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Reading: चंपावत में गीता धामी का बड़ा बयान: UCC से बेटियों के अधिकार से लेकर ‘लैंड जिहाद’ तक का मुद्दा उठा, बोलीं- सुरक्षित और सशक्त उत्तराखंड के लिए जरूरी है जागरूकता
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The Hill India > Blog > उत्तराखंड > चंपावत में गीता धामी का बड़ा बयान: UCC से बेटियों के अधिकार से लेकर ‘लैंड जिहाद’ तक का मुद्दा उठा, बोलीं- सुरक्षित और सशक्त उत्तराखंड के लिए जरूरी है जागरूकता
उत्तराखंडफीचर्डराजनीति

चंपावत में गीता धामी का बड़ा बयान: UCC से बेटियों के अधिकार से लेकर ‘लैंड जिहाद’ तक का मुद्दा उठा, बोलीं- सुरक्षित और सशक्त उत्तराखंड के लिए जरूरी है जागरूकता

The Hill India News
Last updated: August 11, 2026 5:49 am
The Hill India News
Published: August 11, 2026
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सावन उत्सव कार्यक्रम में महिलाओं को संबोधित करते हुए गीता धामी ने राज्य सरकार की नीतियों और उपलब्धियों का किया जिक्र, सत्यापन अभियान, धर्मांतरण विरोधी कानून और सरकारी जमीन से अतिक्रमण हटाने को लेकर भी रखी बात

चंपावत/देहरादून: उत्तराखंड में राजनीतिक गतिविधियां लगातार तेज हो रही हैं। वर्ष 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए राजनीतिक दलों के साथ-साथ सामाजिक और सार्वजनिक कार्यक्रमों में भी सरकार की नीतियों और प्रदेश के मुद्दों की चर्चा बढ़ गई है। इसी क्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के विधानसभा क्षेत्र चंपावत में आयोजित सावन उत्सव कार्यक्रम में मुख्यमंत्री की पत्नी गीता धामी ने महिलाओं को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने राज्य सरकार की विभिन्न नीतियों और फैसलों का उल्लेख करते हुए समान नागरिक संहिता (UCC), महिला अधिकार, सरकारी भूमि से अतिक्रमण हटाने, सत्यापन अभियान और धर्मांतरण विरोधी कानून जैसे मुद्दों पर अपनी बात रखी।

Contents
सावन उत्सव कार्यक्रम में महिलाओं को संबोधित करते हुए गीता धामी ने राज्य सरकार की नीतियों और उपलब्धियों का किया जिक्र, सत्यापन अभियान, धर्मांतरण विरोधी कानून और सरकारी जमीन से अतिक्रमण हटाने को लेकर भी रखी बातUCC को लेकर गीता धामी ने कही बड़ी बात‘लैंड जिहाद’ और सरकारी जमीन पर अतिक्रमण का मुद्दा भी उठासत्यापन अभियान को लेकर भी लोगों को किया जागरूकधर्मांतरण विरोधी कानून का भी किया जिक्रमदरसों और शिक्षा व्यवस्था को लेकर भी सरकार के फैसलों का उल्लेखचंपावत में राजनीतिक संदेश के तौर पर भी देखा जा रहा कार्यक्रममहिलाओं से जागरूक रहने की अपीलसरकार के लिए उपलब्धियों को जनता तक पहुंचाने की चुनौती‘सुरक्षित और सशक्त उत्तराखंड’ पर जोर

कार्यक्रम के दौरान गीता धामी ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली सरकार के कामकाज का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य में कानून-व्यवस्था और सामाजिक व्यवस्था को मजबूत बनाए रखना बेहद जरूरी है। उन्होंने खास तौर पर महिलाओं और बेटियों के अधिकारों की चर्चा करते हुए समान नागरिक संहिता को सरकार के महत्वपूर्ण कदमों में शामिल बताया।

UCC को लेकर गीता धामी ने कही बड़ी बात

महिलाओं को संबोधित करते हुए गीता धामी ने कहा कि किसी भी समाज में नियम और कानूनों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। उनके अनुसार, समान नागरिक संहिता के माध्यम से राज्य में सभी नागरिकों के लिए समान कानूनी व्यवस्था की दिशा में कदम उठाया गया है।

उत्तराखंड देश का पहला राज्य है जहां समान नागरिक संहिता लागू की गई है। सरकार की ओर से इसे महिला अधिकारों, विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और अन्य नागरिक मामलों में समानता से जोड़कर प्रस्तुत किया जाता रहा है। गीता धामी ने भी कार्यक्रम में UCC का उल्लेख करते हुए इसे बेटियों और महिलाओं के अधिकारों की सुरक्षा से जोड़ा।

उन्होंने कहा कि प्रदेश की बेटियों को समान अधिकार मिलना जरूरी है और इसके लिए कानूनों की जानकारी भी महिलाओं तक पहुंचनी चाहिए। कार्यक्रम में मौजूद महिलाओं से उन्होंने जागरूक रहने और अपने अधिकारों को समझने की अपील की।

‘लैंड जिहाद’ और सरकारी जमीन पर अतिक्रमण का मुद्दा भी उठा

कार्यक्रम में गीता धामी ने सरकारी भूमि पर कथित अतिक्रमण के खिलाफ राज्य सरकार की कार्रवाई का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में सरकारी जमीन को अतिक्रमण से मुक्त कराने के लिए अभियान चलाया जा रहा है।

उन्होंने ‘लैंड जिहाद’ शब्द का इस्तेमाल करते हुए सरकारी भूमि पर कब्जे की बात कही और दावा किया कि बड़ी मात्रा में जमीन को अतिक्रमण से मुक्त कराया गया है। इससे पहले मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी अलग-अलग कार्यक्रमों में सरकारी भूमि से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई और ‘लैंड जिहाद’ के खिलाफ सरकार की नीति का उल्लेख कर चुके हैं।

हालांकि, ‘लैंड जिहाद’, ‘लव जिहाद’ जैसे शब्द राजनीतिक और सार्वजनिक विमर्श में इस्तेमाल होते रहे हैं। ऐसे मामलों में किसी व्यक्ति या समुदाय पर लगाए गए आरोपों को प्रमाणित तथ्य मानने के बजाय संबंधित जांच, आधिकारिक रिकॉर्ड और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर देखना जरूरी है।

सत्यापन अभियान को लेकर भी लोगों को किया जागरूक

गीता धामी ने प्रदेश में चल रहे सत्यापन अभियानों का जिक्र करते हुए कहा कि राज्य में बाहरी लोगों की पहचान और दस्तावेजों के सत्यापन की प्रक्रिया जरूरी है। उन्होंने महिलाओं और स्थानीय लोगों से अपील की कि वे अपने आसपास होने वाली गतिविधियों के प्रति जागरूक रहें।

उनका कहना था कि उत्तराखंड की सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित रखने के लिए कानून का पालन होना जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि लोगों को अपने रोजमर्रा के कामकाज में व्यस्त रहने के कारण कई बार आसपास होने वाली गतिविधियों की जानकारी नहीं हो पाती। ऐसे में सरकार की जिम्मेदारी है कि वह कानून-व्यवस्था और सुरक्षा से जुड़े मामलों पर नजर रखे।

इस दौरान उन्होंने पहचान छिपाने या गलत दस्तावेजों के इस्तेमाल के आरोपों का भी उल्लेख किया। हालांकि, ऐसे आरोपों की पुष्टि संबंधित मामलों में जांच और कानूनी कार्रवाई के आधार पर ही हो सकती है।

धर्मांतरण विरोधी कानून का भी किया जिक्र

कार्यक्रम में धर्मांतरण के मुद्दे पर भी गीता धामी ने सरकार के कदमों का उल्लेख किया। उत्तराखंड में धर्मांतरण को रोकने के लिए कानून लागू किया गया है और सरकार लगातार इसे अपनी प्रमुख नीतियों में गिनाती रही है।

मुख्यमंत्री धामी भी कई सार्वजनिक कार्यक्रमों में धर्मांतरण विरोधी कानून और राज्य की सांस्कृतिक पहचान की सुरक्षा को लेकर सरकार की नीति स्पष्ट कर चुके हैं।

गीता धामी ने कहा कि प्रदेश में कानून व्यवस्था मजबूत रहनी चाहिए और किसी भी तरह की अवैध गतिविधि के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने लोगों से भी अपील की कि किसी अफवाह या अपुष्ट सूचना पर विश्वास करने के बजाय संबंधित जानकारी की पुष्टि करें और कानून हाथ में न लें।

मदरसों और शिक्षा व्यवस्था को लेकर भी सरकार के फैसलों का उल्लेख

कार्यक्रम के दौरान अल्पसंख्यक शिक्षा व्यवस्था और मदरसों से जुड़े सरकार के कदमों का भी जिक्र किया गया। सरकार की ओर से अवैध या मानकों का पालन नहीं करने वाले मदरसों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही जाती रही है।

हाल के सरकारी बयानों में भी मुख्यमंत्री धामी ने मदरसों से जुड़े नियमों और कार्रवाई का उल्लेख किया है। नवंबर 2025 के एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री की ओर से 250 से अधिक मदरसों को सील करने और मदरसा बोर्ड को लेकर नए कानून का जिक्र किया गया था।

इस मुद्दे को लेकर सरकार का कहना है कि शिक्षा संस्थानों को निर्धारित नियमों और मानकों का पालन करना चाहिए। वहीं, किसी संस्था के खिलाफ कार्रवाई होने की स्थिति में उसके तथ्यों और कानूनी प्रक्रिया को देखना महत्वपूर्ण होता है।

चंपावत में राजनीतिक संदेश के तौर पर भी देखा जा रहा कार्यक्रम

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का चंपावत विधानसभा क्षेत्र राजनीतिक रूप से खास महत्व रखता है। ऐसे में यहां आयोजित किसी बड़े सार्वजनिक कार्यक्रम में सरकार की नीतियों और उपलब्धियों का जिक्र होना स्वाभाविक रूप से राजनीतिक चर्चा को भी जन्म देता है।

उत्तराखंड में 2027 के विधानसभा चुनाव को अभी समय है, लेकिन दोनों प्रमुख राजनीतिक दल जनता के बीच अपनी मौजूदगी मजबूत करने में जुटे हैं। भाजपा जहां सरकार की उपलब्धियों और सख्त कानूनों को अपनी उपलब्धि के तौर पर सामने रख रही है, वहीं विपक्ष इन मुद्दों पर सरकार से सवाल भी उठाता रहा है।

ऐसे में गीता धामी का महिलाओं के बीच पहुंचकर सरकार के कामकाज और नीतियों को सामने रखना राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

महिलाओं से जागरूक रहने की अपील

कार्यक्रम का एक प्रमुख संदेश महिलाओं को जागरूक करने से जुड़ा रहा। गीता धामी ने महिलाओं से कहा कि उन्हें अपने अधिकारों, कानूनों और आसपास के सामाजिक वातावरण की जानकारी रखनी चाहिए।

उन्होंने सरकार की ओर से महिलाओं और बेटियों के हित में किए जा रहे कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि सुरक्षित समाज के निर्माण में महिलाओं की भूमिका महत्वपूर्ण है। उनका कहना था कि सरकार कानून और व्यवस्था के स्तर पर अपनी जिम्मेदारी निभा रही है, लेकिन समाज को भी जागरूक होकर अपनी भूमिका निभानी होगी।

सरकार के लिए उपलब्धियों को जनता तक पहुंचाने की चुनौती

उत्तराखंड जैसे राज्य में विकास, पलायन, रोजगार, सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और कानून-व्यवस्था हमेशा से बड़े मुद्दे रहे हैं। ऐसे में सरकार के सामने एक ओर अपनी विकास योजनाओं को जनता तक पहुंचाने की चुनौती है, तो दूसरी ओर सामाजिक और सांस्कृतिक मुद्दों पर अपने रुख को स्पष्ट रखने की भी जरूरत है।

गीता धामी के चंपावत कार्यक्रम में UCC, महिला अधिकार, अतिक्रमण, सत्यापन, धर्मांतरण और शिक्षा व्यवस्था जैसे मुद्दों का एक साथ सामने आना इसी व्यापक राजनीतिक और सामाजिक विमर्श का हिस्सा माना जा रहा है।

‘सुरक्षित और सशक्त उत्तराखंड’ पर जोर

कुल मिलाकर चंपावत के सावन उत्सव कार्यक्रम में गीता धामी का संबोधन केवल धार्मिक-सांस्कृतिक आयोजन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें राज्य सरकार की कई प्रमुख नीतियों और संवेदनशील मुद्दों की चर्चा हुई। उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सरकार के फैसलों को प्रदेश की सुरक्षा, महिलाओं के अधिकार और उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान से जोड़ते हुए अपनी बात रखी।

अब देखना यह होगा कि आने वाले महीनों में सरकार इन मुद्दों को किस तरह जनता के बीच लेकर जाती है और विपक्ष इन पर क्या रणनीति अपनाता है। खास तौर पर UCC, भू-कानून, अतिक्रमण, सत्यापन, धर्मांतरण और महिला अधिकार जैसे मुद्दे आने वाले समय में उत्तराखंड की राजनीतिक बहस के केंद्र में बने रह सकते हैं।

इस बीच, चंपावत में गीता धामी के बयान ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि उत्तराखंड की पहचान, कानून-व्यवस्था और सामाजिक संरचना से जुड़े मुद्दे सरकार के राजनीतिक एजेंडे में महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं

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