By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
The Hill IndiaThe Hill IndiaThe Hill India
Notification Show More
Font ResizerAa
  • होम
  • फीचर्ड
  • उत्तराखंड
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • पर्यावरण
  • क्राइम
  • पर्यटन
  • शिक्षा
  • स्वास्थय
  • सामाजिक
  • स्पोर्ट्स
  • वीडियो
  • Contact Us
Reading: देहरादून की कुम्हार मंडी में दीपावली से पहले मिट्टी की किल्लत — परंपरागत दीयों और मूर्तियों के कारोबार पर संकट
Share
Font ResizerAa
The Hill IndiaThe Hill India
  • होम
  • फीचर्ड
  • उत्तराखंड
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • पर्यावरण
  • क्राइम
  • पर्यटन
  • शिक्षा
  • स्वास्थय
  • सामाजिक
  • स्पोर्ट्स
  • वीडियो
  • Contact Us
Search
  • होम
  • फीचर्ड
  • उत्तराखंड
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • पर्यावरण
  • क्राइम
  • पर्यटन
  • शिक्षा
  • स्वास्थय
  • सामाजिक
  • स्पोर्ट्स
  • वीडियो
  • Contact Us
Have an existing account? Sign In
Follow US
The Hill India > Blog > देहरादून > देहरादून की कुम्हार मंडी में दीपावली से पहले मिट्टी की किल्लत — परंपरागत दीयों और मूर्तियों के कारोबार पर संकट
देहरादूनफीचर्ड

देहरादून की कुम्हार मंडी में दीपावली से पहले मिट्टी की किल्लत — परंपरागत दीयों और मूर्तियों के कारोबार पर संकट

The Hill India News
Last updated: October 18, 2025 12:39 pm
The Hill India News
Published: October 18, 2025
Share
SHARE

देहरादून, 18 अक्टूबर | देशभर में दीपावली के त्यौहार की रौनक चरम पर है। बाजारों में भीड़, घरों में सजावट की तैयारी और रोशनी की जगमगाहट के बीच हर कोई रोशनी के इस पर्व को उत्साह से मनाने की तैयारी में जुटा है।

Contents
मिट्टी की उपलब्धता हुई कम, परंपरा पर संकटदो महीने से ठप पड़ा काम, मजदूर घर बैठेदीयों की कीमतों में भारी बढ़ोतरीस्थानीय उत्पादन घटा, बाहर से आ रहा मालकला और परंपरा पर असरजलवायु परिवर्तन का असर भी दिखासरकार और समाज से उम्मीदपरंपरा की रौशनी बचाने की चुनौती

देहरादून के बाजारों में भी नए कपड़े, सजावटी सामान, बिजली की लड़ियां और मिट्टी के दीयों की खरीदारी तेज़ है। लेकिन इसी चकाचौंध के बीच शहर की कुम्हार मंडी में इस बार रौनक कुछ फीकी दिखाई दे रही है।

यहाँ पारंपरिक मिट्टी के दीये और लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियाँ बनाने वाले कुम्हार मिट्टी की भारी कमी और महंगाई से परेशान हैं। इस बार दीयों और मूर्तियों की बढ़ती मांग के बावजूद स्थानीय कारीगरों के चूल्हे ठंडे हैं, क्योंकि मिट्टी न मिलने के कारण उत्पादन बुरी तरह प्रभावित हुआ है।


मिट्टी की उपलब्धता हुई कम, परंपरा पर संकट

कुम्हार मंडी के कलाकार बताते हैं कि इस बार दीये बनाने में सबसे बड़ी दिक्कत मिट्टी की उपलब्धता में कमी की है। पहले देहरादून के मेहुवाला क्षेत्र से आसानी से चिकनी मिट्टी मिल जाती थी, जो दीये और मूर्तियों के निर्माण के लिए आदर्श मानी जाती थी।
लेकिन इस बार मानसून के दौरान ज्यादा बारिश और जलभराव के कारण मिट्टी की गुणवत्ता बेहद खराब हो गई है। मिट्टी में अब गंदगी, रेत और पत्थरों की मात्रा बढ़ गई है, जिससे दीयों की शेप बिगड़ जाती है और टूटने का खतरा बढ़ जाता है।

कारीगर कार्तिक प्रजापति, जो अपने परिवार के साथ पीढ़ियों से यह काम कर रहे हैं, बताते हैं,

“पहले एक ट्रॉली मिट्टी हमें 7 से 8 हजार रुपये में मिल जाती थी, लेकिन इस बार वही मिट्टी 15 हजार से कम में नहीं मिल रही। ऊपर से क्वालिटी भी पहले जैसी नहीं है। अब देहरादून में मिट्टी मिलना मुश्किल हो गया है, इसलिए हमें सहारनपुर से मिट्टी मंगवानी पड़ रही है, जो महंगी भी पड़ती है।”


दो महीने से ठप पड़ा काम, मजदूर घर बैठे

मिट्टी की कमी का असर केवल उत्पादन पर ही नहीं बल्कि मजदूरों की रोजी-रोटी पर भी पड़ा है।
कुम्हार मंडी में काम करने वाले कई मजदूरों को पिछले दो महीनों से काम नहीं मिला।
आम तौर पर एक कारीगर एक दिन में 1200 से 1500 दीये तैयार कर लेता है, और एक महीने में यह संख्या 36,000 से 40,000 दीयों तक पहुँच जाती है।
लेकिन इस बार मिट्टी की अनुपलब्धता के चलते कई कारीगरों को दो महीने तक घर में खाली बैठना पड़ा।

कार्तिक बताते हैं,

“हमारे यहां करीब 10-12 लोग काम करते हैं। दो महीने तक सबके पास कोई काम नहीं था। मिट्टी नहीं मिली तो न दीये बने, न मूर्तियाँ। दीपावली के वक्त जो हमारी कमाई का समय होता है, वही सबसे मुश्किल वक्त बन गया।”


दीयों की कीमतों में भारी बढ़ोतरी

मिट्टी की कमी और बढ़ती लागत का सीधा असर दीयों की कीमतों पर पड़ा है।
पहले जो छोटे दीये ₹2 या ₹3 में मिल जाते थे, अब वही दीये ₹7 से ₹10 तक में बिक रहे हैं।
इस वजह से खरीदार भी ज़्यादा सामान नहीं खरीद पा रहे हैं।

कुम्हार मंडी के व्यापारी बंसीलाल प्रजापति बताते हैं,

“डिमांड बहुत ज्यादा है, लेकिन माल नहीं बन पा रहा। जो भी थोड़ा बहुत बन रहा है या बाहर से आ रहा है, उसकी कीमत बढ़ गई है। गुजरात और राजस्थान से जो दीये आ रहे हैं, वे ट्रांसपोर्ट और मिट्टी दोनों की लागत बढ़ा रहे हैं।”


स्थानीय उत्पादन घटा, बाहर से आ रहा माल

कुम्हार मंडी में इस बार कारोबारियों को मजबूरन बाहर से माल मंगवाना पड़ रहा है।
अनमोल कुमार प्रजापति, जो कई वर्षों से मिट्टी के बर्तन और दीये बनाते हैं, बताते हैं,

“इस बार आधा से भी कम उत्पादन हो पाया है। पहले यहां 25 लाख तक का कारोबार हो जाता था, लेकिन अब आधा भी नहीं हो रहा। हमें गुजरात और दूसरे राज्यों से दीये और मूर्तियाँ मंगवानी पड़ रही हैं। इससे मुनाफा भी घट गया और पारंपरिक पहचान पर भी असर पड़ा।”


कला और परंपरा पर असर

कुम्हार मंडी के ये कलाकार केवल कारोबार नहीं करते, बल्कि यह उनकी सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा है।
हर दीपावली पर उनके बनाए दीयों से हजारों घरों में रोशनी होती है। लेकिन इस बार मिट्टी की कमी ने न केवल अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया है, बल्कि कला और परंपरा दोनों पर संकट खड़ा कर दिया है।

स्थानीय निवासी मालती देवी कहती हैं,

“हम हर साल यहीं से दीये और मूर्तियाँ लेते हैं। लेकिन इस बार कीमतें ज्यादा हैं और वैराइटी कम है। फिर भी कोशिश करते हैं कि कुम्हारों का काम जारी रहे, क्योंकि यह हमारी परंपरा है।”


जलवायु परिवर्तन का असर भी दिखा

विशेषज्ञों का मानना है कि इस समस्या के पीछे जलवायु परिवर्तन और अनियमित मानसून की बड़ी भूमिका है।
देहरादून और आसपास के क्षेत्रों में इस बार सामान्य से ज्यादा बारिश हुई, जिससे चिकनी मिट्टी की परतें जलमग्न हो गईं।
इससे मिट्टी में नमी और रासायनिक बदलाव आया, जिससे वह दीये या मूर्तियों के लिए उपयुक्त नहीं रही।

पर्यावरण विशेषज्ञ डॉ. संजय बिष्ट का कहना है,

“हमें यह समझना होगा कि पारंपरिक मिट्टी उद्योग भी जलवायु परिवर्तन से प्रभावित हो रहा है। लगातार भारी बारिश और मिट्टी के स्रोतों पर अतिक्रमण ने कारीगरों के लिए स्थिति कठिन बना दी है। यह केवल आर्थिक नहीं, पर्यावरणीय मुद्दा भी है।”


सरकार और समाज से उम्मीद

कुम्हार मंडी के कलाकारों को उम्मीद है कि सरकार और स्थानीय प्रशासन इस दिशा में मदद करेगा।
कारीगरों का सुझाव है कि मिट्टी की आपूर्ति के लिए विशेष ‘क्ले बैंक’ या मिट्टी वितरण केंद्र बनाए जाएं, ताकि पारंपरिक शिल्पियों को समय पर अच्छी गुणवत्ता की मिट्टी मिल सके।

राज्य सरकार द्वारा हस्तशिल्प और पारंपरिक कला के संरक्षण के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं, लेकिन स्थानीय कुम्हार चाहते हैं कि इन्हें जमीनी स्तर पर लागू किया जाए।


परंपरा की रौशनी बचाने की चुनौती

देहरादून की कुम्हार मंडी इस समय परंपरा और आधुनिकता के बीच संघर्ष का प्रतीक बन गई है।
एक ओर लोग बाजार से इलेक्ट्रॉनिक लाइट्स और सजावटी बल्ब खरीद रहे हैं, तो वहीं दूसरी ओर मिट्टी के दीयों की असली रौशनी मिट्टी की कमी में धुंधला रही है।

फिर भी, इन कारीगरों की उंगलियों में वो मिट्टी की खुशबू और परिश्रम की चमक अब भी बाकी है — जो हर दीपावली पर इस उम्मीद के साथ दीया जलाती है कि अगली बार उनके घर भी उतनी ही रोशनी होगी, जितनी उनके दीयों से दूसरों के घरों में पहुँचती है।

You Might Also Like

UP: अलीगढ़ में मंदिरों की दीवारों पर ‘I Love Mohammed’ लिखे जाने से बवाल, पुलिस ने 8 के खिलाफ किया केस दर्ज 
ईद के मौके पर मुस्लिमों के बीच बोलीं ममता बनर्जी, ‘दंगों में भी रहें शांत, नहीं तो आ जाएगी NIA’
UPCL के प्रबंध निदेशक को हाईकोर्ट से बड़ी राहत, बॉबी पंवार की याचिका खारिज – जानिए पूरा मामला
सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: घर खरीदारों को राहत, बिल्डर भी चुकाेंगे 18% ब्याज
New Delhi: चक्रवाती तूफ़ान के टकराने से गुजरात में भारी बारिश की सम्भावना, समंदर किनारे सन्नाटा
Share This Article
Facebook Email Print
Leave a Comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Follow US

Find US on Social Medias
FacebookLike
XFollow
YoutubeSubscribe
TelegramFollow
Popular News
देशफीचर्ड

जंतर-मंतर पर 32वें दिन भी डटे छात्र: JP नड्डा ने अस्पताल में वांगचुक से की मुलाकात, सड़क से संसद तक क्यों गरमाई नीट पेपर लीक पर सियासत?

The Hill India News
The Hill India News
July 22, 2026
दिल्ली में हाई-वोल्टेज ड्रामा: राहुल, प्रियंका और अखिलेश यादव पुलिस हिरासत में, पीएम आवास के बाहर धरना स्थल छावनी में तब्दील
हरिद्वार आम महोत्सव में मुख्यमंत्री धामी का बड़ा ऐलान: किसान उत्तराखंड की असली ताकत, एप्पल मिशन पर 80% सब्सिडी और ‘हिमालय ब्रांड’ से ग्लोबल पहचान
उत्तराखंड हाईकोर्ट की पुलिस को सख्त फटकार: प्रभात ध्यानी की ट्रेन से गिरफ्तारी पर पूछा- क्या नागरिकों की स्वतंत्रता छीन ली गई है?
राहुल गांधी का 7 लोक कल्याण मार्ग पर धरना: शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और पेपर लीक पर संसद से सड़क तक संग्राम
बारिश का महाअलर्ट: दिल्ली से हिमाचल और यूपी-बिहार तक मौसम का कहर, 20 राज्यों में भारी वर्षा की चेतावनी; प्रशासन अलर्ट पर
छात्रों के समर्थन में सड़क पर उतरी कांग्रेस: राहुल, प्रियंका और खड़गे का पीएम आवास तक मार्च, शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग तेज
‘मेरी पीठ में खंजर घोंपा, सारे चोर भाजपा में चले गए’— ममता बनर्जी का बड़ा हमला, विपक्षी एकता की भी दोहराई अपील
मध्यप्रदेश में UCC को मिली विधानसभा की मंजूरी: हंगामे, ‘जय श्रीराम’ के नारों और तीखी बहस के बीच पास हुआ ऐतिहासिक विधेयक
पेपर लीक पर उत्तराखंड में उबाल: गैरसैंण से हल्द्वानी तक छात्रों का प्रदर्शन, शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग तेज
© The Hill India. All Rights Reserved | Developed By: Tech Yard Labs
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?