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उत्तराखंडफीचर्ड

गांधी-शास्त्री जयंती पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दी श्रद्धांजलि, कहा- “सत्य, अहिंसा और सादगी आज भी प्रासंगिक”

The Hill India News
Last updated: October 2, 2025 12:58 pm
The Hill India News
Published: October 2, 2025
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देहरादून: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को मुख्यमंत्री आवास में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती पर उन्हें नमन करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर उन्होंने दोनों महान विभूतियों के विचारों और आदर्शों को स्मरण करते हुए कहा कि आज के दौर में भी गांधी जी और शास्त्री जी के सिद्धांत हमारे जीवन और समाज को दिशा देने में उतने ही सार्थक हैं, जितने स्वतंत्रता संग्राम के समय थे।

Contents
गांधी जी के विचारों की प्रासंगिकता पर बलशास्त्री जी की सादगी और त्याग को बताया प्रेरणादायीआयोजन का माहौल और संदेशगांधी-शास्त्री की विरासत और आज का भारतमुख्यमंत्री का संकल्प

मुख्यमंत्री ने कहा कि गांधी जी ने सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलते हुए पूरी दुनिया को यह संदेश दिया कि हिंसा और संघर्ष की बजाय संवाद, प्रेम और करुणा से भी बड़े से बड़ा बदलाव लाया जा सकता है। वहीं शास्त्री जी ने अपने सादगीपूर्ण जीवन और “जय जवान, जय किसान” के मंत्र से देश को आत्मनिर्भरता, स्वाभिमान और राष्ट्रहित के प्रति समर्पण की राह दिखाई।

गांधी जी के विचारों की प्रासंगिकता पर बल

मुख्यमंत्री धामी ने महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि देते हुए कहा, “गांधी जी के सत्य और अहिंसा के सिद्धांत आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं। हमें अपने आचरण में अहिंसा का भाव जागृत करने के साथ ही मानवता के प्रति करुणा का भाव पैदा करना होगा। यही हमारी ओर से उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।”

उन्होंने कहा कि आज जब पूरी दुनिया हिंसा, युद्ध और टकराव जैसी चुनौतियों से जूझ रही है, तब गांधी जी का दर्शन और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। गांधी जी ने केवल भारत को स्वतंत्रता दिलाने का आंदोलन नहीं चलाया, बल्कि पूरी मानवता के लिए यह उदाहरण पेश किया कि बिना हथियार उठाए भी सच्चाई और धैर्य से अत्याचार का मुकाबला किया जा सकता है।

मुख्यमंत्री ने इस मौके पर युवाओं को विशेष संदेश देते हुए कहा कि नई पीढ़ी को गांधी जी के जीवन से प्रेरणा लेकर अपने व्यवहार में सहिष्णुता और ईमानदारी को अपनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि स्वच्छता अभियान, ग्रामीण विकास, आत्मनिर्भरता और सामाजिक न्याय जैसे क्षेत्रों में गांधी जी की सोच आज भी मार्गदर्शक है।

शास्त्री जी की सादगी और त्याग को बताया प्रेरणादायी

मुख्यमंत्री धामी ने पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय लाल बहादुर शास्त्री को याद करते हुए कहा कि शास्त्री जी ने भारत के सार्वजनिक जीवन में ईमानदारी, सादगी, कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्र के प्रति समर्पण की एक अद्भुत मिसाल कायम की। उन्होंने कहा, “शास्त्री जी ने ‘जय जवान, जय किसान’ का नारा देकर न सिर्फ सैनिकों और किसानों का मनोबल बढ़ाया, बल्कि पूरे राष्ट्र को एकजुट कर आत्मनिर्भरता और स्वाभिमान की ओर बढ़ने का मार्ग दिखाया।”

उन्होंने यह भी कहा कि आज जब देश ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है, तब शास्त्री जी की सोच और भी प्रासंगिक हो गई है। मुख्यमंत्री ने याद दिलाया कि शास्त्री जी ने युद्ध के कठिन समय में भी अडिग रहकर राष्ट्र को मजबूती प्रदान की और जनता को सादगी से जीने का संदेश दिया।

आयोजन का माहौल और संदेश

मुख्यमंत्री आवास पर आयोजित इस कार्यक्रम में राज्य के कई वरिष्ठ अधिकारी और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। सभी ने गांधी जी और शास्त्री जी के चित्र पर पुष्प अर्पित किए और उनके विचारों को याद किया। इस दौरान वातावरण में राष्ट्रभक्ति और प्रेरणा का भाव दिखाई दिया।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि गांधी जयंती केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह आत्ममंथन और आत्मसुधार का अवसर है। उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि वे गांधी जी के स्वच्छता, सत्यनिष्ठा और आत्मनिर्भरता के संदेश को अपने जीवन का हिस्सा बनाएं। साथ ही शास्त्री जी की तरह ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा को अपनाकर राष्ट्र के निर्माण में योगदान दें।

गांधी-शास्त्री की विरासत और आज का भारत

लेखकों और इतिहासकारों के अनुसार, महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री भारतीय राजनीति और समाज के ऐसे स्तंभ हैं, जिनकी विरासत समय के साथ और मजबूत हुई है। गांधी जी का “सत्याग्रह” आज भी दुनिया भर के आंदोलनों की प्रेरणा है, वहीं शास्त्री जी की सादगी और ईमानदारी प्रशासनिक और राजनीतिक जीवन के आदर्श माने जाते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि आज जब राजनीति में शुचिता और पारदर्शिता की कमी को लेकर सवाल उठते हैं, तब गांधी और शास्त्री की जीवनशैली आने वाली पीढ़ी के लिए प्रेरक है। गांधी जी की “स्वदेशी सोच” और शास्त्री जी का “जय जवान जय किसान” नारा आज के भारत के आत्मनिर्भरता मिशन से सीधे जुड़ते हैं।

मुख्यमंत्री का संकल्प

अपने संबोधन में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखंड सरकार गांधी जी और शास्त्री जी के आदर्शों को जनकल्याणकारी योजनाओं के जरिए धरातल पर उतारने के लिए संकल्पबद्ध है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और स्वच्छता जैसे क्षेत्रों में गांधी जी की सोच को अपनाते हुए योजनाओं को लागू कर रही है।

धामी ने यह भी कहा कि सरकार किसानों और युवाओं को सशक्त बनाने के लिए नीतियां बना रही है, जो शास्त्री जी के सपनों का भारत गढ़ने की दिशा में एक कदम है।

गांधी जयंती और शास्त्री जयंती का यह अवसर न केवल दो महान विभूतियों को याद करने का दिन है, बल्कि उनके आदर्शों को जीवन में उतारने का संकल्प लेने का भी अवसर है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का यह संदेश कि सत्य, अहिंसा, सादगी और कर्तव्यनिष्ठा ही राष्ट्र को नई ऊंचाइयों तक ले जा सकते हैं, वास्तव में आज के भारत की जरूरत भी है और भविष्य की राह भी।

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