नैनीताल। उत्तराखंड के चर्चित नैनीताल नाबालिग दुष्कर्म मामले में आरोपी ठेकेदार उस्मान खान को फिलहाल हाईकोर्ट से कोई राहत नहीं मिली है। शुक्रवार को उत्तराखंड हाईकोर्ट में उसकी दूसरी जमानत याचिका पर सुनवाई हुई, लेकिन अदालत ने जमानत देने से इनकार करते हुए राज्य सरकार और ट्रायल कोर्ट से मामले की प्रगति रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। न्यायमूर्ति आलोक महरा की एकलपीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए ट्रायल की वर्तमान स्थिति की जानकारी मांगी है।
मामला उस समय सुर्खियों में आया था जब 30 अप्रैल 2025 को नैनीताल में एक 12 वर्षीय नाबालिग बच्ची के साथ कथित दुष्कर्म का खुलासा हुआ था। इस घटना के सामने आने के बाद पूरे शहर में भारी आक्रोश देखने को मिला था। स्थानीय लोगों ने आरोपी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग करते हुए प्रदर्शन किए थे और कई स्थानों पर तनावपूर्ण हालात भी बन गए थे।
जमानत याचिका में क्या रखी गई दलील?
सुनवाई के दौरान आरोपी उस्मान खान की ओर से अदालत में कहा गया कि इससे पहले हाईकोर्ट की एकलपीठ ने उसकी जमानत याचिका खारिज करते हुए एडीजे हल्द्वानी को तीन महीने के भीतर ट्रायल पूरा करने के निर्देश दिए थे। हालांकि निर्धारित समय सीमा के बावजूद ट्रायल अभी तक पूरा नहीं हो पाया है।
बचाव पक्ष ने यह भी तर्क दिया कि मामले के अधिकांश प्रमुख गवाहों के बयान दर्ज हो चुके हैं और अब साक्ष्यों या गवाहों से छेड़छाड़ की कोई संभावना नहीं बची है। ऐसे में आरोपी को जमानत पर रिहा किया जा सकता है। लेकिन अदालत ने इन दलीलों को पर्याप्त नहीं माना और जमानत पर कोई फैसला देने के बजाय ट्रायल की स्थिति स्पष्ट करने के लिए रिपोर्ट मांगी।
हाईकोर्ट ने मांगी ट्रायल कोर्ट से रिपोर्ट
अदालत ने ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया है कि वह निर्धारित समय के भीतर मुकदमे की प्रगति और सुनवाई की स्थिति से संबंधित रिपोर्ट प्रस्तुत करे। कोर्ट यह जानना चाहता है कि ट्रायल पूरा होने में अभी कितना समय लग सकता है और अब तक की कार्यवाही किस स्तर तक पहुंची है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि ट्रायल की गति और न्यायिक प्रक्रिया को प्राथमिकता दी जाएगी। रिपोर्ट आने के बाद ही जमानत याचिका पर आगे कोई निर्णय लिया जा सकता है।
दुष्कर्म के आरोप के बाद भड़का था जनाक्रोश
नैनीताल के मल्लीताल थाना क्षेत्र में दर्ज इस मामले ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया था। आरोप है कि 66 वर्षीय ठेकेदार उस्मान खान ने 12 साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म किया। घटना की जानकारी सामने आने के बाद स्थानीय लोगों में भारी रोष फैल गया था।
आक्रोशित भीड़ ने आरोपी के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए कई स्थानों पर तोड़फोड़ भी की थी। हालात को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था करनी पड़ी थी। प्रशासन ने लोगों को आश्वस्त किया था कि मामले की निष्पक्ष जांच होगी और दोषी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसके बाद पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था, जहां वह तब से बंद है।
सामाजिक बहिष्कार का भी सामना कर रहा है आरोपी
घटना के बाद नैनीताल की प्रमुख सामाजिक एवं धार्मिक संस्था अंजुमन इस्लामिया ने भी आरोपी और उसके परिवार के खिलाफ सख्त रुख अपनाया था। संस्था के अध्यक्ष शोएब अहमद ने पत्रकार वार्ता में घोषणा की थी कि आरोपी और उसके परिवार का सामाजिक बहिष्कार किया जाएगा।
संस्था ने स्पष्ट किया था कि आरोपी को किसी भी धार्मिक, सामाजिक या पारिवारिक कार्यक्रम में आमंत्रित नहीं किया जाएगा। इतना ही नहीं, उसके परिवार के मस्जिद में आने पर भी रोक लगाने का फैसला लिया गया था। इस निर्णय को स्थानीय स्तर पर व्यापक समर्थन मिला था।
पॉक्सो और एससी-एसटी एक्ट के तहत दर्ज है मामला
मामले की गंभीरता इस बात से भी स्पष्ट होती है कि आरोपी के खिलाफ केवल पॉक्सो एक्ट ही नहीं बल्कि अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धाराएं भी लगाई गई हैं। दरअसल पीड़ित बच्ची अनुसूचित जाति समुदाय से संबंध रखती है।
6 मई 2025 को हुई सुनवाई के दौरान तत्कालीन नैनीताल एसएसपी प्रह्लाद नारायण मीणा ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हाईकोर्ट को बताया था कि जांच में पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद आरोपी पर पॉक्सो और एससी-एसटी एक्ट दोनों के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।
अब अगली सुनवाई पर टिकी निगाहें
हाईकोर्ट द्वारा ट्रायल कोर्ट से रिपोर्ट तलब किए जाने के बाद अब इस बहुचर्चित मामले में सभी की निगाहें अगली सुनवाई पर टिकी हैं। फिलहाल आरोपी उस्मान खान को जमानत नहीं मिली है और वह न्यायिक हिरासत में ही रहेगा। वहीं पीड़ित परिवार और स्थानीय लोग उम्मीद कर रहे हैं कि मामले का ट्रायल जल्द पूरा होगा और दोषी को कानून के अनुसार कठोर सजा मिलेगी।
