JPSC-JSSC Protest: झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी को लेकर चल रहे छात्र आंदोलन के बीच जांच एजेंसियों ने बड़ा एक्शन लिया है। JPSC के पूर्व चेयरमैन एल. खियांग्ते को CID ने गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जांच के दौरान सामने आए सबूतों के आधार पर की गई है। वहीं, राजधानी रांची में बड़ी संख्या में छात्र विधानसभा घेराव के लिए सड़क पर उतर आए हैं।
रांची: झारखंड में JPSC और JSSC परीक्षाओं को लेकर छात्रों का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित धांधली और अनियमितताओं के खिलाफ पिछले कई दिनों से छात्र आंदोलन कर रहे हैं। सोमवार को इस आंदोलन ने उस समय और बड़ा रूप ले लिया, जब बड़ी संख्या में छात्र विधानसभा घेराव के लिए राजधानी की सड़कों पर उतर आए। इसी बीच झारखंड CID ने JPSC के पूर्व चेयरमैन एल. खियांग्ते को गिरफ्तार कर लिया। इस कार्रवाई के बाद परीक्षा विवाद ने नया मोड़ ले लिया है।
बताया जा रहा है कि CID लंबे समय से JPSC की 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में कथित गड़बड़ियों की जांच कर रही थी। जांच के दौरान सामने आए तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर पूर्व चेयरमैन की गिरफ्तारी की गई है। इस मामले में अब तक कुल 20 लोगों की गिरफ्तारी होने की बात सामने आई है। ऐसे में पूर्व चेयरमैन की गिरफ्तारी को जांच की दिशा में एक महत्वपूर्ण कार्रवाई माना जा रहा है।
परीक्षा परिणाम के बाद शुरू हुआ था विवाद
JPSC की 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम सामने आने के बाद से ही अभ्यर्थियों के बीच कई सवाल उठने लगे थे। छात्रों ने परीक्षा प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर विरोध जताया और जांच की मांग तेज कर दी। धीरे-धीरे यह मुद्दा छात्र आंदोलन में बदल गया और राजधानी रांची में प्रदर्शन शुरू हो गए।
छात्रों का आरोप है कि परीक्षा जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रिया में पारदर्शिता बेहद जरूरी है और किसी भी तरह की गड़बड़ी का सीधा असर हजारों अभ्यर्थियों के भविष्य पर पड़ता है। इसी मांग को लेकर छात्र लगातार आंदोलन कर रहे हैं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच CID को सौंपी गई। जांच आगे बढ़ने के साथ JPSC कार्यालय से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों से पूछताछ की गई और परीक्षा से संबंधित दस्तावेजों की भी जांच की गई।
JPSC मुख्यालय पर CID की छापेमारी से बढ़ी हलचल
जांच के दौरान CID की टीम ने रांची स्थित JPSC मुख्यालय पर भी कार्रवाई की थी। टीम ने वहां मौजूद दस्तावेजों और अन्य महत्वपूर्ण रिकॉर्ड की जांच की। अधिकारियों और कर्मचारियों से पूछताछ भी की गई।
जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि परीक्षा प्रक्रिया में कथित अनियमितताएं आखिर किस स्तर पर हुईं और इसके पीछे कौन-कौन लोग शामिल थे। इसी क्रम में अब पूर्व चेयरमैन एल. खियांग्ते की गिरफ्तारी हुई है।
उनकी गिरफ्तारी के बाद यह सवाल भी महत्वपूर्ण हो गया है कि जांच में आगे किन लोगों की भूमिका सामने आती है और एजेंसी किस दिशा में कार्रवाई करती है।
पद से इस्तीफा दे चुके थे एल. खियांग्ते
JPSC परीक्षा विवाद के बीच एल. खियांग्ते पहले ही चेयरमैन पद से इस्तीफा दे चुके थे। उन्होंने अपना इस्तीफा ईमेल के जरिए राजभवन भेजा था। इसके बाद राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया था।
इस्तीफे के बाद भी परीक्षा विवाद से जुड़ी जांच जारी रही। JPSC कार्यालय में काम करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों से पूछताछ के अलावा जांच टीम ने परीक्षा से संबंधित दस्तावेजों को भी खंगाला।
अब गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसी के सामने यह पता लगाने की चुनौती होगी कि कथित गड़बड़ी की पूरी कड़ी कहां से शुरू हुई और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही।
ED ने भी दर्ज किया मनी लॉन्ड्रिंग का केस
JPSC परीक्षा विवाद में अब प्रवर्तन निदेशालय यानी ED की एंट्री ने मामले को और गंभीर बना दिया है। सोमवार को ED ने भी इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा केस दर्ज किया है।
बताया गया है कि ED ने CID की FIR को आधार बनाकर मामला दर्ज किया है। ऐसे में अब एक ओर CID कथित परीक्षा गड़बड़ी की जांच कर रही है, वहीं दूसरी ओर ED उससे जुड़े संभावित आर्थिक लेन-देन और मनी लॉन्ड्रिंग के पहलुओं की जांच कर सकती है।
दो जांच एजेंसियों की कार्रवाई के बाद JPSC परीक्षा विवाद का दायरा और बड़ा होता नजर आ रहा है।
विधानसभा घेराव के लिए सड़क पर उतरे छात्र
इधर, रांची में छात्रों का आंदोलन भी लगातार तेज हो रहा है। सोमवार को बड़ी संख्या में छात्र विधानसभा घेराव के लिए आगे बढ़े। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि परीक्षा में कथित गड़बड़ियों की निष्पक्ष और व्यापक जांच हो तथा दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।
प्रदर्शन में लंबे समय से आंदोलन कर रहे छात्र नेता और अभ्यर्थी भी शामिल हुए। 9 दिन से भूख हड़ताल पर बैठे देवेंद्रनाथ महतो भी एंबुलेंस के जरिए प्रदर्शन में पहुंचे। इससे आंदोलन की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है।
विधानसभा की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पुलिस ने कई स्थानों पर बैरिकेडिंग की। स्थिति बिगड़ने पर पुलिस की ओर से वॉटर कैनन का इस्तेमाल किए जाने और प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज किए जाने की भी जानकारी सामने आई है।
इस दौरान रांची की सड़कों पर काफी तनावपूर्ण स्थिति देखने को मिली। छात्र अपनी मांगों पर अड़े रहे, जबकि पुलिस उन्हें विधानसभा की ओर जाने से रोकने में जुटी रही।
अब जांच के साथ राजनीतिक दबाव भी बढ़ा
JPSC परीक्षा विवाद अब केवल प्रशासनिक या परीक्षा संबंधी मामला नहीं रह गया है। छात्र आंदोलन के लगातार तेज होने के साथ इस मुद्दे पर राजनीतिक दबाव भी बढ़ रहा है। छात्रों का कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता बनाए रखना सरकार और संबंधित संस्थाओं की जिम्मेदारी है।
अभ्यर्थियों के लिए सरकारी नौकरी की परीक्षा सिर्फ एक परीक्षा नहीं होती, बल्कि वर्षों की मेहनत, तैयारी और भविष्य की उम्मीद इससे जुड़ी होती है। ऐसे में परीक्षा प्रक्रिया पर सवाल उठने से छात्रों में नाराजगी स्वाभाविक है।
पूर्व चेयरमैन की गिरफ्तारी से अब छात्रों की निगाहें जांच की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। छात्रों को उम्मीद है कि जांच के जरिए पूरे मामले की सच्चाई सामने आएगी और यदि किसी स्तर पर गड़बड़ी या भ्रष्टाचार साबित होता है तो संबंधित लोगों पर कड़ी कार्रवाई होगी।
आगे क्या होगा?
एल. खियांग्ते की गिरफ्तारी के बाद JPSC परीक्षा विवाद में जांच का दायरा और बढ़ने की संभावना है। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने पर जोर दे सकती हैं कि कथित अनियमितताओं की योजना कैसे बनी, इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे और परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेजों या व्यवस्थाओं में किस स्तर पर गड़बड़ी हुई।
वहीं ED की जांच आर्थिक पहलुओं पर केंद्रित हो सकती है। ऐसे में आने वाले दिनों में इस मामले में और गिरफ्तारियां या नए खुलासे होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
फिलहाल एक तरफ CID की कार्रवाई ने JPSC विवाद को नया मोड़ दिया है, तो दूसरी तरफ रांची में छात्रों का आंदोलन सरकार और प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। पूर्व चेयरमैन की गिरफ्तारी और विधानसभा घेराव के दौरान हुए पुलिस एक्शन के बाद अब पूरे झारखंड की नजर इस बात पर है कि जांच किस निष्कर्ष तक पहुंचती है और छात्रों की मांगों पर सरकार का अगला कदम क्या होता है।
JPSC परीक्षा विवाद में अब जांच एजेंसियों की कार्रवाई और सड़क पर छात्रों का संघर्ष—दोनों साथ-साथ चल रहे हैं। ऐसे में आने वाले दिन झारखंड की प्रतियोगी परीक्षा व्यवस्था और हजारों अभ्यर्थियों के भविष्य के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
