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SIPRI Report 2026: दुनिया में परमाणु बमों की संख्या में मामूली गिरावट, लेकिन भारत-चीन और फ्रांस ने बढ़ाई ताकत; देखें पूरी लिस्ट

The Hill India News
Last updated: June 9, 2026 1:51 am
The Hill India News
Published: June 9, 2026
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नई दिल्ली: वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और कई मोर्चों पर जारी युद्ध के बीच परमाणु हथियारों को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और चौंकाने वाला आंकड़ा सामने आया है। स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रीसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) ने साल 2026 की अपनी ताजा वार्षिक रिपोर्ट जारी कर दी है। इस रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक स्तर पर परमाणु हथियारों के कुल भंडार में पिछले साल के मुकाबले आंशिक कमी दर्ज की गई है। हालांकि, रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि संख्या में दिख रही यह गिरावट भ्रामक हो सकती है, क्योंकि कई महाशक्तियां शांति की ओर बढ़ने के बजाय अपने परमाणु शस्त्रागार को अत्याधुनिक बनाने और नए वॉरहेड्स तैनात करने में जुटी हैं।

Contents
किन देशों के पास हैं कितने परमाणु हथियार? देखें 2026 की पूरी सूचीरणनीतिक रूप से मजबूत हुआ भारत, पाकिस्तान से बढ़ा फासलाफ्रांस और चीन की लंबी छलांग: यूरोप और एशिया में बढ़ी चिंतामहाशक्तियों के भंडारों में कमी के बावजूद मंडरा रहा है खतरा

सिपरी (SIPRI) के अनुमानों के मुताबिक, जनवरी 2026 तक दुनिया में परमाणु बमों की संख्या घटकर 12,187 वॉरहेड्स रह गई है। यदि इसकी तुलना साल 2025 से की जाए, तो एक वर्ष पहले दुनिया का कुल परमाणु भंडार 12,241 वॉरहेड्स का था। यानी पूरे एक साल में वैश्विक परमाणु भंडार में 54 वॉरहेड्स की कमी आई है। इस गिरावट के पीछे मुख्य वजह अमेरिका और रूस द्वारा अपने पुराने और निष्क्रिय हो चुके परमाणु हथियारों को नष्ट करना है। लेकिन इसके समानांतर, एशिया और यूरोप के कई देशों में परमाणु हथियारों की होड़ तेज हो गई है।

किन देशों के पास हैं कितने परमाणु हथियार? देखें 2026 की पूरी सूची

सिपरी की रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि भले ही वैश्विक स्तर पर कुल संख्या कम हुई हो, लेकिन चीन, फ्रांस, भारत और उत्तर कोरिया जैसे देशों ने अपने परमाणु शस्त्रागार का विस्तार किया है। नीचे दी गई तालिका से समझें कि साल 2025 के मुकाबले साल 2026 में किस देश की परमाणु शक्ति में कितना बदलाव आया है:

देश 2025 में परमाणु बमों की संख्या 2026 में परमाणु बमों की संख्या स्थिति/बदलाव
रूस 5469 5420 49 वॉरहेड्स की कमी
अमेरिका 5177 5042 135 वॉरहेड्स की कमी
चीन 600 620 20 वॉरहेड्स की बढ़ोतरी
फ्रांस 290 370 80 वॉरहेड्स की बड़ी बढ़ोतरी
ब्रिटेन 225 225 कोई बदलाव नहीं
भारत 180 190 10 वॉरहेड्स की बढ़ोतरी
पाकिस्तान 170 170 कोई बदलाव नहीं
इजरायल 90 90 कोई बदलाव नहीं
उत्तर कोरिया 50 60 10 वॉरहेड्स की बढ़ोतरी
कुल वैश्विक भंडार 12,241 12,187 54 वॉरहेड्स की कुल कमी

रणनीतिक रूप से मजबूत हुआ भारत, पाकिस्तान से बढ़ा फासला

दक्षिण एशिया के संदर्भ में यह रिपोर्ट बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण मानी जा रही है। सिपरी के आंकड़ों के अनुसार, भारत ने अपनी रणनीतिक क्षमताओं और सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए अपने परमाणु शस्त्रागार का निरंतर विस्तार किया है। साल 2025 में भारत के पास जहां 180 परमाणु वॉरहेड्स थे, वहीं दुनिया में परमाणु बमों की संख्या की इस नई रिपोर्ट के अनुसार साल 2026 में यह आंकड़ा बढ़कर 190 हो गया है।

“भारत के परमाणु बेड़े में यह बढ़ोतरी उसकी ‘न्यूनतम विश्वसनीय निवारण’ (Minimum Credible Deterrence) और ‘नो फर्स्ट यूज’ (No First Use) की नीति के तहत अपनी रक्षा प्रणालियों को मजबूत करने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। बदलते क्षेत्रीय समीकरणों के बीच भारत अपनी तीनों सेनाओं (जल, थल और नभ) को परमाणु सक्षम (Nuclear Triad) बनाने पर तेजी से काम कर रहा है।”

दिलचस्प बात यह है कि परमाणु हथियारों की दौड़ में भारत अब अपने पड़ोसी देश पाकिस्तान से काफी आगे निकल चुका है। सिपरी के अनुमानों के मुताबिक, पाकिस्तान का परमाणु भंडार साल 2025 से लेकर 2026 तक 170 वॉरहेड्स पर ही अटका हुआ है, यानी उसमें कोई बदलाव दर्ज नहीं किया गया है। आर्थिक तंगी और आंतरिक राजनीतिक अस्थिरता से जूझ रहे पाकिस्तान के लिए अपने परमाणु कार्यक्रम का विस्तार करना फिलहाल चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है।

फ्रांस और चीन की लंबी छलांग: यूरोप और एशिया में बढ़ी चिंता

इस रिपोर्ट का सबसे चौंकाने वाला पहलू फ्रांस का परमाणु शस्त्रागार है। पश्चिमी यूरोप की इस महाशक्ति ने महज एक साल के भीतर अपने परमाणु बमों की संख्या को 290 से बढ़ाकर 370 कर दिया है। 80 वॉरहेड्स की यह बढ़ोतरी इस साल दुनिया के किसी भी देश द्वारा की गई सबसे बड़ी वृद्धि है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यूक्रेन संकट और रूस के साथ बढ़ते तनाव के बीच फ्रांस ने यूरोपीय सुरक्षा की कमान अपने हाथों में लेने के संकेत दिए हैं।

दूसरी ओर, चीन ने भी अपनी विस्तारवादी नीतियों को जारी रखते हुए अपने बेड़े में 20 नए परमाणु बम जोड़े हैं। साल 2025 में चीन के पास 600 वॉरहेड्स थे, जो अब 2026 में बढ़कर 620 हो चुके हैं। चीन जिस तेजी से साइलो (Silo) का निर्माण कर रहा है और अपनी मिसाइल तकनीक को अपग्रेड कर रहा है, उसने अमेरिका और उसके सहयोगी देशों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। इसके अलावा, वैश्विक प्रतिबंधों का सामना कर रहे उत्तर कोरिया ने भी अपनी आक्रामक नीति जारी रखते हुए अपने भंडार को 50 से बढ़ाकर 60 कर लिया है।

महाशक्तियों के भंडारों में कमी के बावजूद मंडरा रहा है खतरा

रूस और अमेरिका के परमाणु भंडार में आई कमी के कारण ही वैश्विक स्तर पर कुल संख्या में गिरावट देखी जा रही है। रूस के वॉरहेड्स 5,469 से घटकर 5,420 और अमेरिका के 5,177 से घटकर 5,042 रह गए हैं। हालांकि, सिपरी ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट चेतावनी दी है कि इस आंशिक गिरावट को परमाणु निरस्त्रीकरण की दिशा में उठाया गया कदम नहीं माना जाना चाहिए।

वास्तव में, दोनों ही देश शीतयुद्ध के जमाने के अपने पुराने और बेकार हो चुके परमाणु हथियारों को रिटायर (नष्ट) कर रहे हैं, जिसके कारण कुल संख्या कम दिख रही है। लेकिन जो हथियार उनके पास सक्रिय स्थिति में बचे हैं, उन्हें अत्याधुनिक हाइपरसोनिक मिसाइलों और (स्टील्थ) सबमरीन पर तैनात किया जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह प्रवृत्ति जल्द ही उलट सकती है, क्योंकि वैश्विक संधियों के कमजोर होने के बाद सभी प्रमुख देश नई परमाणु प्रणालियों की तैनाती में तेजी ला रहे हैं।

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