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अंकिता भंडारी हत्याकांड: न्याय की गूँज अब दिल्ली के जंतर-मंतर पर, ‘VIP’ की गिरफ्तारी की मांग को लेकर उत्तराखंडियों का हल्ला बोल

नई दिल्ली/देहरादून: उत्तराखंड की बेटी अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने की लड़ाई अब देवभूमि की वादियों से निकलकर देश की राजधानी दिल्ली की सड़कों तक पहुँच गई है। बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में ‘कथित वीआईपी’ के नाम के खुलासे और उसकी गिरफ्तारी की मांग को लेकर आज, रविवार 26 अप्रैल को दिल्ली के जंतर-मंतर पर विशाल प्रदर्शन का आयोजन किया जा रहा है। ‘अंकिता न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मंच’ के बैनर तले आयोजित इस प्रदर्शन में विभिन्न सामाजिक संगठनों के साथ-साथ विपक्षी दल कांग्रेस भी एकजुट होकर सरकार के खिलाफ हुंकार भर रही है।

जंतर-मंतर पर जुटेगा जनसैलाब: ‘एक्स्ट्रा सर्विस’ और VIP पर घिरी सरकार

अंकिता न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मंच ने आम जनता से अपील की है कि वे सुबह 10 बजे से जंतर-मंतर पर पहुंचकर इस शांतिपूर्ण प्रतिरोध का हिस्सा बनें। मंच की वरिष्ठ सदस्य और सक्रिय आंदोलनकारी कमला पंत ने कहा कि भले ही इस मामले के मुख्य आरोपी, जो एक भाजपा नेता के पुत्र हैं, और उनके साथियों को आजीवन कारावास की सजा मिल चुकी है, लेकिन न्याय अभी भी अधूरा है।

कमला पंत ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि अंकिता भंडारी पर जिस ‘एक्स्ट्रा सर्विस‘ का दबाव बनाया जा रहा था, वह उसी कथित वीआईपी के लिए था जिसका नाम आज तक सार्वजनिक नहीं किया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या प्रदेश की भाजपा सरकार किसी रसूखदार चेहरे को बचाने की कोशिश कर रही है? यह आक्रोश केवल एक परिवार का नहीं, बल्कि संपूर्ण उत्तराखंड की मातृशक्ति का है जो अपनी सुरक्षा और गरिमा को लेकर सशंकित है।

ऑडियो कांड और सीबीआई जांच: सवालों के घेरे में सत्ता पक्ष

हाल ही में भाजपा के एक पूर्व विधायक की कथित पत्नी उर्मिला राठौड़ के एक वायरल ऑडियो ने इस मामले में आग में घी डालने का काम किया है। बताया जा रहा है कि इस ऑडियो वार्ता में कथित वीआईपी का नाम स्पष्ट रूप से लिया गया है। कमला पंत और अन्य आंदोलनकारियों का तर्क है कि जब राज्य सरकार ने भारी जन दबाव के बाद करीब 3 साल बाद यह मामला सीबीआई को सौंपा, तो फिर उस वीआईपी पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांग है कि इस पूरे मामले की जांच हाई कोर्ट के सिटिंग जज की निगरानी में हो, ताकि सीबीआई की जांच किसी भी प्रकार के राजनैतिक दबाव से मुक्त रह सके। आंदोलनकारियों का स्पष्ट कहना है कि जब तक उस वीआईपी की गिरफ्तारी नहीं होती, अंकिता की आत्मा को शांति नहीं मिलेगी।

कांग्रेस का ‘सत्याग्रह’: विपक्ष ने भी कसी कमर

अंकिता भंडारी हत्याकांड के मुद्दे पर उत्तराखंड कांग्रेस ने भी मोर्चा खोल दिया है। पार्टी ने दिल्ली में ‘सत्याग्रह’ का ऐलान किया है। उत्तराखंड कांग्रेस के उपाध्यक्ष धीरेंद्र प्रताप ने बताया कि इस सत्याग्रह में न केवल राजनैतिक कार्यकर्ता, बल्कि प्रेस क्लब ऑफ इंडिया के पूर्व अध्यक्ष उमाकांत लखेड़ा, कांग्रेस के पूर्व सचिव हरिपाल रावत और विभिन्न आंदोलनकारी समितियों के प्रतिनिधि जैसे अनिल पंत, मनमोहन सिंह और देव सिंह भी शामिल होंगे।

सत्याग्रह के समापन पर प्रदर्शनकारी प्रधानमंत्री और गृहमंत्री को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपेंगे। कांग्रेस का आरोप है कि डबल इंजन की सरकार ने अंकिता मामले में केवल समय बिताने का काम किया है और असली गुनहगारों को संरक्षण दिया जा रहा है।

उत्तराखंडी अस्मिता और न्याय की गुहार

यह प्रदर्शन केवल एक हत्या के खिलाफ विरोध नहीं है, बल्कि यह उत्तराखंड की अस्मिता और वहां की कानून व्यवस्था पर उठते सवालों का जवाब है। जंतर-मंतर पर जुटने वाले प्रदर्शनकारियों का उद्देश्य केंद्र सरकार तक यह संदेश पहुंचाना है कि उत्तराखंड की जनता अपनी बेटियों की सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं करेगी।

राजधानी में हो रहे इस प्रदर्शन ने एक बार फिर अंकिता भंडारी हत्याकांड की यादें ताजा कर दी हैं, जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। ऋषिकेश के वनंतरा रिसॉर्ट में जो कुछ भी हुआ, उसकी परतें अब धीरे-धीरे खुल रही हैं, लेकिन ‘वीआईपी’ का रहस्य अब भी बरकरार है।

आज का दिन उत्तराखंड के इतिहास में न्याय की लड़ाई का एक नया अध्याय लिख सकता है। जंतर-मंतर से उठने वाली यह आवाज क्या सरकार को उस ‘वीआईपी’ का नाम उजागर करने पर मजबूर करेगी? यह आने वाला वक्त बताएगा। फिलहाल, दिल्ली का पारा चढ़ा हुआ है और उत्तराखंडियों का रोष अपनी चरम सीमा पर है।

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