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उत्तराखंड: दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का असर, हरिद्वार का पर्यटन कारोबार 40% तक प्रभावित, टूरिस्ट कर रहे बाइपास

The Hill India News
Last updated: May 6, 2026 9:59 am
The Hill India News
Published: May 6, 2026
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उत्तराखंड की धर्मनगरी हरिद्वार, जिसे सदियों से आस्था और पर्यटन का प्रमुख केंद्र माना जाता रहा है, इन दिनों आर्थिक मंदी जैसी स्थिति का सामना कर रही है। इसका मुख्य कारण हाल ही में शुरू हुआ दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे बताया जा रहा है। इस एक्सप्रेसवे ने जहां यात्रियों के लिए सफर को तेज और सुविधाजनक बना दिया है, वहीं हरिद्वार के स्थानीय कारोबारियों के लिए यह एक बड़ी चुनौती बनकर उभरा है।

टूरिस्ट अब हरिद्वार को कर रहे बाइपास

पहले दिल्ली, नोएडा, पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश से आने वाले अधिकांश श्रद्धालु और पर्यटक हरिद्वार में रुकते थे। यहां गंगा स्नान, मंदिर दर्शन और विश्राम के बाद ही आगे की यात्रा शुरू होती थी। लेकिन एक्सप्रेसवे के चालू होने के बाद यात्रियों की प्राथमिकता बदल गई है। अब वे समय बचाने के लिए सीधे देहरादून या अन्य पहाड़ी क्षेत्रों की ओर निकल जाते हैं, जिससे हरिद्वार में ठहराव काफी कम हो गया है।

होटल कारोबार पर सबसे ज्यादा असर

हरिद्वार के होटल कारोबारियों के अनुसार इस बदलाव का सबसे अधिक प्रभाव होटल इंडस्ट्री पर पड़ा है। होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष कुलदीप शर्मा का कहना है कि इस सीजन में करीब 40 प्रतिशत होटल खाली पड़े हैं। जहां पहले चारधाम यात्रा के शुरुआती दिनों में ही होटलों में फुल बुकिंग हो जाती थी, वहीं इस बार बुकिंग काफी कम है।
उन्होंने बताया कि पर्यटक अब हरिद्वार में ठहरने की बजाय सीधे आगे बढ़ रहे हैं, जिससे होटल का खर्च निकालना भी मुश्किल हो रहा है।

चारधाम यात्रा में भी कम दिख रही भीड़

चारधाम यात्रा हर साल लाखों श्रद्धालुओं को आकर्षित करती है और हरिद्वार को इसका प्रवेश द्वार माना जाता है। परंपरागत रूप से श्रद्धालु यहां गंगा स्नान और माया देवी मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद अपनी यात्रा शुरू करते हैं।
लेकिन इस वर्ष आंकड़े कुछ अलग कहानी बयां कर रहे हैं। स्थानीय व्यापारियों के अनुसार इस बार चारधाम यात्रा के शुरुआती चरण में हरिद्वार आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में भारी गिरावट आई है।

ढाबों और छोटे कारोबारियों की भी कमाई घटी

केवल होटल ही नहीं, बल्कि हाईवे किनारे स्थित ढाबों और छोटे व्यवसायों पर भी इसका सीधा असर पड़ा है। ढाबा संचालक कमल खड़का के अनुसार पहले जहां दिनभर ग्राहकों की आवाजाही बनी रहती थी, अब केवल वीकेंड पर ही थोड़ी रौनक दिखाई देती है। बाकी दिनों में कारोबार लगभग ठप रहता है।
उन्होंने कहा कि विकास के लिए सड़कें और एक्सप्रेसवे जरूरी हैं, लेकिन इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था प्रभावित हो रही है, जिसका समाधान भी सरकार को निकालना चाहिए।

ट्रैवल कारोबार भी संकट में

हरिद्वार का ट्रैवल सेक्टर भी इस बदलाव से अछूता नहीं है। ट्रैवल एजेंसियों को इस बार एडवांस बुकिंग नहीं मिल रही है। आमतौर पर अप्रैल और मई में भारी संख्या में बुकिंग होती थी, लेकिन इस बार स्थिति उलट है।
ट्रैवल कारोबारियों का कहना है कि यात्री अभी सिर्फ जानकारी ले रहे हैं, लेकिन बुकिंग को लेकर असमंजस में हैं। इसके पीछे बढ़ती महंगाई, पेट्रोल-डीजल की कीमतों की आशंका और गैस सिलेंडर की कमी जैसे कारण भी बताए जा रहे हैं।

अंतरराष्ट्रीय हालात का भी असर

कारोबारियों ने खाड़ी देशों में चल रहे तनाव को भी कारोबार में गिरावट का एक कारण बताया है। उनका कहना है कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के कारण ईंधन और गैस की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है, जिससे यात्रा खर्च बढ़ गया है और लोग यात्रा टाल रहे हैं।

सरकार से राहत की मांग

स्थानीय व्यापारी और होटल मालिक सरकार से राहत की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि टैक्स में छूट, बिजली-पानी के बिल में राहत और चारधाम यात्रा के रूट में हरिद्वार को प्राथमिकता देने जैसे कदम उठाए जाएं, ताकि कारोबार को फिर से पटरी पर लाया जा सके।
होटल कारोबारी अखिलेश चौहान के अनुसार यदि सरकार समय रहते कदम नहीं उठाती, तो आने वाले समय में स्थिति और खराब हो सकती है।

विकास बनाम स्थानीय अर्थव्यवस्था

दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे निश्चित रूप से एक बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट है, जिसने यात्रा को तेज और सुगम बनाया है। लेकिन इसके साथ ही यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या इस तरह के विकास कार्यों के साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को संतुलित रखने के लिए पर्याप्त योजना बनाई गई थी या नहीं।

हरिद्वार जैसे धार्मिक और पर्यटन केंद्र, जो वर्षों से यात्रियों के ठहराव पर निर्भर रहे हैं, उनके लिए यह बदलाव एक बड़ा झटका साबित हो रहा है। अब देखना होगा कि सरकार और स्थानीय प्रशासन इस चुनौती का समाधान कैसे निकालते हैं, ताकि विकास और रोजगार दोनों के बीच संतुलन बना रहे।

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