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Reading: अंकिता भंडारी केस: इंडिया गठबंधन बनेगा 8 तारीख को महापंचायत का हिस्सा, ‘यह जांच नहीं, VIP को बचाने का ढकोसला है’
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The Hill India > Blog > उत्तराखंड > अंकिता भंडारी केस: इंडिया गठबंधन बनेगा 8 तारीख को महापंचायत का हिस्सा, ‘यह जांच नहीं, VIP को बचाने का ढकोसला है’
उत्तराखंडफीचर्ड

अंकिता भंडारी केस: इंडिया गठबंधन बनेगा 8 तारीख को महापंचायत का हिस्सा, ‘यह जांच नहीं, VIP को बचाने का ढकोसला है’

The Hill India News
Last updated: February 5, 2026 12:50 pm
The Hill India News
Published: February 5, 2026
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देहरादून: उत्तराखंड के बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में न्याय की उम्मीदों के बीच अब एक नया सियासी भूचाल आ गया है। विपक्षी दलों के साझा मंच इंडिया गठबंधन (INDIA Alliance) ने इस मामले में चल रही वर्तमान सीबीआई जांच को पूरी तरह से खारिज करते हुए इसे ‘सरकारी ढकोसला’ करार दिया है। राजधानी देहरादून स्थित कांग्रेस प्रदेश मुख्यालय में आयोजित एक संयुक्त पत्रकार वार्ता में विपक्षी नेताओं ने तीखे तेवर अपनाते हुए आरोप लगाया कि जांच की पूरी प्रक्रिया केवल ‘सफेदपोशों’ और ‘वीआईपी’ को कानून के शिकंजे से बचाने के लिए रची गई एक पटकथा है।

Contents
‘गवर्नमेंट स्पॉन्सर्ड कंप्लेंट’ पर खड़े हुए सवाल‘थर्ड पार्टी’ की एंट्री पर भाकपा माले का कड़ा प्रहार8 तारीख की महापंचायत: अब सड़कों पर होगा संग्रामअंकिता केस: न्याय की डगर में बढ़ती उलझनेंसियासी आर-पार की जंग

पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के दिग्गज नेता हरीश रावत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इंडिया गठबंधन इस तथाकथित जांच को सिरे से नकारता है क्योंकि इसका आधार ही दोषपूर्ण और प्रायोजित है।


‘गवर्नमेंट स्पॉन्सर्ड कंप्लेंट’ पर खड़े हुए सवाल

पत्रकार वार्ता के दौरान हरीश रावत ने कानूनी बारीकियों का हवाला देते हुए जांच की विश्वसनीयता पर बड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि किसी भी आपराधिक मामले में एफआईआर (FIR) सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज होता है, लेकिन अंकिता केस में जिस शिकायतकर्ता की तहरीर पर सीबीआई जांच को आधार बनाया गया है, वह पूरी तरह से गवर्नमेंट स्पॉन्सर्ड (सरकार द्वारा प्रायोजित) है।

हरीश रावत के संबोधन के मुख्य बिंदु:

  • शिकायतकर्ता की वैधानिकता: रावत ने सवाल उठाया कि जब अंकिता के माता-पिता, भाई और रिश्तेदार पिछले कई महीनों से न्याय की गुहार लगा रहे हैं, तो उनकी शिकायत को दरकिनार कर किसी बाहरी व्यक्ति की शिकायत पर जांच क्यों शुरू की गई?

  • वीआईपी को संरक्षण: गठबंधन का आरोप है कि सरकार ने जानबूझकर एक ऐसे व्यक्ति को शिकायतकर्ता बनाया है जिसका अंकिता के परिवार से कोई संबंध नहीं है, ताकि जांच की दिशा को मोड़ा जा सके और उस ‘वीआईपी’ का नाम सामने न आए जिसका जिक्र बार-बार होता रहा है।

  • जांच को रिजेक्शन: रावत ने साफ किया, “यदि शिकायतकर्ता पीड़ित परिवार नहीं है, तो ऐसी जांच का कोई अर्थ नहीं रह जाता। हम इसे पूरी तरह रिजेक्ट करते हैं।”


‘थर्ड पार्टी’ की एंट्री पर भाकपा माले का कड़ा प्रहार

पत्रकार वार्ता में मौजूद भाकपा माले के राज्य सचिव इंद्रेश मैखुरी ने भी सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल दागे। उन्होंने कहा कि अंकिता केस में एक संदिग्ध व्यक्ति को प्रवेश कराकर उसे शिकायतकर्ता बनाना इस बात का प्रमाण है कि सरकार डरी हुई है।

“जिस व्यक्ति का अंकिता के परिवार से कोई लेना-देना नहीं है, जो न तो पीड़ित है और न ही पक्षकार, उसे शिकायतकर्ता बनाना यह दर्शाता है कि सीबीआई जांच के जरिए साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ और वीआईपी को क्लीन चिट देने की कोशिश हो रही है।” – इंद्रेश मैखुरी

इंद्रेश मैखुरी ने मांग की कि यदि सरकार वास्तव में ईमानदार है, तो इस मामले की सीबीआई जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी (Court Monitored Investigation) में होनी चाहिए, ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके।


8 तारीख की महापंचायत: अब सड़कों पर होगा संग्राम

इंडिया गठबंधन ने केवल जुबानी विरोध तक सीमित न रहने का फैसला किया है। अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने के लिए संघर्ष कर रहे संगठनों द्वारा आगामी 8 तारीख को एक विशाल महापंचायत का आयोजन किया जा रहा है। हरीश रावत ने घोषणा की कि इंडिया गठबंधन के सभी घटक दल इस महापंचायत का हिस्सा बनेंगे और सरकार की ‘दमनकारी नीतियों’ के खिलाफ आवाज उठाएंगे।

विपक्ष का मानना है कि जन दबाव में आकर सरकार ने सीबीआई जांच का कार्ड तो खेला, लेकिन उसकी प्रक्रिया में इतनी खामियां छोड़ दीं कि असली दोषी कभी पकड़े ही न जाएं।


अंकिता केस: न्याय की डगर में बढ़ती उलझनें

ऋषिकेश के वनंतरा रिजॉर्ट से शुरू हुआ यह मामला अब उत्तराखंड की अस्मिता और कानून व्यवस्था की साख का सवाल बन चुका है। इंडिया गठबंधन के नेताओं ने एकजुट होकर निम्नलिखित मांगें सरकार के सामने रखी हैं:


सियासी आर-पार की जंग

उत्तराखंड की राजनीति में अंकिता भंडारी हत्याकांड एक ऐसा घाव बन चुका है जो रह-रहकर सत्ता पक्ष को असहज कर रहा है। इंडिया गठबंधन द्वारा सीबीआई जांच को ‘ढकोसला’ कहना यह संकेत देता है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा विधानसभा से लेकर सड़कों तक और अधिक गरमाएगा। 5 फरवरी की इस प्रेस कॉन्फ्रेंस ने यह साफ कर दिया है कि विपक्ष अब इस मामले में किसी भी ‘सरकारी लिपापोती’ को स्वीकार करने के मूड में नहीं है।

अब सबकी निगाहें 8 तारीख की महापंचायत पर टिकी हैं, जहाँ से उत्तराखंड की राजनीति और इस केस की दिशा तय होने की उम्मीद है।

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