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देहरादून: विकासनगर रजिस्ट्री घोटाले का बड़ा पर्दाफाश; डीएम सविन बंसल के औचक निरीक्षण में खुली स्टांप चोरी की पोल, सब-रजिस्ट्रार निलंबित

देहरादून: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के विकासनगर क्षेत्र में भू-माफियाओं और सरकारी तंत्र की मिलीभगत से चल रहे एक बड़े “खेल” का जिलाधिकारी सविन बंसल ने अंत कर दिया है। विकासनगर उप-निबंधक (सब-रजिस्ट्रार) कार्यालय में किए गए एक औचक निरीक्षण ने न केवल करोड़ों रुपये की स्टांप चोरी का खुलासा किया है, बल्कि नियमों को ताक पर रखकर की गई सैकड़ों अवैध रजिस्ट्रियों के काले चिट्ठे को भी सार्वजनिक कर दिया है।

इस गंभीर अनियमितता और भ्रष्टाचार के मामले को संज्ञान में लेते हुए जिलाधिकारी ने विकासनगर की उप-निबंधक अपूर्वा सिंह के तत्काल निलंबन और उनके विरुद्ध विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई की संस्तुति शासन को भेज दी है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के ‘जीरो टॉलरेंस’ विजन के तहत की गई इस कार्रवाई से पूरे राजस्व विभाग में हड़कंप मचा हुआ है।

औचक निरीक्षण और फाइलों का ढेर: क्या है पूरा मामला?

बीती 4 मई को जिलाधिकारी सविन बंसल अचानक विकासनगर उप-निबंधक कार्यालय पहुँचे थे। इस गोपनीय निरीक्षण का उद्देश्य कार्यालय की कार्यप्रणाली और राजस्व संग्रहण की पारदर्शिता की जांच करना था। निरीक्षण के दौरान डीएम को कार्यालय में भारी अव्यवस्था और संदिग्ध कार्यशैली के प्रमाण मिले।

जांच में पाया गया कि साल 2018 से लेकर 2024 और 2025 तक के कई मूल विलेख पत्र (रजिस्ट्री दस्तावेज) कार्यालय में अत्यंत संदिग्ध परिस्थितियों में डंप किए गए थे। नियमानुसार, पंजीकरण के पश्चात दस्तावेजों का निस्तारण एक तय समय सीमा के भीतर होना चाहिए, लेकिन यहाँ 25 से अधिक महत्वपूर्ण रजिस्ट्रियां सालों से बिना किसी वैध कारण के रोकी गई थीं। जब डीएम ने इस देरी पर स्पष्टीकरण मांगा, तो कार्यालय के पास कोई संतोषजनक उत्तर नहीं था।

गोल्डन फॉरेस्ट की प्रतिबंधित भूमि पर 150 अवैध रजिस्ट्रियां

इस विकासनगर रजिस्ट्री घोटाला का सबसे चौंकाने वाला पहलू ‘गोल्डन फॉरेस्ट’ की भूमि से जुड़ा है। बता दें कि गोल्डन फॉरेस्ट की भूमि माननीय उच्च न्यायालय के आदेशानुसार विक्रय के लिए पूरी तरह प्रतिबंधित है और इसके खाते फ्रीज (बाधित) किए गए हैं।

निरीक्षण के दौरान डीएम ने पाया कि नियमों और कोर्ट के आदेशों की सरेआम धज्जियां उड़ाते हुए इस प्रतिबंधित श्रेणी की भूमि पर 150 से अधिक अवैध रजिस्ट्रियां की गईं। यह सीधे तौर पर न्यायालय की अवमानना और पद के दुरुपयोग का मामला है। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि इन रजिस्ट्रियों के माध्यम से न केवल सरकार को करोड़ों के राजस्व का चूना लगाया गया, बल्कि आम खरीदारों के साथ भी बड़ी धोखाधड़ी की गई।

करोड़ों की स्टांप चोरी: धारा 47-ए के तहत 47 मामले चिन्हित

राजस्व की क्षति का आकलन करते हुए जिला प्रशासन ने स्टांप शुल्क चोरी के 47 प्रकरण चिन्हित किए हैं। इन मामलों में धारा 47-ए के तहत कार्रवाई की जा रही है। जिलाधिकारी के अनुसार, यह करोड़ों रुपये के राजस्व नुकसान का गंभीर मामला है, जिसमें भूमि के सर्किल रेट और वास्तविक मूल्यांकन में हेराफेरी कर सरकार को मिलने वाले टैक्स को हड़पा गया है।

अभिलेखों के रखरखाव में लापरवाही और रिकॉर्ड प्रबंधन की खामियों को देखते हुए डीएम ने स्पष्ट किया कि इसमें केवल वर्तमान अधिकारी ही नहीं, बल्कि पूर्व में तैनात रहे सब-रजिस्ट्रारों की भूमिका की भी जांच की जाएगी।

भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’

निरीक्षण के बाद मीडिया से बात करते हुए जिलाधिकारी सविन बंसल ने कहा:

“मुख्यमंत्री के स्पष्ट निर्देश हैं कि राजस्व और भूमि संबंधी मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही या भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। विकासनगर कार्यालय में पारदर्शिता की भारी कमी पाई गई है। हमने सभी संदिग्ध अभिलेखों को जब्त कर लिया है और एक विस्तृत जांच रिपोर्ट शासन को भेजी जा रही है। दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।”

प्रशासन की अगली कार्रवाई: व्यापक जांच के निर्देश

डीएम ने विकासनगर के वर्तमान स्टाफ के साथ-साथ पूर्व में तैनात रहे अधिकारियों के कार्यकाल की भी कुंडली खंगालने के निर्देश दिए हैं। जांच टीम यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि प्रतिबंधित भूमि की रजिस्ट्री करने के पीछे किन भू-माफियाओं का हाथ है और इस भ्रष्टाचार की जड़ें कहां तक फैली हैं।

जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में भी इस प्रकार के औचक निरीक्षण और कठोर कार्रवाइयां जारी रहेंगी। प्रशासन का मुख्य उद्देश्य पारदर्शी, जवाबदेह और जनहितकारी शासन सुनिश्चित करना है।

विकासनगर रजिस्ट्री घोटाला ने यह साबित कर दिया है कि यदि प्रशासनिक नेतृत्व दृढ़ हो, तो तंत्र में छिपे भ्रष्टाचार को जड़ से उखाड़ा जा सकता है। सविन बंसल की इस कार्रवाई ने आम जनता में विश्वास जगाया है कि सरकारी जमीनों और राजस्व के साथ खिलवाड़ करने वालों के दिन अब गिनती के रह गए हैं। अब सबकी निगाहें शासन द्वारा की जाने वाली अगली विधिक कार्रवाई पर टिकी हैं।

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