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नेपाल की राजनीति में ‘बलेन’ का जलवा: 35 साल के रैपर ने 4 बार के प्रधानमंत्री ओली को दी करारी शिकस्त, सत्ता परिवर्तन की आहट

The Hill India News
Last updated: March 7, 2026 2:58 pm
The Hill India News
Published: March 7, 2026
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काठमांडू/झापा। हिमालयी राष्ट्र नेपाल की राजनीति में शनिवार को एक ऐसा ऐतिहासिक अध्याय लिखा गया, जिसकी कल्पना शायद ही किसी पुराने राजनीतिक पंडित ने की होगी। नेपाल के ‘अंडरग्राउंड हिप-हॉप’ सीन से निकलकर राजनीति के शिखर तक पहुँचे 35 वर्षीय बालेंद्र शाह (बलेन) ने चार बार के प्रधानमंत्री और दिग्गज मार्क्सवादी नेता केपी शर्मा ओली को उनके ही गढ़ झापा-5 सीट पर धूल चटा दी है।

Contents
आंकड़ों में बालेंद्र शाह की ‘प्रचंड’ जीतकरप्शन के खिलाफ आक्रोश और ‘जेन-जी’ क्रांतिकौन हैं बालेंद्र शाह: सिविल इंजीनियर से ‘पोटेंशियल’ प्रधानमंत्री तकराष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी की लहर: क्या शाह बनेंगे PM?नेपाल की विदेश नीति और भारत पर असरएक नए युग की शुरुआत

नेपाल चुनाव आयोग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, यह जीत महज़ एक चुनावी जीत नहीं, बल्कि नेपाल की पारंपरिक राजनीति के अंत का संकेत मानी जा रही है।

आंकड़ों में बालेंद्र शाह की ‘प्रचंड’ जीत

नेपाल के हाई-स्टेक संसदीय चुनाव के नतीजों ने सबको स्तब्ध कर दिया है। झापा-5 सीट पर हुए इस मुकाबले में बालेंद्र शाह को कुल 68,348 वोट मिले, जबकि दिग्गज नेता केपी शर्मा ओली को महज़ 18,734 वोटों से संतोष करना पड़ा। शाह ने ओली को 49,614 वोटों के भारी अंतर से हराया है। 74 वर्षीय ओली, जो दशकों से इस क्षेत्र के निर्विवाद नेता रहे हैं, उनके लिए यह हार उनके राजनीतिक करियर का सबसे बड़ा सेटबैक माना जा रहा है।

करप्शन के खिलाफ आक्रोश और ‘जेन-जी’ क्रांति

यह चुनाव नेपाल में हुए उन जानलेवा विरोध प्रदर्शनों के ठीक छह महीने बाद हुए हैं, जिन्होंने पूरे देश को हिला कर रख दिया था। सितंबर 2025 में एक छोटे से सोशल मीडिया बैन से शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन देखते ही देखते भ्रष्टाचार और चरमराती अर्थव्यवस्था के खिलाफ एक राष्ट्रव्यापी आंदोलन बन गया था। उस आंदोलन में कम से कम 77 लोगों की जान गई थी और तत्कालीन ओली सरकार को सत्ता गंवानी पड़ी थी।

बालेंद्र शाह ने इसी जनाक्रोश को अपनी ताकत बनाया। उन्होंने काठमांडू के मेयर पद से इस्तीफा देकर अपना राजनीतिक भविष्य दांव पर लगाया और सीधे देश के सबसे शक्तिशाली नेताओं में से एक को चुनौती दी।

कौन हैं बालेंद्र शाह: सिविल इंजीनियर से ‘पोटेंशियल’ प्रधानमंत्री तक

1990 में काठमांडू में जन्मे बालेंद्र शाह की कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट जैसी है। जब नेपाल माओवादी गृहयुद्ध (1996-2006) की आग में झुलस रहा था, तब शाह एक स्कूली छात्र थे। उन्होंने सिविल इंजीनियर के तौर पर प्रोफेशनल ट्रेनिंग ली, लेकिन उनकी असली पहचान बनी उनके रैप गानों से।

‘बलेन’ के नाम से मशहूर शाह ने अपने गानों के जरिए नेपाल की व्यवस्था में व्याप्त भ्रष्टाचार, असमानता और राजनीतिक सुस्ती पर कड़ा प्रहार किया। युवाओं के बीच उनकी लोकप्रियता का आलम यह था कि कुछ समय पहले ही वह निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में काठमांडू के मेयर चुने गए थे। अब, उनकी पार्टी राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) देश भर में भारी जीत की ओर बढ़ रही है।

राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी की लहर: क्या शाह बनेंगे PM?

इलेक्शन कमीशन के शुरुआती ट्रेंड्स संकेत दे रहे हैं कि 275 सदस्यों वाली ‘हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स’ (नेपाली संसद) में बालेंद्र शाह की सेंट्रलिस्ट पार्टी बहुमत की ओर बढ़ रही है। यदि उनकी पार्टी मैजिक नंबर हासिल कर लेती है, तो 35 वर्षीय बालेंद्र शाह नेपाल के इतिहास के सबसे युवा प्रधानमंत्री बन सकते हैं।

यह जीत नेपाल के युवाओं, विशेषकर ‘जेन-जी’ (Gen-Z) के उस भरोसे को दिखाती है जो अब पुराने चेहरों और पुरानी विचारधाराओं से ऊब चुके हैं।

नेपाल की विदेश नीति और भारत पर असर

केपी शर्मा ओली को अक्सर चीन समर्थक और भारत के प्रति कड़ा रुख रखने वाला नेता माना जाता रहा है। ऐसे में बालेंद्र शाह जैसे युवा और आधुनिक सोच वाले नेता का उदय न केवल नेपाल की आंतरिक राजनीति को बदलेगा, बल्कि दक्षिण एशिया के भू-राजनीतिक समीकरणों पर भी इसका गहरा असर पड़ सकता है। हालांकि, शाह ने अभी तक अपनी विदेश नीति के पत्तों को पूरी तरह नहीं खोला है, लेकिन उनका ध्यान मुख्य रूप से सुशासन (Governance) और आर्थिक सुधारों पर केंद्रित है।

एक नए युग की शुरुआत

नेपाल के चुनाव परिणाम यह साफ कर रहे हैं कि अब केवल ‘गढ़’ बचा लेना या ‘इतिहास’ का हवाला देना चुनाव जीतने के लिए काफी नहीं है। जनता अब जवाबदेही और परिणाम चाहती है। केपी शर्मा ओली की हार और बालेंद्र शाह का उदय नेपाल में लोकतंत्र के एक नए और युवा अध्याय का प्रारंभ है।

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