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The Hill India > Blog > उत्तराखंड > उत्तरकाशी की झाला पंचायत का ऐतिहासिक फैसला, सिंगल यूज प्लास्टिक पर पूरी तरह रोक; अब गांव बनेगा ‘जीरो-वेस्ट’ मॉडल, लोग कर रहे तारीफ
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उत्तरकाशी की झाला पंचायत का ऐतिहासिक फैसला, सिंगल यूज प्लास्टिक पर पूरी तरह रोक; अब गांव बनेगा ‘जीरो-वेस्ट’ मॉडल, लोग कर रहे तारीफ

The Hill India News
Last updated: September 10, 2026 6:36 am
The Hill India News
Published: September 10, 2026
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उत्तरकाशी। हिमालयी क्षेत्र में बढ़ते प्लास्टिक प्रदूषण और कचरे की समस्या के बीच उत्तरकाशी की ग्राम पंचायत झाला ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बेहद महत्वपूर्ण और सराहनीय कदम उठाया है। पर्यटन के लिए प्रसिद्ध झाला पंचायत ने अपने क्षेत्र को सिंगल यूज प्लास्टिक मुक्त बनाने का फैसला लिया है। पंचायत ने सिंगल यूज प्लास्टिक के उपयोग, बिक्री और भंडारण पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया है। पंचायत के इस फैसले की स्थानीय लोगों के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण से जुड़े लोगों द्वारा भी सराहना की जा रही है।

Contents
सिंगल यूज प्लास्टिक के इस्तेमाल पर पूर्ण प्रतिबंधअब घर से ही अलग करना होगा गीला और सूखा कचराखुले में कचरा फेंकने पर होगी कार्रवाईपर्यटन स्थल होने के कारण बड़ी जिम्मेदारी‘जीरो-वेस्ट’ मॉडल पंचायत बनाने का लक्ष्य‘थैंक यू नेचर’ अभियान से मिली नई पहचानगांव वालों की भागीदारी से सफल होगा अभियान

ग्राम प्रधान अभिषेक रौंतेला की अध्यक्षता में आयोजित ग्राम सभा की बैठक में ‘ग्राम पंचायत झाला ठोस अपशिष्ट प्रबंधन एवं स्वच्छता उपविधियां-2026’ को सर्वसम्मति से मंजूरी दी गई। नई उपविधियों के लागू होने के बाद पंचायत क्षेत्र में कचरा प्रबंधन को लेकर कई महत्वपूर्ण नियम लागू होंगे। इसका उद्देश्य केवल गांव को साफ रखना नहीं, बल्कि झाला को भविष्य में एक प्लास्टिक-मुक्त और जीरो-वेस्ट मॉडल पंचायत के रूप में विकसित करना है।

सिंगल यूज प्लास्टिक के इस्तेमाल पर पूर्ण प्रतिबंध

पंचायत के फैसले के अनुसार झाला क्षेत्र में सिंगल यूज प्लास्टिक के उपयोग के साथ-साथ इसकी बिक्री और भंडारण पर भी रोक रहेगी। यानी दुकानदारों, होटल संचालकों, होम-स्टे, रेस्टोरेंट और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को प्रतिबंधित प्लास्टिक का इस्तेमाल करने से बचना होगा।

पंचायत का मानना है कि प्लास्टिक कचरा हिमालयी क्षेत्रों के लिए बेहद गंभीर चुनौती बनता जा रहा है। पर्यटकों की बढ़ती संख्या के कारण पहाड़ी क्षेत्रों में प्लास्टिक की बोतलें, पैकेजिंग सामग्री और अन्य कचरा लगातार बढ़ रहा है। यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगाई गई तो इसका सीधा असर प्राकृतिक जलस्रोतों, नदियों, जंगलों और स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र पर पड़ सकता है।

अब घर से ही अलग करना होगा गीला और सूखा कचरा

नई उपविधियों के तहत पंचायत क्षेत्र में कचरे का स्रोत स्तर पर ही पृथक्करण अनिवार्य किया गया है। इसका मतलब है कि घरों, दुकानों, होम-स्टे, होटल, रेस्टोरेंट और अन्य प्रतिष्ठानों में गीले और सूखे कचरे को अलग-अलग रखना होगा।

गीले और सूखे कचरे को अलग करने से उसके निस्तारण और पुनर्चक्रण की प्रक्रिया आसान होगी। इससे उपयोगी कचरे को रिसाइकिल किया जा सकेगा, जबकि जैविक कचरे का उचित प्रबंधन किया जा सकेगा। पंचायत का लक्ष्य कचरे को सड़क, नालियों या खुले स्थानों पर फेंकने की आदत को पूरी तरह खत्म करना है।

खुले में कचरा फेंकने पर होगी कार्रवाई

झाला पंचायत ने साफ कर दिया है कि स्वच्छता नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। खुले में कचरा फेंकने, सार्वजनिक स्थानों पर गंदगी फैलाने या प्रतिबंधित सिंगल यूज प्लास्टिक का इस्तेमाल करने वालों के लिए नियमों के अनुसार जुर्माने और कार्रवाई का प्रावधान किया गया है।

पंचायत का कहना है कि केवल नियम बनाना पर्याप्त नहीं है। इन नियमों को प्रभावी तरीके से लागू करने के लिए ग्रामीणों और व्यापारियों की भागीदारी भी जरूरी होगी। पंचायत इसी वजह से लोगों को जागरूक करने और पर्यावरण संरक्षण को जन-अभियान बनाने पर जोर दे रही है।

पर्यटन स्थल होने के कारण बड़ी जिम्मेदारी

ग्राम प्रधान अभिषेक रौंतेला ने कहा कि झाला एक प्रमुख पर्यटन क्षेत्र है, जहां वर्षभर बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं। पर्यटकों की आवाजाही से स्थानीय अर्थव्यवस्था को फायदा होता है, लेकिन इसके साथ पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी भी बढ़ जाती है।

उन्होंने कहा कि भागीरथी घाटी, प्राकृतिक जलस्रोत और संवेदनशील हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र को प्लास्टिक और अन्य प्रदूषण से बचाना पंचायत की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।

पंचायत का उद्देश्य यह है कि पर्यटक झाला आएं, यहां की प्राकृतिक सुंदरता का आनंद लें, लेकिन अपने पीछे ऐसा कचरा न छोड़ें जो पहाड़ों और पर्यावरण के लिए लंबे समय तक नुकसान का कारण बने।

‘जीरो-वेस्ट’ मॉडल पंचायत बनाने का लक्ष्य

ग्राम प्रधान के अनुसार पंचायत का उद्देश्य केवल सिंगल यूज प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगाने तक सीमित नहीं है। पंचायत झाला को जीरो-वेस्ट और प्लास्टिक-मुक्त मॉडल पंचायत के रूप में विकसित करना चाहती है।

इसके लिए कचरे का सही पृथक्करण, पुनर्चक्रण, स्वच्छता व्यवस्था और जनभागीदारी को बढ़ावा दिया जाएगा। पंचायत की कोशिश है कि गांव में पैदा होने वाले कचरे का अधिक से अधिक हिस्सा सही तरीके से उपयोग या रिसाइकिल किया जा सके।

‘थैंक यू नेचर’ अभियान से मिली नई पहचान

झाला पंचायत पहले भी पर्यावरण संरक्षण को लेकर अपनी पहल के कारण चर्चा में रह चुकी है। यहां से ‘थैंक यू नेचर’ अभियान की शुरुआत हुई थी। इस पर्यावरणीय पहल का उल्लेख प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में भी किया था।

अब पंचायत ने उसी पर्यावरणीय चेतना को आगे बढ़ाते हुए प्लास्टिक नियंत्रण और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन को संस्थागत रूप देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। पंचायत का मानना है कि यदि ग्रामीण, व्यापारी और पर्यटक मिलकर प्रयास करें तो झाला को स्वच्छ और पर्यावरण के लिहाज से आदर्श क्षेत्र बनाया जा सकता है।

गांव वालों की भागीदारी से सफल होगा अभियान

ग्राम सभा की बैठक में उपप्रधान विशाल विश्वकर्मा सहित पंचायत के प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। बैठक में लिए गए फैसले को सर्वसम्मति से मंजूरी मिलना इस बात का संकेत है कि पंचायत के लोग पर्यावरण संरक्षण को लेकर गंभीर हैं।

झाला पंचायत का यह फैसला हिमालयी क्षेत्रों में बढ़ते प्लास्टिक कचरे के खिलाफ एक मिसाल बन सकता है। यदि प्रतिबंध को प्रभावी तरीके से लागू किया जाता है और स्थानीय लोगों के साथ पर्यटकों को भी जागरूक किया जाता है, तो आने वाले समय में झाला वास्तव में एक स्वच्छ, प्लास्टिक-मुक्त और जीरो-वेस्ट मॉडल पंचायत के रूप में अपनी पहचान बना सकता है।

पंचायत के इस फैसले का सबसे बड़ा संदेश यही है कि पहाड़ों की खूबसूरती केवल देखने के लिए नहीं, बल्कि उसे आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी भी हमारी है। झाला पंचायत ने इस दिशा में कदम बढ़ाकर यह साबित किया है कि स्थानीय स्तर पर मजबूत इच्छाशक्ति और जनभागीदारी के जरिए पर्यावरण संरक्षण की बड़ी मुहिम को जमीन पर उतारा जा सकता है।

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