वर्धा/महाराष्ट्र: महाराष्ट्र के वर्धा जिले में स्थित समृद्धि महामार्ग (समृद्धि एक्सप्रेसवे) पर सोमवार को एक दिल दहला देने वाला सड़क हादसा हुआ, जिसने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया। बेटी का पुणे में एडमिशन कराकर खुशियों के साथ घर लौट रहा एक परिवार कुछ ही पलों में मौत की आगोश में समा गया। कार और इथेनॉल से भरे ट्रक के बीच हुई भीषण टक्कर के बाद दोनों वाहनों में आग लग गई। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया और कार में सवार चार लोगों के साथ ट्रक चालक एवं क्लीनर भी जिंदा जल गए। इस दर्दनाक हादसे में कुल छह लोगों की मौत हो गई।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, हादसा वर्धा जिले की सीमा में समृद्धि महामार्ग पर उस समय हुआ जब इथेनॉल से भरा एक ट्रक पहले से दुर्घटनाग्रस्त होकर हाईवे पर खड़ा था। दुर्घटना के कारण पुलिस और प्रशासन ने ट्रैफिक को डायवर्ट किया हुआ था। इसी दौरान पुणे से वर्धा की ओर लौट रही एक तेज रफ्तार कार अनियंत्रित होकर सीधे खड़े ट्रक से जा टकराई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि कुछ ही सेकंड में दोनों वाहनों में भीषण आग लग गई। आग की लपटें इतनी तेज थीं कि किसी को बाहर निकलने का मौका तक नहीं मिल सका।
कार में सवार चारों लोग वर्धा जिले के सालोड गांव के निवासी थे। यह परिवार अपनी जुड़वां बेटियों में से एक का पुणे में एमबीए पाठ्यक्रम में एडमिशन कराने गया था। बेटी के जीवन की नई शुरुआत का जश्न मनाने और उसे कॉलेज में छोड़ने के बाद पूरा परिवार वापस घर लौट रहा था। लेकिन किसी ने भी नहीं सोचा था कि यह सफर उनकी जिंदगी का आखिरी सफर बन जाएगा।
हादसे में जान गंवाने वालों में कार चालक अंकुश राऊत, परिवार के मुखिया राजेश टिपले, उनकी पत्नी सुषमा टिपले और उनकी बेटी जाह्नवी टिपले शामिल हैं। वहीं ट्रक चालक संजय कुमार और क्लीनर समरजीत पाल की भी आग में झुलसने से मौके पर ही मौत हो गई। हादसे ने एक ही पल में दो परिवारों की खुशियां छीन लीं और पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई।
बताया जा रहा है कि टक्कर के बाद कार जलते हुए ट्रक के नीचे फंस गई, जिससे उसमें बैठे लोगों के बाहर निकलने की कोई संभावना नहीं बची। आग इतनी तेजी से फैली कि आसपास मौजूद लोग भी केवल बेबस होकर घटना देखते रह गए। स्थानीय लोगों ने तुरंत पुलिस और दमकल विभाग को सूचना दी, जिसके बाद राहत एवं बचाव दल मौके पर पहुंचे। काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया, लेकिन तब तक सभी छह लोगों की मौत हो चुकी थी।
दमकल कर्मियों और पुलिस को शवों को बाहर निकालने के लिए कार को गैस कटर से काटना पड़ा। हादसे का मंजर इतना भयावह था कि मौके पर मौजूद राहतकर्मियों की आंखें भी नम हो गईं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आग की लपटें कई फीट ऊंचाई तक उठ रही थीं और पूरे इलाके में धुएं का घना गुबार फैल गया था।
पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया है कि दुर्घटनाग्रस्त ट्रक हाईवे पर पहले से खड़ा था और उसके कारण यातायात को दूसरी लेन से गुजारा जा रहा था। आशंका जताई जा रही है कि तेज रफ्तार और अचानक सामने आए अवरोध के कारण कार चालक वाहन पर नियंत्रण नहीं रख सका, जिससे यह दर्दनाक हादसा हो गया। हालांकि पुलिस ने मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी है और दुर्घटना के सभी पहलुओं की पड़ताल की जा रही है।
राजेश टिपले की जुड़वां बेटियों में से एक का पुणे में एमबीए में दाखिला हुआ था। परिवार के लिए यह गर्व और खुशी का पल था। सभी लोग उसे कॉलेज छोड़ने गए थे और वापसी के दौरान दूसरी बेटी भी उनके साथ कार में मौजूद थी। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। एक ही पल में माता-पिता और बेटी की मौत ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया। गांव में जैसे ही हादसे की खबर पहुंची, हर घर में मातम छा गया और बड़ी संख्या में लोग पीड़ित परिवार के घर पहुंचने लगे।
इस भीषण दुर्घटना ने एक बार फिर हाईवे पर सड़क सुरक्षा, दुर्घटनाग्रस्त वाहनों की समय पर निकासी, ट्रैफिक प्रबंधन और आपातकालीन व्यवस्था को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दुर्घटनाग्रस्त ट्रक को समय रहते सुरक्षित स्थान पर हटाया जाता या चेतावनी व्यवस्था और अधिक प्रभावी होती, तो शायद इतना बड़ा हादसा टाला जा सकता था।
फिलहाल पुलिस ने सभी शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मृतकों के परिजनों को सूचना दे दी गई है। प्रशासन ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं और हादसे के वास्तविक कारणों का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है। समृद्धि महामार्ग पर हुए इस दर्दनाक हादसे ने पूरे महाराष्ट्र को शोक में डुबो दिया है। बेटी के उज्ज्वल भविष्य का सपना लेकर निकला परिवार कभी वापस घर नहीं लौट सका, और कुछ ही पलों में छह जिंदगियां आग की लपटों में हमेशा के लिए बुझ गईं।
