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उत्तराखंड में कछुआ चाल से चल रही जनगणना 2027: 1.53% ही काम पूरा, 24 मई के बाद बंद हो जाएगा पोर्टल, बढ़ीं चुनौतियां

The Hill India News
Last updated: May 6, 2026 11:18 am
The Hill India News
Published: May 6, 2026
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उत्तराखंड में जनगणना 2027 के पहले चरण के तहत चल रहा मकान सूचीकरण और मकानों की गणना का कार्य इस समय गंभीर चुनौतियों से जूझ रहा है। राज्य भर में यह प्रक्रिया बेहद धीमी गति से आगे बढ़ रही है, जिससे प्रशासनिक स्तर पर चिंता बढ़ गई है। महज 11 दिनों में केवल 1.53 प्रतिशत हाउस लिस्टिंग ब्लॉक्स (HLB) में ही काम पूरा हो पाया है, जबकि 24 मई 2026 को इस चरण के लिए निर्धारित पोर्टल बंद हो जाएगा। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्या तय समय सीमा के भीतर यह विशाल कार्य पूरा हो पाएगा या नहीं।

Contents
जनगणना की धीमी रफ्तार बनी चिंता का विषय25 अप्रैल से शुरू हुआ था पहला चरणडिजिटल जनगणना बनी बड़ी चुनौतीजिलों में स्थिति बेहद असमाननगर निगम क्षेत्रों में भी धीमी प्रगति20 हजार से अधिक कर्मचारी तैनात, फिर भी सुस्तीडिजिटल सिस्टम के प्रति झिझकनेटवर्क और तकनीकी समस्याएं भी बाधादेहरादून में आदेश से बढ़ा विवादकर्मचारियों को बदलना संभव नहींस्वगणना अभियान में सीमित भागीदारीऐतिहासिक और विशेष जनगणना24 मई के बाद बंद हो जाएगा पोर्टलजिलों को भेजे गए निर्देशआगे की राह

जनगणना की धीमी रफ्तार बनी चिंता का विषय

देहरादून सहित राज्य के अधिकांश जिलों में जनगणना का कार्य कछुआ गति से चल रहा है। जनगणना कार्य निदेशालय के आंकड़ों के अनुसार, राज्य में कुल 29,641 हाउस लिस्टिंग ब्लॉक्स बनाए गए हैं, लेकिन इनमें से केवल 453 ब्लॉक्स में ही काम पूरा हुआ है। 16,729 ब्लॉक्स में कार्य जारी है, जबकि 12,459 ब्लॉक्स ऐसे हैं, जहां अभी तक काम शुरू भी नहीं हुआ है।

यह स्थिति प्रशासनिक तैयारियों और कार्यान्वयन की क्षमता पर सवाल खड़े कर रही है। यदि यही गति बनी रही, तो 24 मई तक 50 प्रतिशत कार्य भी पूरा होना मुश्किल लग रहा है।

25 अप्रैल से शुरू हुआ था पहला चरण

जनगणना 2027 के पहले चरण की शुरुआत 25 अप्रैल 2026 से हुई थी। इस चरण में मकान सूचीकरण और मकानों की गणना की जा रही है। यह प्रक्रिया 24 मई 2026 तक जारी रहनी है। इसके लिए राज्य को जिलों और नगर निगमों के आधार पर विभाजित किया गया है।

प्रत्येक जिले में जिलाधिकारी को प्रमुख जनगणना अधिकारी बनाया गया है, जबकि नगर निगम क्षेत्रों में नगर आयुक्त को यह जिम्मेदारी दी गई है। इसके अलावा, हाउस लिस्टिंग ब्लॉक्स का डिजिटली मैपिंग भी किया गया है, ताकि कार्य को व्यवस्थित तरीके से पूरा किया जा सके।

डिजिटल जनगणना बनी बड़ी चुनौती

इस बार जनगणना पूरी तरह डिजिटल माध्यम से की जा रही है, जो इसे ऐतिहासिक बनाती है। प्रगणकों और सुपरवाइजर्स को मोबाइल एप्लिकेशन के जरिए डेटा एकत्र करना है। इसके साथ ही “जनगणना प्रबंधन एवं निगरानी प्रणाली (CMMS)” पोर्टल का उपयोग किया जा रहा है।

हालांकि, यही डिजिटल प्रणाली अब बड़ी चुनौती बन गई है। कई प्रगणक तकनीकी रूप से सहज नहीं हैं, जिसके कारण वे मोबाइल ऐप के बजाय कागजों पर डेटा एकत्र कर रहे हैं। इससे डेटा अपलोड में देरी हो रही है और वास्तविक प्रगति कम दिखाई दे रही है।

जिलों में स्थिति बेहद असमान

राज्य के 13 जिलों में जनगणना की स्थिति अलग-अलग है, लेकिन अधिकांश जगहों पर प्रगति धीमी है।

  • अल्मोड़ा में 2,428 ब्लॉक्स में से केवल 29 में काम पूरा हुआ
  • बागेश्वर में 1,069 में से 25
  • चमोली में 1,465 में से 21
  • चंपावत में 903 में से 39
  • देहरादून में एक भी ब्लॉक में काम पूरा नहीं
  • पौड़ी में 173 ब्लॉक्स में कार्य पूरा
  • हरिद्वार में 26
  • नैनीताल में 11
  • पिथौरागढ़ में 84
  • रुद्रप्रयाग में 22
  • टिहरी में 13
  • उधम सिंह नगर में 3
  • उत्तरकाशी में 4 ब्लॉक्स में कार्य पूरा हुआ

इन आंकड़ों से साफ है कि राज्य में कहीं भी संतोषजनक प्रगति नहीं हो रही है।

नगर निगम क्षेत्रों में भी धीमी प्रगति

राज्य के 11 नगर निगमों में भी स्थिति बेहतर नहीं है। देहरादून नगर निगम में 1,958 ब्लॉक्स में से केवल 1 में काम पूरा हुआ है। इसी तरह हरिद्वार और रुद्रपुर में भी बेहद सीमित प्रगति दर्ज की गई है।

हालांकि, कुछ नगर निगम जैसे श्रीनगर और काशीपुर में कार्य अपेक्षाकृत तेजी से चल रहा है, लेकिन कुल मिलाकर तस्वीर चिंताजनक ही है।

20 हजार से अधिक कर्मचारी तैनात, फिर भी सुस्ती

जनगणना कार्य के लिए राज्य में 20,859 प्रगणक और 3,670 सुपरवाइजर्स तैनात किए गए हैं। इनमें लगभग 14 हजार शिक्षक भी शामिल हैं। इतनी बड़ी संख्या में कर्मचारियों की तैनाती के बावजूद काम की गति धीमी होना कई सवाल खड़े करता है।

डिजिटल सिस्टम के प्रति झिझक

जनगणना निदेशालय की निदेशक इवा आशीष श्रीवास्तव के अनुसार, कई प्रगणक मोबाइल ऐप के उपयोग में सहज महसूस नहीं कर रहे हैं। यही कारण है कि वे कागजों पर डेटा एकत्र कर रहे हैं और बाद में अपलोड करने की योजना बना रहे हैं।

हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि यह पूरी प्रक्रिया डिजिटल है और डेटा को एप्लिकेशन पर ही अपलोड करना अनिवार्य है।

नेटवर्क और तकनीकी समस्याएं भी बाधा

राज्य के कई दूरस्थ क्षेत्रों में इंटरनेट कनेक्टिविटी की समस्या भी सामने आ रही है। हालांकि, एप्लिकेशन में ऑफलाइन डेटा एंट्री की सुविधा दी गई है, लेकिन बाद में नेटवर्क मिलने पर डेटा अपलोड करना आवश्यक है।

तकनीकी समस्याओं के समाधान के लिए जिला स्तर पर कोऑर्डिनेशन की व्यवस्था की गई है, लेकिन इसके बावजूद फील्ड में काम कर रहे कर्मचारियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

देहरादून में आदेश से बढ़ा विवाद

देहरादून में एक प्रशासनिक आदेश ने स्थिति को और जटिल बना दिया। जिला जनगणना अधिकारी द्वारा जारी आदेश में बीएलओ (Booth Level Officers) को जनगणना कार्य से हटाने की बात कही गई, जिससे प्रगणकों में भ्रम की स्थिति पैदा हो गई।

इस आदेश के बाद कई प्रगणकों ने काम रोक दिया और अपने किट जमा कराने लगे। इससे जनगणना कार्य पर सीधा असर पड़ा।

कर्मचारियों को बदलना संभव नहीं

जनगणना निदेशालय ने स्पष्ट किया है कि एक बार कर्मचारियों की नियुक्ति और प्रशिक्षण हो जाने के बाद उन्हें बदलना संभव नहीं है। यदि ऐसा किया जाता है, तो नए कर्मचारियों को प्रशिक्षण देने में समय लगेगा और तय समय सीमा में कार्य पूरा करना असंभव हो जाएगा।

स्वगणना अभियान में सीमित भागीदारी

जनगणना से पहले 10 अप्रैल से 24 अप्रैल तक स्वगणना अभियान चलाया गया था। इस दौरान राज्य में 71,104 परिवारों ने स्वयं जनगणना की।

हालांकि, यह संख्या राज्य की कुल आबादी के मुकाबले काफी कम है, जिससे स्पष्ट है कि लोगों में जागरूकता की कमी भी एक बड़ी चुनौती है।

ऐतिहासिक और विशेष जनगणना

भारत में पहली जनगणना 1872 में हुई थी, जबकि आजादी के बाद पहली जनगणना 1951 में हुई। जनगणना 2027 देश की 16वीं और स्वतंत्र भारत की 8वीं जनगणना होगी।

इस बार जातिगत जनगणना भी की जाएगी, जिससे यह प्रक्रिया और अधिक महत्वपूर्ण बन जाती है।

24 मई के बाद बंद हो जाएगा पोर्टल

जनगणना निदेशालय ने स्पष्ट किया है कि 24 मई 2026 की रात 12 बजे के बाद एप्लिकेशन बंद कर दिया जाएगा। इसके बाद किसी भी प्रकार का डेटा अपलोड नहीं किया जा सकेगा।

इसका मतलब है कि यदि तय समय सीमा तक कार्य पूरा नहीं हुआ, तो संबंधित क्षेत्रों की जनगणना अधूरी रह सकती है।

जिलों को भेजे गए निर्देश

धीमी प्रगति को देखते हुए सभी जिलों को निर्देश भेजे गए हैं कि वे कार्य में तेजी लाएं और समय सीमा के भीतर जनगणना पूरी करें।

आगे की राह

वर्तमान स्थिति को देखते हुए यह स्पष्ट है कि जनगणना 2027 का पहला चरण उत्तराखंड में एक बड़ी प्रशासनिक परीक्षा बन गया है। यदि जल्द ही ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह कार्य समय पर पूरा होना मुश्किल होगा।

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