नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली और उससे जुड़े शहरों की तस्वीर आने वाले वर्षों में पूरी तरह बदल सकती है। दिल्ली-एनसीआर (राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र) के लिए तैयार किए गए मास्टर प्लान 2041 को मंजूरी मिलने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है। 16 जून को होने वाली नेशनल कैपिटल रीजन प्लानिंग बोर्ड (NCRPB) की अहम बैठक में इस महत्वाकांक्षी योजना पर अंतिम मुहर लग सकती है। यदि ऐसा होता है तो दिल्ली, नोएडा, गुरुग्राम, गाजियाबाद, फरीदाबाद, मेरठ, हापुड़, पानीपत और अलवर जैसे शहरों के बीच यात्रा का समय नाटकीय रूप से घट जाएगा।
इस मास्टर प्लान का सबसे बड़ा लक्ष्य दिल्ली-एनसीआर को दुनिया के सबसे आधुनिक और एकीकृत शहरी क्षेत्रों में बदलना है। योजना के तहत क्षेत्र के प्रमुख शहरों को हाई-स्पीड रेल, नमो भारत ट्रेन (RRTS), ऑर्बिटल रेल नेटवर्क और अन्य आधुनिक परिवहन प्रणालियों के माध्यम से इस तरह जोड़ा जाएगा कि लोगों को एक शहर से दूसरे शहर तक पहुंचने में केवल 30 मिनट का समय लगे।
2030 तक दुनिया का सबसे बड़ा शहरी क्लस्टर बनेगा NCR
विशेषज्ञों के अनुसार अगले 10 से 15 वर्षों में एनसीआर की आबादी में लगभग 3 करोड़ लोगों की वृद्धि हो सकती है। अनुमान है कि वर्ष 2030 तक दिल्ली-एनसीआर जनसंख्या के मामले में जापान की राजधानी टोक्यो महानगरीय क्षेत्र को पीछे छोड़कर दुनिया का सबसे बड़ा शहरी क्लस्टर बन जाएगा।
तेजी से बढ़ती आबादी और शहरीकरण की चुनौतियों को देखते हुए सरकार ने क्षेत्रीय योजना 2041 तैयार की है। इस योजना के तहत लगभग 20 लाख करोड़ रुपये के निवेश से बुनियादी ढांचे, परिवहन, आवास, उद्योग और स्मार्ट शहरों का विकास किया जाएगा।
30 मिनट में पहुंचेंगे बड़े शहर
मास्टर प्लान 2041 की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता “30 मिनट कनेक्टिविटी मॉडल” है। इसके तहत दिल्ली और एनसीआर के प्रमुख शहरों के बीच यात्रा समय को काफी कम किया जाएगा।
योजना के अनुसार गुरुग्राम, गाजियाबाद, फरीदाबाद, सोनीपत और नोएडा जैसे प्रमुख शहरों तक आधे घंटे के भीतर पहुंचना संभव होगा। इसके लिए हाई-स्पीड मास ट्रांजिट रेल नेटवर्क विकसित किया जाएगा। इससे रोजाना लाखों यात्रियों को राहत मिलेगी और ट्रैफिक जाम की समस्या भी काफी हद तक कम होगी।
तीन स्तरों में विकसित होगी परिवहन व्यवस्था
मास्टर प्लान के तहत परिवहन नेटवर्क को तीन अलग-अलग स्तरों में विकसित करने का प्रस्ताव है।
टियर-1: 30 मिनट की कनेक्टिविटी
इस श्रेणी में दिल्ली और आसपास के प्रमुख शहरों को रखा गया है। सुपरफास्ट रेल नेटवर्क और एक्सप्रेस मास ट्रांजिट सिस्टम के माध्यम से इन शहरों के बीच 30 मिनट के भीतर यात्रा सुनिश्चित की जाएगी।
टियर-2: 60 मिनट की कनेक्टिविटी
जींद, करनाल, बुलंदशहर, हापुड़ और अन्य उप-क्षेत्रीय शहरों को साधारण रेलवे और इंटरसिटी ट्रेनों के माध्यम से एक घंटे के दायरे में लाने की योजना है। इससे इन शहरों का आर्थिक और सामाजिक विकास तेज होगा।
टियर-3: 2 से 3 घंटे की कनेक्टिविटी
एनसीआर के सबसे दूरवर्ती क्षेत्रों जैसे अलवर, पानीपत और मेरठ के बाहरी इलाकों को नमो भारत ट्रेन, एक्सप्रेसवे और चौड़ी सड़कों के माध्यम से जोड़ा जाएगा। लक्ष्य यह है कि इन क्षेत्रों तक अधिकतम 2 से 3 घंटे में पहुंचा जा सके।
नमो भारत ट्रेन नेटवर्क को मिलेगा बड़ा विस्तार
दिल्ली-मेरठ नमो भारत कॉरिडोर की सफलता के बाद अब कई नए कॉरिडोर विकसित करने की योजना बनाई गई है। इनमें दिल्ली-अलवर, दिल्ली-पानीपत-करनाल, दिल्ली-गुरुग्राम-शाहजहांपुर-नीमराणा-अलवर और दिल्ली-नोएडा-गाजियाबाद जैसे मार्ग शामिल हैं।
एनसीआरटीसी (NCRTC) इन परियोजनाओं को प्राथमिकता दे रही है। इन कॉरिडोरों के बनने से क्षेत्रीय यात्रा पहले से कहीं अधिक तेज, सुरक्षित और सुविधाजनक हो जाएगी।
इसके अलावा लंबी दूरी की सुपरफास्ट ट्रेनों के लिए विशेष मास ट्रांजिट रेल सिस्टम विकसित करने पर भी विचार किया जा रहा है। ऑर्बिटल रेल नेटवर्क के जरिए बाहरी एनसीआर क्षेत्रों को सीधे जोड़ा जाएगा, जिससे दिल्ली पर निर्भरता कम होगी।
हेली-टैक्सी सेवा भी हो सकती है शुरू
मास्टर प्लान 2041 में आधुनिक हवाई परिवहन को भी महत्व दिया गया है। क्षेत्रीय आवागमन के लिए हेली-टैक्सी सेवाओं की शुरुआत पर विचार किया जा रहा है। यदि यह योजना लागू होती है तो व्यापारिक यात्रियों और आपातकालीन सेवाओं के लिए नई संभावनाएं खुलेंगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में हेलीकॉप्टर आधारित सार्वजनिक परिवहन महानगरों में आम होता जाएगा और एनसीआर इस दिशा में अग्रणी क्षेत्र बन सकता है।
आठ नई स्मार्ट टाउनशिप बसाने की तैयारी
दिल्ली पर बढ़ते जनसंख्या दबाव को कम करने के लिए उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान में 5 से 8 नई ग्रीनफील्ड स्मार्ट टाउनशिप विकसित करने का प्रस्ताव है।
इन नए शहरों को आधुनिक तकनीक और सतत विकास के सिद्धांतों के आधार पर बसाया जाएगा। पानी, बिजली, सीवरेज, कचरा प्रबंधन और सार्वजनिक परिवहन जैसी सभी व्यवस्थाएं स्मार्ट तकनीक के जरिए संचालित होंगी।
इन टाउनशिप का उद्देश्य केवल आवास उपलब्ध कराना नहीं बल्कि रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और मनोरंजन की सुविधाओं को भी स्थानीय स्तर पर विकसित करना है ताकि लोगों को रोजाना लंबी दूरी तय न करनी पड़े।
यमुना सिटी और न्यू नोएडा को मिल सकती है बड़ी पहचान
उत्तर प्रदेश में यमुना एक्सप्रेसवे इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (YEIDA) क्षेत्र को लगभग 20 लाख आबादी वाले नए ग्रीनफील्ड शहर के रूप में विकसित करने की तैयारी है।
इसके साथ ही न्यू नोएडा और यमुना सिटी को भी मास्टर प्लान में विशेष महत्व दिया गया है। इन शहरों को हाई-स्पीड रेल नेटवर्क और औद्योगिक गलियारों से जोड़ा जाएगा।
योजना के तहत रेलवे स्टेशन और रैपिड ट्रांजिट नोड्स के आसपास कार्यालय, बाजार, आवासीय परिसर और व्यावसायिक केंद्र विकसित किए जाएंगे। इससे “वर्क-लिव-ट्रैवल” मॉडल को बढ़ावा मिलेगा और लोगों का यात्रा समय कम होगा।
हरियाणा का पंचग्राम प्रोजेक्ट भी शामिल
हरियाणा सरकार के महत्वाकांक्षी पंचग्राम प्रोजेक्ट को भी मास्टर प्लान 2041 में शामिल किए जाने की संभावना है। कुंडली-मानेसर-पलवल (KMP) एक्सप्रेसवे के आसपास विकसित होने वाले इस क्षेत्र को भविष्य के स्मार्ट शहर के रूप में तैयार किया जाएगा।
सरकार का उद्देश्य दिल्ली के बाहर नए विकास केंद्र स्थापित करना है ताकि राजधानी पर बढ़ते दबाव को कम किया जा सके।
NCR का दायरा रहेगा बरकरार
हाल ही में हरियाणा सरकार ने महेंद्रगढ़, जींद, भिवानी, चरखी दादरी और करनाल जिलों को एनसीआर क्षेत्र से बाहर करने की मांग की थी। सरकार का तर्क था कि एनसीआर के सख्त नियमों के कारण विकास परियोजनाओं को लागू करने में कठिनाई आती है।
हालांकि प्रस्तावित बैठक के एजेंडे के अनुसार एनसीआर के वर्तमान भौगोलिक दायरे में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। लगभग 58,083 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल वाला मौजूदा एनसीआर क्षेत्र यथावत रहेगा। इससे संबंधित सभी उप-क्षेत्रीय योजनाएं भी पहले की तरह लागू रहेंगी।
बदल जाएगी दिल्ली-NCR की तस्वीर
मास्टर प्लान 2041 केवल परिवहन परियोजना नहीं है, बल्कि यह पूरे क्षेत्र के आर्थिक, सामाजिक और औद्योगिक विकास का रोडमैप है। बेहतर कनेक्टिविटी, नए स्मार्ट शहर, हाई-स्पीड रेल नेटवर्क, आधुनिक बुनियादी ढांचा और बड़े निवेश से दिल्ली-एनसीआर को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी शहरी क्षेत्र बनाने की तैयारी है।
यदि प्रस्तावित योजनाएं समय पर लागू होती हैं, तो आने वाले वर्षों में दिल्ली, नोएडा, गुरुग्राम, गाजियाबाद, मेरठ, हापुड़, पानीपत और अलवर जैसे शहरों के बीच की दूरियां केवल नक्शे तक सीमित रह जाएंगी और करोड़ों लोगों को तेज, सुरक्षित और आधुनिक परिवहन सुविधाओं का लाभ मिलेगा। यह मास्टर प्लान भविष्य के दिल्ली-एनसीआर की नई पहचान बन सकता है।
