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उत्तराखंड में मतदाता सत्यापन अभियान की जोरदार शुरुआत, पहले ही दिन बांटे गए 4.90 लाख गणना पत्र; हर बीएलओ को 679 मतदाताओं तक पहुंचने की जिम्मेदारी

The Hill India News
Last updated: June 9, 2026 12:40 pm
The Hill India News
Published: June 9, 2026
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देहरादून। उत्तराखंड में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान की शुरुआत के साथ ही निर्वाचन विभाग ने तेज गति से काम शुरू कर दिया है। राज्य में 8 जून से शुरू हुए इस महत्वपूर्ण अभियान के पहले ही दिन 4 लाख 90 हजार 252 गणना पत्र वितरित किए गए, जबकि 13,736 फॉर्मों को डिजिटल रूप से दर्ज भी कर लिया गया। राज्य निर्वाचन विभाग का दावा है कि अभियान निर्धारित समयसीमा के भीतर सफलतापूर्वक पूरा किया जाएगा और मतदाता सूची को पूरी तरह अद्यतन बनाया जाएगा।

इस अभियान का उद्देश्य राज्य की मतदाता सूची को और अधिक सटीक एवं पारदर्शी बनाना है। निर्वाचन आयोग की ओर से चलाए जा रहे इस विशेष अभियान के तहत बूथ लेवल अधिकारी (BLO) घर-घर जाकर मतदाताओं से संपर्क करेंगे और गणना फॉर्म वितरित करने के साथ-साथ उन्हें वापस भी एकत्रित करेंगे।

राज्यपाल और मुख्यमंत्री को सौंपे गए गणना फॉर्म

अभियान के पहले दिन उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को औपचारिक रूप से गणना फॉर्म सौंपे गए। इसके अलावा राज्य की प्रमुख राजनीतिक पार्टियों के प्रतिनिधियों को भी गणना फॉर्म वितरित किए गए। इनमें भारतीय जनता पार्टी, कांग्रेस, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) तथा बहुजन समाज पार्टी के प्रदेश स्तर के पदाधिकारी शामिल रहे।

निर्वाचन विभाग का मानना है कि राजनीतिक दलों की भागीदारी से अभियान को और अधिक प्रभावी तथा पारदर्शी बनाया जा सकेगा।

8 जून से 7 जुलाई तक चलेगा अभियान

निर्वाचन विभाग द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार, राज्यभर में बीएलओ 8 जून से 7 जुलाई तक घर-घर जाकर मतदाताओं से संपर्क करेंगे। इस दौरान वे गणना फॉर्म वितरित करेंगे और उन्हें भरवाकर वापस भी जमा करेंगे।

उत्तराखंड में वर्तमान समय में कुल 79 लाख 60 हजार 762 पंजीकृत मतदाता हैं। इन मतदाताओं तक पहुंचने के लिए राज्य में 11,732 बीएलओ तैनात किए गए हैं। इस हिसाब से प्रत्येक बीएलओ को औसतन 679 मतदाताओं तक पहुंचना होगा।

निर्वाचन विभाग का कहना है कि एक महीने की समयसीमा को ध्यान में रखते हुए सभी अधिकारियों को लक्ष्य निर्धारित कर दिए गए हैं और उनकी नियमित मॉनिटरिंग भी की जाएगी।

पहले दिन की उपलब्धियां रहीं उल्लेखनीय

अभियान के पहले ही दिन राज्यभर में 4.90 लाख से अधिक गणना पत्र वितरित किए गए। यदि इसे औसत के रूप में देखा जाए तो प्रत्येक बीएलओ ने लगभग 42 मतदाताओं तक पहुंचकर गणना पत्र वितरित किए।

इसके अलावा 13,736 गणना पत्रों को डिजिटाइज भी कर लिया गया है। इससे यह संकेत मिलता है कि विभाग केवल फॉर्म वितरण पर ही नहीं बल्कि डेटा के डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने पर भी समान रूप से ध्यान दे रहा है।

निर्वाचन विभाग के अधिकारियों का मानना है कि शुरुआती दिन की यह उपलब्धि आने वाले दिनों में अभियान को और अधिक गति प्रदान करेगी।

मतदाताओं को नहीं देने होंगे कोई दस्तावेज

इस अभियान की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि मतदाताओं को फिलहाल कोई अतिरिक्त दस्तावेज जमा नहीं करने होंगे। इससे आम नागरिकों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा।

निर्वाचन विभाग ने मतदाताओं की सहायता के लिए टोल फ्री हेल्पलाइन नंबर 1950 जारी किया है। इसके अलावा राज्य स्तर पर 1800-3300-1950 नंबर भी उपलब्ध कराया गया है, जहां नागरिक अपनी समस्याओं और सवालों के समाधान के लिए संपर्क कर सकते हैं।

82 प्रतिशत बीएलओ को मिल चुकी है ट्रेनिंग

मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के अनुसार राज्य में तैनात 11,732 बीएलओ में से 9,595 बीएलओ को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। यानी कुल बीएलओ का लगभग 82 प्रतिशत हिस्सा प्रशिक्षित है।

इन अधिकारियों को तीन चरणों में प्रशिक्षण प्रदान किया गया है। प्रशिक्षण के दौरान उन्हें बीएलओ एप के उपयोग, मतदाता सत्यापन प्रक्रिया, डेटा संग्रहण और तकनीकी समस्याओं के समाधान के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।

निर्वाचन विभाग का दावा है कि प्रशिक्षित बीएलओ के कारण अभियान को जमीनी स्तर पर सफलतापूर्वक संचालित किया जा सकेगा।

पहले से हो चुकी है 88 प्रतिशत मतदाताओं की मैपिंग

अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. विजय कुमार जोगदंडे के अनुसार राज्य में लगभग 88 प्रतिशत मतदाताओं की मैपिंग प्री-एसआईआर चरण के दौरान पहले ही की जा चुकी है।

इसका मतलब है कि अधिकांश मतदाताओं का डेटा पहले से उपलब्ध है और उनके सत्यापन की प्रक्रिया अपेक्षाकृत आसान होगी। इससे बीएलओ और मतदाताओं दोनों को कम कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा।

उन्होंने बताया कि जिन मतदाताओं की मैपिंग पहले ही पूरी हो चुकी है, उनके फॉर्म भरने और सत्यापन की प्रक्रिया काफी सरल होगी।

बीएलओ पर अतिरिक्त दबाव नहीं पड़ेगा

देश के कई राज्यों में पिछले वर्षों के दौरान मतदाता पुनरीक्षण अभियानों में बीएलओ पर अत्यधिक कार्यभार को लेकर शिकायतें सामने आई थीं। हालांकि उत्तराखंड निर्वाचन विभाग का कहना है कि इस बार ऐसी स्थिति नहीं बनने दी जाएगी।

डॉ. विजय कुमार जोगदंडे ने स्पष्ट किया कि बीएलओ पर अनावश्यक दबाव नहीं डाला जाएगा। उन्हें आवश्यक संसाधन और सहयोग उपलब्ध कराया गया है ताकि वे अपने कार्य को सुचारु रूप से पूरा कर सकें।

उन्होंने कहा कि बीएलओ को तनाव लेने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि उनके सहयोग के लिए अन्य व्यवस्थाएं भी की गई हैं।

आईटी वॉलिंटियर्स और बीएलए देंगे सहयोग

निर्वाचन विभाग ने प्रत्येक बूथ स्तर पर आईटी वॉलिंटियर्स की तैनाती की है। ये स्वयंसेवक तकनीकी सहायता प्रदान करेंगे और डिजिटल प्रक्रिया में बीएलओ की मदद करेंगे।

इसके अलावा राजनीतिक दलों द्वारा नामित बूथ लेवल एजेंट (BLA) भी इस अभियान में सहयोग करेंगे। इससे मतदाता सत्यापन प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और सुगम बनेगी।

अधिकारियों का मानना है कि आईटी वॉलिंटियर्स और बीएलए की मदद से बीएलओ का कार्यभार काफी हद तक कम होगा।

मानसून और पहाड़ी चुनौतियों के बावजूद तैयारियां पूरी

उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियां हमेशा से चुनौतीपूर्ण रही हैं। राज्य के कई इलाके दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में स्थित हैं, जहां पहुंचना आसान नहीं होता। इसके अलावा मानसून की दस्तक भी अभियान के दौरान चुनौतियां बढ़ा सकती है।

इन परिस्थितियों को देखते हुए निर्वाचन विभाग ने विशेष तैयारियां की हैं। सभी बीएलओ को किट बैग उपलब्ध कराए गए हैं और जरूरत पड़ने पर जिला प्रशासन की ओर से अतिरिक्त सहायता भी प्रदान की जाएगी।

मोबाइल रिचार्ज का खर्च भी विभाग ने उठाया

बीएलओ को डिजिटल कार्यों में सुविधा प्रदान करने के लिए निर्वाचन विभाग ने उनके एक महीने के मोबाइल रिचार्ज का भुगतान भी किया है। इससे वे बीएलओ एप और अन्य ऑनलाइन माध्यमों का आसानी से उपयोग कर सकेंगे।

यदि किसी बीएलओ को अतिरिक्त संसाधनों की आवश्यकता होती है तो वह जिला स्तर पर इसकी मांग कर सकता है।

मतदाता सूची को और अधिक सटीक बनाने की दिशा में बड़ा कदम

विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान को उत्तराखंड में मतदाता सूची को अद्यतन और त्रुटिरहित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। पहले ही दिन लगभग पांच लाख गणना पत्रों का वितरण यह दर्शाता है कि निर्वाचन विभाग इस अभियान को लेकर गंभीर और सक्रिय है।

आने वाले एक महीने में बीएलओ राज्य के लाखों मतदाताओं तक पहुंचकर उनके विवरणों का सत्यापन करेंगे। इससे न केवल मतदाता सूची अधिक सटीक बनेगी बल्कि चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता भी मजबूत होगी। राज्य निर्वाचन विभाग को उम्मीद है कि 7 जुलाई तक अभियान अपने निर्धारित लक्ष्यों को सफलतापूर्वक हासिल कर लेगा।

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