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आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों की मांगें फिर सुर्खियों में, सीएम धामी से संगठन की मुलाकात में सकारात्मक कार्रवाई का मिला आश्वासन

The Hill India News
Last updated: November 16, 2025 9:34 am
The Hill India News
Published: November 16, 2025
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देहरादून/नई दिल्ली। राज्यभर से आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों, सेविकाओं और मिनी आंगनबाड़ी कर्मचारियों की वर्षों से चली आ रही मांगें एक बार फिर चर्चा में आ गई हैं। रविवार को आंगनबाड़ी कार्यकत्री/सेविका/मिनी कर्मचारी संगठन का एक प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से उनके देहरादून स्थित आवास पर मिला। बैठक के दौरान महिला कर्मचारियों ने अपने विभिन्न मुद्दों और मांगों को लेकर मुख्यमंत्री को विस्तृत ज्ञापन सौंपा। मुख्यमंत्री ने सभी मांगों पर “सकारात्मक कार्रवाई” का आश्वासन दिया है, जिससे संगठन में नई उम्मीद दिखाई दे रही है।

Contents
राज्य की पोषण व्यवस्था की रीढ़—आंगनबाड़ी कार्यकत्रियांमुख्यमंत्री से मुलाकात—ज्ञापन में रखे गए प्रमुख मुद्देमुख्यमंत्री धामी का आश्वासन—“सरकार संवेदनशील है”क्यों महत्वपूर्ण है यह मुलाकात?ग्राउंड लेवल पर बढ़ा दबाव और चुनौतियाँविश्लेषण—सरकार के लिए यह नीतिगत अवसरउम्मीद की नई किरण

बैठक में संगठन की प्रदेश अध्यक्ष रेखा नेगी के नेतृत्व में आए प्रतिनिधिमंडल में विभिन्न जनपदों की कार्यकत्रियां शामिल थीं। उन्होंने मुख्यमंत्री के समक्ष अपने दायित्व, चुनौतियों, कार्यभार, मानदेय और सुरक्षा से जुड़े प्रमुख मुद्दे विस्तार से रखे।


राज्य की पोषण व्यवस्था की रीढ़—आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां

आंगनबाड़ी प्रणाली देश की पोषण एवं बाल विकास योजनाओं का सबसे अहम हिस्सा है। उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि कई दूरस्थ क्षेत्रों में पोषण, शिक्षा और टीकाकरण से जुड़े कार्यक्रम इन्हीं के माध्यम से प्रभावी रूप से लागू होते हैं।

राज्य में कुल हजारों कार्यकत्रियां और सहायिकाएं विभिन्न केंद्रों पर कार्यरत हैं।
उन पर मुख्य रूप से—

  • कुपोषण मुक्ति अभियान
  • टीकाकरण कार्यक्रम
  • गर्भवती महिलाओं की देखरेख
  • प्री-स्कूल शिक्षा
  • पोषण राशन वितरण
  • स्वास्थ्य जागरूकता
  • मातृ एवं शिशु कल्याण निगरानी

जैसी जिम्मेदारियां होती हैं। इन सभी कार्यों के बावजूद, कार्यकत्रियां लंबे समय से वेतन, मानदेय वृद्धि, नियमितीकरण, यात्रा भत्ता, सुरक्षा और सम्मान से संबंधित मांगों को उठा रही हैं।


मुख्यमंत्री से मुलाकात—ज्ञापन में रखे गए प्रमुख मुद्दे

बैठक के दौरान संगठन द्वारा सौंपे गए ज्ञापन में कई महत्वपूर्ण मांगें शामिल थीं। इनमें प्रमुख थीं—

  1. मानदेय वृद्धि
    आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों और सहायिकाओं का मानदेय लंबे समय से मांग के अनुरूप नहीं है।
    संगठन का कहना है कि कार्यभार बढ़ा है, लेकिन मानदेय में अपेक्षित वृद्धि नहीं हुई।
  2. सेवा का नियमितीकरण
    कई कार्यकत्रियां 15–20 वर्षों से सेवाएं दे रही हैं लेकिन अभी भी “मानदेय आधारित कर्मचारी” के रूप में कार्यरत हैं।
  3. सेवानिवृत्ति लाभ
    कार्यकत्रियों को पेंशन, ग्रैच्युटी और सामाजिक सुरक्षा जैसे लाभ उपलब्ध नहीं हैं।
  4. यात्रा व भत्ता सुविधाएँ
    स्वास्थ्य सर्वेक्षण, घर-घर विजिट और टीकाकरण अभियानों के दौरान उन्हें अतिरिक्त यात्रा करनी पड़ती है, जिसके लिए कोई भत्ता प्रदान नहीं किया जाता।
  5. कार्यस्थल सुरक्षा
    कई ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों में जोखिमपूर्ण परिस्थितियों में कार्य करने के बाद भी सुरक्षा से संबंधित स्पष्ट दिशा-निर्देशों की कमी बताई गई।
  6. अतिरिक्त कार्यों का बोझ
    कार्यकत्रियों ने बताया कि सरकारी सर्वेक्षण, जनगणना, अभियान आदि के दौरान अक्सर आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों का उपयोग किया जाता है, लेकिन इसके लिए अतिरिक्त honorarium नहीं दिया जाता।

इन सभी मांगों को मुख्यमंत्री धामी के समक्ष विस्तार से रखा गया।


मुख्यमंत्री धामी का आश्वासन—“सरकार संवेदनशील है”

मुख्यमंत्री ने प्रतिनिधिमंडल को यह भरोसा दिलाया कि सरकार आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों की समस्याओं के प्रति पूरी तरह संवेदनशील है और उनके हितों को प्राथमिकता के साथ देखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि—

“राज्य सरकार महिला और बाल विकास से संबंधित सभी योजनाओं को और अधिक प्रभावी बनाना चाहती है। आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों की भूमिका इस व्यवस्था की रीढ़ है। उनकी उचित मांगों पर सरकार सकारात्मक और संवेदनशील रुख अपनाएगी।”

धामी ने यह भी संकेत दिया कि सरकार पहले से ही आंगनबाड़ी तंत्र के सुदृढ़ीकरण पर कार्य कर रही है और आने वाले समय में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए जाएंगे।


क्यों महत्वपूर्ण है यह मुलाकात?

यह मुलाकात इसलिए चर्चाओं में है क्योंकि—

  • राज्य के कई हिस्सों में संगठन लगातार अपनी मांगों को लेकर धरने–प्रदर्शन कर रहा है।
  • आंगनबाड़ी सेवाओं का सीधा संबंध गर्भवती महिलाओं, नवजातों और तीन से छह वर्ष तक के बच्चों के स्वास्थ्य से है।
  • हाल ही में अन्य राज्यों—जैसे पंजाब, हरियाणा, बिहार और महाराष्ट्र—ने मानदेय बढ़ोतरी और अतिरिक्त लाभों पर समीक्षा या घोषणा की है।
  • उत्तराखंड में भी लंबे समय से इन फैसलों का इंतज़ार हो रहा है।

संगठन की प्रदेश अध्यक्ष रेखा नेगी का कहना है कि मुख्यमंत्री के साथ बैठक सकारात्मक रही और अब उन्हें उम्मीद है कि सरकार जल्द ठोस निर्णय लेगी।


ग्राउंड लेवल पर बढ़ा दबाव और चुनौतियाँ

राज्य में कुपोषण दर को कम करने, गर्भवती महिलाओं को पोषण सुरक्षा उपलब्ध कराने और बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा को मजबूत करने में आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों का कार्य बहुत अहम हो गया है।
पर्वतीय क्षेत्रों में—

  • कठिन भौगोलिक परिस्थितियाँ,
  • सीमित संसाधन,
  • लंबी दूरी तय करनी पड़ना,
  • सामुदायिक व्यवहार संबंधी चुनौतियाँ,
  • मौसम संबंधी बाधाएं

इन सबके बीच काम करना इनके लिए बेहद चुनौतीपूर्ण हो जाता है।

संगठन का कहना है कि यदि राज्य सरकार बेहतर आर्थिक और कार्यस्थलीय सुरक्षा उपलब्ध कराती है, तो आंगनबाड़ी तंत्र और अधिक मजबूत हो सकेगा।


विश्लेषण—सरकार के लिए यह नीतिगत अवसर

राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार—

  1. महिला कार्यबल का बड़ा हिस्सा आंगनबाड़ी प्रणाली में है, इसलिए उनकी मांगों पर सुधार राजनीतिक और सामाजिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण है।
  2. मिशन शक्ति, पोषण अभियान, बेटी बचाओ–बेटी पढ़ाओ जैसी योजनाओं की सफलता का आधार आंगनबाड़ी नेटवर्क है।
  3. मानदेय वृद्धि और सुविधाओं का विस्तार राज्य में महिला सशक्तिकरण को नए स्तर पर ले जा सकता है।

यदि सरकार जल्द घोषणा करती है, तो यह आने वाले चुनावों के राजनीतिक समीकरणों पर भी सकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।


उम्मीद की नई किरण

आंगनबाड़ी कार्यकत्री/सेविका/मिनी कर्मचारी संगठन और मुख्यमंत्री के बीच हुई यह मुलाकात निश्चित रूप से भविष्य के लिए सकारात्मक संकेत है।
संगठन जहां अपनी मांगों के समाधान की ओर आशान्वित है, वहीं सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों की भूमिका अमूल्य है और उनकी समस्याओं का समाधान प्राथमिकता से किया जाएगा।

अब राज्य की नज़रें इस पर टिकी हैं कि सरकार आने वाले समय में कौन-से ठोस फैसले लेकर आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों के जीवन, सम्मान और कार्य परिस्थितियों को बेहतर बनाती है।

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