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देहरादून: राजपुर रोड बार विवाद ने लिया बड़ा रूप, IG और SSP में ‘शीत युद्ध’! पुलिस मुख्यालय ने 24 घंटे में मांगी रिपोर्ट

देहरादून: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में कानून व्यवस्था और अनुशासन को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। राजपुर रोड स्थित एक नामचीन बार-रेस्टोरेंट में शनिवार रात हुई एक घटना ने पुलिस विभाग के भीतर की अंदरूनी खींचतान को चौराहे पर ला खड़ा किया है। मामला इतना गंभीर हो चुका है कि अब पुलिस मुख्यालय (PHQ) को इसमें दखल देना पड़ा है। एडीजी कानून व्यवस्था ने इस प्रकरण में आईजी गढ़वाल और एसएसपी देहरादून दोनों से लिखित स्पष्टीकरण मांगा है।

क्या है पूरा मामला? ‘नाइट स्ट्राइक’ और आईजी की मौजूदगी

दरअसल, देहरादून में पिछले कुछ समय से बढ़ते अपराधों, विशेषकर रिटायर्ड ब्रिगेडियर की हत्या और छात्रों के उपद्रव के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सख्त रुख अपनाया था। इसी क्रम में पुलिस ‘ऑपरेशन प्रहार’ और वीकेंड पर ‘नाइट स्ट्राइक’ अभियान चला रही है। शनिवार रात करीब 12 बजे जब पुलिस की टीमें राजपुर रोड पर समय सीमा का उल्लंघन करने वाले प्रतिष्ठानों की जांच कर रही थीं, तब वहां एक दिलचस्प और विवादित स्थिति पैदा हो गई।

बताया जा रहा है कि जिस बार-रेस्टोरेंट पर पुलिस कार्रवाई के लिए पहुँची थी, वहां आईजी गढ़वाल राजीव स्वरूप अपने परिवार के साथ डिनर कर रहे थे। जैसे ही आईजी बाहर निकले, उन्होंने वहां आधा दर्जन थानों की फोर्स तैनात देखी। भारी पुलिस बल को देखकर आईजी ने मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों से सवाल किया कि आखिर एक ही प्रतिष्ठान पर इतनी फोर्स क्यों लगाई गई है, जबकि शहर के अन्य हिस्सों में भी सुरक्षा की जरूरत है।

एसपी सिटी की सफाई: “मैं वहां मौजूद ही नहीं था”

इस प्रकरण में सोशल मीडिया और कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में एसपी सिटी प्रमोद कुमार का नाम प्रमुखता से उछाला गया। सोमवार देर रात एसपी सिटी ने इस पर अपनी चुप्पी तोड़ी। उन्होंने स्पष्ट किया कि घटना के समय उनका आईजी से कोई आमना-सामना नहीं हुआ।

प्रमोद कुमार, एसपी सिटी ने कहा, उस रात मैं अलग-अलग टीमें बनाकर ‘नाइट स्ट्राइक’ अभियान की निगरानी कर रहा था। जब यह घटना हुई, तब मैं कुठाल गेट क्षेत्र में चेकिंग कर रहा था। मेरा नाम इस प्रकरण में गलत तरीके से जोड़ा जा रहा है, जो पूरी तरह भ्रामक है।”

आईजी गढ़वाल का पक्ष: “नियमों का पालन किया”

दूसरी ओर, आईजी गढ़वाल राजीव स्वरूप ने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि उन्होंने किसी भी नियम का उल्लंघन नहीं किया है। ईटीवी भारत से बातचीत में उन्होंने कहा:

  • वे शनिवार की तय समय सीमा (रात 12 बजे) के भीतर ही रेस्टोरेंट से बाहर आ गए थे।

  • उनके बाहर निकलते ही प्रतिष्ठान की लाइटें बंद कर दी गई थीं।

  • उन्होंने पुलिस बल की तैनाती पर सवाल इसलिए उठाया क्योंकि उनका मानना था कि इतनी बड़ी फोर्स को एक ही जगह केंद्रित करने के बजाय पूरे शहर की गश्त में लगाया जाना चाहिए था।

शासन सख्त: एडीजी ने तलब की रिपोर्ट

पुलिस विभाग के दो शीर्ष स्तरों (रेंज और जिला) के बीच उपजे इस विवाद ने सरकार की भी किरकिरी कराई है। अपर पुलिस महानिदेशक (ADG) कानून व्यवस्था, वी मुरुगेशन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आईजी गढ़वाल और एसएसपी देहरादून प्रमेंद्र डोबाल से 24 घंटे के भीतर विस्तृत आख्या मांगी थी। हालांकि, मंगलवार रात तक इसकी डेडलाइन खत्म हो गई, लेकिन विधानसभा के विशेष सत्र में व्यस्तता के कारण रिपोर्ट नहीं सौंपी जा सकी। सूत्रों के अनुसार, आज शाम तक यह गोपनीय रिपोर्ट मुख्यालय को सौंप दी जाएगी।

राजनीतिक मोड़: NSUI ने किया प्रदर्शन

पुलिस विभाग का यह आंतरिक मामला अब सड़क पर भी उतर आया है। मंगलवार को छात्र संगठन NSUI ने इस मामले को लेकर देहरादून में जोरदार प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि एक तरफ पुलिस ‘ऑपरेशन प्रहार’ के नाम पर सख्ती कर रही है, वहीं दूसरी तरफ आला अधिकारी स्वयं नियमों को ताक पर रख रहे हैं। NSUI के जिला अध्यक्ष हिमांशु ने आईजी के खिलाफ निलंबन की मांग करते हुए उनकी संपत्तियों की जांच कराने की भी बात कही है।

क्यों खड़ा हुआ यह विवाद? (Background)

देहरादून में हाल के दिनों में हुई आपराधिक वारदातों के पीछे देर रात तक खुले रहने वाले बार और क्लबों का कनेक्शन सामने आया था। इसके बाद प्रशासन ने सख्त नियम बनाए:

  • शनिवार और रविवार: रात 12 बजे तक बंद करने का समय।

  • सोमवार से शुक्रवार: रात 11 बजे तक की समय सीमा।

विवाद का मुख्य कारण यह है कि क्या पुलिस का ‘नाइट स्ट्राइक’ अभियान सही था या आईजी की वहां मौजूदगी और पुलिस बल पर उनके द्वारा उठाए गए सवाल जायज थे?

देहरादून पुलिस बार विवाद (Dehradun Police Bar Controversy) अब केवल एक रात की घटना नहीं रह गया है, बल्कि यह विभाग के ‘ईगो क्लैश’ और अनुशासन का मामला बन चुका है। मुख्यालय की जांच रिपोर्ट आने के बाद ही साफ होगा कि क्या वास्तव में नियमों की अनदेखी हुई थी या यह केवल एक गलतफहमी का नतीजा है। फिलहाल, राजधानी की जनता और पुलिस महकमे की नजरें मुख्यालय के अगले कदम पर टिकी हैं।

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