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दिल्लीफीचर्ड

दिल्ली की अवैध कॉलोनियों को मिलेगी वैध पहचान: ‘As is, Where is’ फैसले से 50 लाख लोगों को मालिकाना हक की राह आसान

The Hill India News
Last updated: April 8, 2026 4:21 am
The Hill India News
Published: April 8, 2026
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नई दिल्ली: देश की राजधानी दिल्ली में वर्षों से अनिश्चितता और अस्थिरता के बीच जीवन गुजार रहे लाखों लोगों के लिए केंद्र सरकार ने एक ऐतिहासिक और दूरगामी निर्णय लिया है। ‘As is, Where is’ (जैसा है, जहां है) के सिद्धांत पर आधारित इस फैसले के तहत अब दिल्ली की अनधिकृत कॉलोनियों को नियमित किया जाएगा, जिससे करीब 50 लाख निवासियों को उनके घरों का कानूनी मालिकाना हक मिलने का रास्ता साफ हो गया है। यह कदम न केवल प्रशासनिक सुधार के रूप में देखा जा रहा है, बल्कि इसे सामाजिक और आर्थिक बदलाव की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल भी माना जा रहा है।

Contents
‘पीएम-उदय’ योजना को मिली नई गति1731 में से 1511 कॉलोनियों को मिलेगा लाभकन्वेयंस डीड बनेगा मालिकाना हक का प्रमाणआम लोगों को मिलेंगे कई बड़े फायदेरियल एस्टेट और राजनीति पर असरटीओडी पॉलिसी में भी बदलाव‘As is, Where is’ का मतलब और महत्व

मंगलवार को नेशनल मीडिया सेंटर में आयोजित प्रेस वार्ता में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस फैसले के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय शहरी विकास मंत्री मनोहर लाल खट्टर का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह निर्णय दिल्ली के शहरी विकास के इतिहास में मील का पत्थर साबित होगा और इससे लाखों परिवारों को सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर मिलेगा।

‘पीएम-उदय’ योजना को मिली नई गति

उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार ने वर्ष 2019 में ‘पीएम-उदय’ (PM-UDAY) योजना की शुरुआत की थी, जिसका उद्देश्य अनधिकृत कॉलोनियों में रहने वाले लोगों को संपत्ति का मालिकाना हक देना था। हालांकि, जटिल प्रक्रियाओं, कागजी बाधाओं और तकनीकी दिक्कतों के कारण इस योजना की प्रगति धीमी रही। अब तक केवल लगभग 40 हजार संपत्तियों का ही नियमितीकरण हो पाया था।

नई व्यवस्था के तहत अब इस प्रक्रिया को सरल बनाया गया है और इसे दिल्ली सरकार के राजस्व विभाग को सौंपा गया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के अनुसार, आवेदन करने के 45 दिनों के भीतर पूरी प्रक्रिया पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है, जिससे आम लोगों को राहत मिलेगी।

1731 में से 1511 कॉलोनियों को मिलेगा लाभ

सरकार के इस मास्टर प्लान के तहत दिल्ली की कुल 1731 अनधिकृत कॉलोनियों में से 1511 कॉलोनियों को नियमित करने की श्रेणी में शामिल किया गया है। शेष कॉलोनियों पर तकनीकी मूल्यांकन के बाद निर्णय लिया जाएगा। यह निर्णय उन लाखों परिवारों के लिए राहत लेकर आया है, जो दशकों से ‘अवैध’ का टैग लेकर जी रहे थे।

कन्वेयंस डीड बनेगा मालिकाना हक का प्रमाण

नई प्रक्रिया के तहत पात्र निवासियों को दिल्ली सरकार का राजस्व विभाग ‘कन्वेयंस डीड’ जारी करेगा। यह दस्तावेज संपत्ति के पूर्ण मालिकाना हक का कानूनी प्रमाण होगा। सरकार ने डिजिटल सिस्टम को भी मजबूत किया है, ताकि लोगों को बार-बार सरकारी दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें और पूरी प्रक्रिया पारदर्शी एवं समयबद्ध तरीके से पूरी हो सके।

आम लोगों को मिलेंगे कई बड़े फायदे

इस फैसले के लागू होने से लोगों को कई महत्वपूर्ण लाभ मिलेंगे। सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि अब वे अपने घरों के वैध मालिक बन सकेंगे। इसके साथ ही वे अपनी संपत्ति के आधार पर बैंक से लोन ले सकेंगे, जिससे आर्थिक सशक्तिकरण को बढ़ावा मिलेगा।

इसके अलावा, इन कॉलोनियों में बुनियादी सुविधाओं जैसे सड़क, सीवर, पानी और बिजली के विकास को भी गति मिलेगी। अभी तक अवैध स्थिति के कारण इन क्षेत्रों में विकास कार्य बाधित रहते थे। अब इन इलाकों में योजनाबद्ध विकास संभव हो सकेगा।

रियल एस्टेट और राजनीति पर असर

विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले का असर दिल्ली के रियल एस्टेट बाजार पर भी पड़ेगा। इन क्षेत्रों में संपत्तियों की खरीद-बिक्री अब कानूनी रूप से संभव होगी, जिससे बाजार में पारदर्शिता बढ़ेगी और निवेश के नए अवसर पैदा होंगे।

राजनीतिक दृष्टि से भी यह फैसला बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि इससे एक बड़े वोट बैंक पर सीधा प्रभाव पड़ेगा। भाजपा इसे ‘मोदी की गारंटी’ के रूप में पेश कर रही है, जबकि दिल्ली सरकार इसे तेजी से लागू करने की दिशा में काम कर रही है।

टीओडी पॉलिसी में भी बदलाव

सरकार ने ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD) पॉलिसी में भी महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। अब मेट्रो, नमो रेल और रेलवे स्टेशन के 500 मीटर के दायरे में विकास कार्यों को बढ़ावा दिया जाएगा।

नई नीति के तहत 100 वर्ग मीटर तक के आवासीय यूनिट को बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे हाउसिंग गैप को कम करने में मदद मिलेगी। पहले जहां 8 हेक्टेयर भूमि की आवश्यकता होती थी, अब इसे घटाकर 2000 वर्ग मीटर कर दिया गया है, जिससे छोटे डेवलपर्स को भी अवसर मिलेगा।

‘As is, Where is’ का मतलब और महत्व

‘As is, Where is’ के सिद्धांत का अर्थ है कि कॉलोनियों को उनकी मौजूदा स्थिति के अनुसार ही वैधता प्रदान की जाएगी। यानी जिन निर्माणों में कुछ तकनीकी खामियां हैं, उन्हें भी स्वीकार करते हुए कानूनी मान्यता दी जाएगी। हालांकि, सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि सुरक्षा मानकों और सार्वजनिक उपयोग की भूमि के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा

केंद्र सरकार का यह फैसला केवल एक नीति परिवर्तन नहीं, बल्कि एक सामाजिक बदलाव का संकेत है। यह उन लोगों के लिए सम्मान और सुरक्षा की भावना लेकर आया है, जो वर्षों से अनिश्चितता में जीवन बिता रहे थे।

अब सबसे बड़ी चुनौती इस योजना को धरातल पर प्रभावी तरीके से लागू करना है। आने वाले महीनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि दिल्ली सरकार का राजस्व विभाग कितनी तेजी और पारदर्शिता के साथ कन्वेयंस डीड जारी करता है।

यदि यह योजना सफलतापूर्वक लागू होती है, तो न केवल लाखों लोगों का जीवन स्तर सुधरेगा, बल्कि दिल्ली का शहरी परिदृश्य भी एक नए और व्यवस्थित रूप में सामने आएगा।

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