट पर ‘मुफ्त’ मिलने वाली हर चीज की एक छिपी हुई कीमत होती है। सतर्क रहें, सुरक्षित रहें।



