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उत्तराखंड में ‘जनसांख्यिकीय हमले’ पर धामी सरकार का सर्जिकल स्ट्राइक: 2003 से अब तक के परिवार रजिस्टर खंगालेगी SIT, फर्जी नाम होंगे बाहर

The Hill India News
Last updated: January 3, 2026 1:10 pm
The Hill India News
Published: January 3, 2026
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देहरादून | ब्यूरो प्रमुख उत्तराखंड की देवभूमि के मूल स्वरूप और जनसांख्यिकीय संतुलन (Demographic Balance) को बनाए रखने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक और बड़ा और कड़ा फैसला लिया है। प्रदेश में परिवार रजिस्टर (कुटुंब रजिस्टर) में हो रही गंभीर अनियमितताओं और अवैध बसावट की शिकायतों के बाद सरकार ने वर्ष 2003 से अब तक की सभी प्रविष्टियों की गहन जांच कराने का निर्णय लिया है।

Contents
DM की कस्टडी में रहेंगे रजिस्टर, CDO/ADM करेंगे जांचजनसांख्यिकीय असंतुलन पर गहरी चिंताआंकड़ों में फर्जीवाड़े का संकेत?नियमों में बड़े बदलाव की तैयारीदेवभूमि की सुरक्षा सर्वोपरि

शनिवार को देहरादून में आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक में मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकारी दस्तावेजों के साथ खिलवाड़ करने वालों और फर्जी तरीके से नाम दर्ज कराने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।


DM की कस्टडी में रहेंगे रजिस्टर, CDO/ADM करेंगे जांच

मुख्यमंत्री धामी ने जांच की पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए अधिकारियों को ‘वार फुटिंग’ पर काम करने के निर्देश दिए हैं:

  • रिकॉर्ड सील करने के निर्देश: मुख्यमंत्री ने आदेश दिया है कि प्रदेश के सभी जिलों के परिवार रजिस्टरों की प्रतियां तत्काल संबंधित जिलाधिकारी (DM) के पास सुरक्षित रखी जाएं, ताकि भविष्य में कोई छेड़छाड़ न हो सके।

  • उच्च स्तरीय जांच: जांच का जिम्मा जिले के वरिष्ठ अधिकारियों यानी CDO (मुख्य विकास अधिकारी) या ADM (अपर जिलाधिकारी) स्तर के अधिकारियों को सौंपा गया है।

  • 22 साल का रिकॉर्ड: जांच का दायरा साल 2003 से रखा गया है, जिससे पिछली सरकारों के कार्यकाल में हुई किसी भी संदिग्ध प्रविष्टि की पहचान की जा सके।


जनसांख्यिकीय असंतुलन पर गहरी चिंता

बैठक के दौरान यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि उत्तराखंड की सीमा से लगे मैदानी जिलों में अनधिकृत बसावट तेजी से बढ़ी है। आरोप है कि बाहरी तत्वों ने फर्जी दस्तावेजों के सहारे परिवार रजिस्टर में नाम दर्ज कराकर प्रदेश के संसाधनों और सुरक्षा पर सेंध लगाने की कोशिश की है।

मुख्यमंत्री ने दो टूक कहा, “उत्तराखंड की संस्कृति और पहचान के साथ कोई समझौता नहीं होगा। अवैध बसावट के जरिए जनसांख्यिकीय संतुलन बिगाड़ने की कोशिशों को यह जांच पूरी तरह बेनकाब करेगी।”


आंकड़ों में फर्जीवाड़े का संकेत?

पंचायती राज विभाग द्वारा पेश किए गए साल 2025 के आंकड़े काफी चिंताजनक हैं:

  • कुल आवेदन: 01 अप्रैल से 31 दिसंबर 2025 के बीच नए परिवार जोड़ने के लिए 2,66,294 आवेदन प्राप्त हुए।

  • स्वीकृत आवेदन: इनमें से 2,60,337 आवेदन स्वीकार किए गए।

  • निरस्त आवेदन: नियमों के उल्लंघन और संदिग्ध दस्तावेजों के कारण 5,429 आवेदन निरस्त किए गए।

विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में आवेदनों का निरस्त होना इस बात का पुख्ता संकेत है कि बड़े पैमाने पर फर्जी प्रविष्टियों की कोशिश की जा रही थी।


नियमों में बड़े बदलाव की तैयारी

वर्तमान में परिवार रजिस्टर की सेवाएं पंचायत राज नियमावली, 1970 के तहत संचालित होती हैं। धामी सरकार अब इसे और अधिक सख्त और डिजिटल बनाने जा रही है:

  1. सख्त नियमावली: सरकार जल्द ही परिवार रजिस्टर नियमावली में संशोधन का प्रस्ताव कैबिनेट में लाएगी।

  2. पारदर्शी प्रक्रिया: नाम दर्ज करने का अधिकार सहायक विकास अधिकारी (पंचायत) के पास रहेगा, लेकिन अब सत्यापन की प्रक्रिया को और अधिक त्रि-स्तरीय बनाया जाएगा।

  3. अपील की सुविधा: किसी भी विवाद की स्थिति में अपील का अधिकार SDM के पास सुरक्षित रहेगा।

  4. डिजिटल इंडिया: ‘अपणी सरकार’ पोर्टल के जरिए अब हर प्रविष्टि पर मुख्यालय से सीधी नजर रखी जाएगी।


देवभूमि की सुरक्षा सर्वोपरि

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की इस पहल को उत्तराखंड में ‘लैंड जिहाद’ और ‘अवैध घुसपैठ’ के खिलाफ सरकार की बड़ी मुहिम के रूप में देखा जा रहा है। जांच रिपोर्ट आने के बाद न केवल फर्जी नाम हटाए जाएंगे, बल्कि उन अधिकारियों पर भी गाज गिर सकती है जिन्होंने मिलीभगत कर ये नाम दर्ज किए थे।

इस बैठक में सचिव गृह शैलेश बगौली, डीजीपी दीपम सेठ, डीजीपी इंटेलिजेंस अभिनव कुमार समेत कई शीर्ष अधिकारी मौजूद रहे, जो इस मिशन की गंभीरता को दर्शाता है।

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