बुआखाल-सर्किट हाउस मार्ग: मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद सड़क चौड़ीकरण का सर्वे शुरू, पेड़ों की हो रही गणना; पर्यावरण प्रेमियों ने उठाए सवाल- जब ट्रैफिक कम है तो हजारों पेड़ों पर क्यों आए संकट?
पौड़ी: उत्तराखंड के पहाड़ी शहर पौड़ी में विकास और पर्यावरण के बीच एक बार फिर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की घोषणा के बाद बुआखाल से सर्किट हाउस तक करीब सात किलोमीटर लंबे मोटरमार्ग के चौड़ीकरण और सौंदर्यीकरण की तैयारी शुरू हो गई है। परियोजना के शुरुआती चरण में सड़क का सर्वे कराया जा रहा है और इसी सर्वे के दौरान यह भी चिन्हित किया जा रहा है कि प्रस्तावित चौड़ीकरण की जद में कितने पेड़ आ सकते हैं।
प्रारंभिक तौर पर अनुमान लगाया जा रहा है कि सड़क चौड़ीकरण के दायरे में करीब चार से पांच हजार पेड़ आ सकते हैं। इतनी बड़ी संख्या में पेड़ों के संभावित प्रभावित होने की खबर सामने आने के बाद पर्यावरण प्रेमियों और स्थानीय लोगों के बीच चिंता बढ़ गई है। हालांकि, वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल किसी भी पेड़ के कटान की प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है और अभी पूरा मामला सर्वे के स्तर पर है।
7 किलोमीटर सड़क का होगा चौड़ीकरण और सौंदर्यीकरण
बुआखाल से सर्किट हाउस तक जाने वाला मार्ग पौड़ी शहर के महत्वपूर्ण मार्गों में शामिल है। मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद इस सड़क को बेहतर बनाने और इसके चौड़ीकरण की योजना पर काम शुरू किया गया है। योजना के तहत सड़क को अधिक सुविधाजनक बनाने के साथ-साथ इसके सौंदर्यीकरण की भी तैयारी है।
इसके लिए लोक निर्माण विभाग और वन विभाग की ओर से संयुक्त सर्वे कराया जा रहा है। सर्वे के दौरान सड़क की मौजूदा स्थिति, प्रस्तावित चौड़ाई और सड़क की जद में आने वाले पेड़ों समेत अन्य पहलुओं का आकलन किया जा रहा है।
यही सर्वे अब पर्यावरण के लिहाज से चर्चा का विषय बन गया है, क्योंकि शुरुआती अनुमान में हजारों पेड़ों के प्रभावित होने की संभावना जताई जा रही है।
अभी पेड़ नहीं काटे जा रहे, सिर्फ हो रही गणना
पेड़ों की संख्या को लेकर उठ रही चिंताओं के बीच वन विभाग ने स्थिति स्पष्ट की है। पौड़ी के डीएफओ महातिम यादव के मुताबिक अभी किसी भी पेड़ के कटान की प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है।
वन विभाग के अनुसार फिलहाल यह पता लगाया जा रहा है कि प्रस्तावित सड़क चौड़ीकरण की वास्तविक जद में कितने पेड़ आते हैं। सर्वे पूरा होने के बाद पेड़ों की संख्या और परियोजना से संबंधित पूरी रिपोर्ट तैयार की जाएगी।
इसके बाद रिपोर्ट को आवश्यक स्वीकृति के लिए भारत सरकार के स्तर पर भेजा जाएगा। वन विभाग का कहना है कि आवश्यक अनुमति मिलने के बाद ही पेड़ों के छपान और कटान की प्रक्रिया पर आगे बढ़ा जाएगा।
इसका मतलब साफ है कि फिलहाल चार से पांच हजार पेड़ों की संख्या अंतिम नहीं मानी जा सकती। सर्वे पूरा होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि वास्तव में कितने पेड़ परियोजना से प्रभावित होंगे।
हजारों पेड़ों की संभावना ने बढ़ाई पर्यावरण की चिंता
सड़क विकास किसी भी पहाड़ी क्षेत्र के लिए जरूरी है। बेहतर सड़क से स्थानीय लोगों को आवागमन में सुविधा मिलती है, पर्यटन को बढ़ावा मिल सकता है और शहर की कनेक्टिविटी भी मजबूत होती है। लेकिन पहाड़ों में सड़क निर्माण और चौड़ीकरण के साथ पर्यावरण का सवाल भी बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है।
पौड़ी जैसे पहाड़ी क्षेत्र में पेड़ सिर्फ हरियाली का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि वे स्थानीय पारिस्थितिकी को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। पेड़ों की जड़ें पहाड़ी ढलानों की मिट्टी को थामने में मदद करती हैं और बारिश के दौरान भूस्खलन के खतरे को कम करने में भी भूमिका निभाती हैं।
ऐसे में यदि सड़क चौड़ीकरण के लिए बड़ी संख्या में पेड़ प्रभावित होते हैं तो इसका पर्यावरणीय प्रभाव कितना होगा, इस पर भी गंभीरता से विचार करने की जरूरत है।
पर्यावरण प्रेमियों ने उठाया सड़क की उपयोगिता पर सवाल
पर्यावरण प्रेमी शंकर बिष्ट ने बुआखाल से सर्किट हाउस तक सड़क चौड़ीकरण की योजना को लेकर चिंता जताई है। उनका कहना है कि विकास जरूरी है, लेकिन विकास की कीमत पर्यावरण को नुकसान पहुंचाकर नहीं चुकाई जानी चाहिए।
उनके मुताबिक बुआखाल से कंडोलिया की ओर जाने वाले इस मार्ग पर वाहनों की आवाजाही बहुत अधिक नहीं है। इस मार्ग का इस्तेमाल मुख्य रूप से बाईपास के रूप में किया जाता है और कई हिस्सों में यातायात काफी कम रहता है।
ऐसे में उनका सवाल है कि यदि सड़क पर यातायात का दबाव अपेक्षाकृत कम है, तो सड़क को बड़े स्तर पर चौड़ा करने की आवश्यकता का आकलन पहले किया जाना चाहिए। उनका कहना है कि सड़क की वास्तविक जरूरत, भविष्य में यातायात बढ़ने की संभावना और पर्यावरणीय नुकसान—इन सभी पहलुओं को साथ रखकर फैसला लिया जाना चाहिए।
ऋषिकेश-देहरादून हाईवे का उदाहरण भी दिया
पर्यावरण प्रेमियों ने सड़क चौड़ीकरण के दौरान पेड़ों के सामने आने वाली चुनौती का उदाहरण देते हुए ऋषिकेश-देहरादून राष्ट्रीय राजमार्ग के सात मोड़ क्षेत्र का भी जिक्र किया है।
उनका कहना है कि वहां भी सड़क चौड़ीकरण के लिए पेड़ों के कटान की प्रक्रिया शुरू हुई थी, लेकिन स्थानीय स्तर पर विरोध के बाद फिलहाल कटान रोक दिया गया है। अब पौड़ी में भी इसी तरह की स्थिति को लेकर चिंता जताई जा रही है।
हालांकि दोनों परियोजनाओं की परिस्थितियां अलग हो सकती हैं, लेकिन पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि पहाड़ी इलाकों में किसी भी बड़े निर्माण कार्य से पहले पेड़ों और स्थानीय पारिस्थितिकी पर पड़ने वाले प्रभाव का गंभीर मूल्यांकन किया जाना चाहिए।
क्या सड़क चौड़ीकरण के लिए इतने पेड़ों की जरूरत पड़ेगी?
फिलहाल यह सबसे बड़ा सवाल बना हुआ है। चार से पांच हजार पेड़ों का अनुमान सामने आने के बाद लोगों की नजर अब सर्वे रिपोर्ट पर टिक गई है।
यह भी संभव है कि विस्तृत सर्वे के बाद प्रभावित होने वाले पेड़ों की वास्तविक संख्या प्रारंभिक अनुमान से अलग हो। इसलिए अभी यह कहना उचित नहीं होगा कि इतने पेड़ों का कटान निश्चित रूप से होगा।
वन विभाग की ओर से भी यही स्पष्ट किया गया है कि अभी केवल सर्वे और पेड़ों की गणना की जा रही है। आगे की प्रक्रिया आवश्यक सरकारी अनुमति मिलने के बाद ही शुरू होगी।
यानी फिलहाल मामला पेड़ों की कटाई से ज्यादा पेड़ों के संभावित प्रभाव का आकलन करने के चरण में है।
विकास के साथ पर्यावरण का संतुलन जरूरी
उत्तराखंड में सड़कें विकास की जीवनरेखा हैं। पहाड़ी क्षेत्रों में सड़क संपर्क बेहतर होने से शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, पर्यटन और स्थानीय व्यापार को फायदा मिलता है। ऐसे में सड़क निर्माण या चौड़ीकरण का विरोध करना ही समाधान नहीं है।
लेकिन दूसरी तरफ पहाड़ों की संवेदनशील भौगोलिक और पर्यावरणीय परिस्थितियों को नजरअंदाज करना भी जोखिम भरा हो सकता है। खासकर मानसून के दौरान भूस्खलन, सड़क धंसने और पहाड़ी ढलानों के कमजोर होने की घटनाएं लगातार चिंता का विषय रहती हैं।
इसलिए बुआखाल-सर्किट हाउस सड़क परियोजना में भी सबसे महत्वपूर्ण चुनौती यही होगी कि सड़क विकास की जरूरत और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए।
अब सर्वे रिपोर्ट पर टिकी नजर
फिलहाल लोक निर्माण विभाग और वन विभाग का संयुक्त सर्वे जारी है। सर्वे पूरा होने के बाद यह स्पष्ट होगा कि सड़क की जद में वास्तव में कितने पेड़ आ रहे हैं और परियोजना के लिए कितने पेड़ों पर प्रभाव पड़ सकता है।
इसके बाद रिपोर्ट आवश्यक स्वीकृति के लिए भेजी जाएगी। अनुमति मिलने के बाद ही आगे की कार्रवाई संभव होगी।
इस बीच पर्यावरण प्रेमियों की मांग है कि सरकार सड़क चौड़ीकरण की वास्तविक जरूरत का वैज्ञानिक तरीके से आकलन करे और जहां तक संभव हो, पेड़ों को बचाते हुए वैकल्पिक डिजाइन या तकनीकी समाधान तलाशे जाएं।
फिलहाल नहीं हुआ कोई कटान
पौड़ी की इस परियोजना को लेकर सबसे महत्वपूर्ण बात यही है कि अभी किसी पेड़ की कटाई शुरू नहीं हुई है। फिलहाल विभागों की टीम सर्वे और पेड़ों की गणना कर रही है। चार से पांच हजार पेड़ों का आंकड़ा भी प्रारंभिक अनुमान है, अंतिम संख्या नहीं।
अब आने वाली सर्वे रिपोर्ट ही बताएगी कि बुआखाल से सर्किट हाउस तक सड़क चौड़ीकरण की वास्तविक तस्वीर क्या है। पौड़ी के लोगों की नजर इस बात पर रहेगी कि विकास की इस परियोजना में सड़क कितनी चौड़ी होगी और पर्यावरण की कीमत कितनी चुकानी पड़ेगी। यही सवाल आने वाले दिनों में इस पूरे मामले की दिशा तय करेगा।
