नई दिल्ली/बीजिंग: पड़ोसी देश चीन के सबसे बड़े कोयला उत्पादक क्षेत्र शांक्सी प्रांत से एक बेहद दर्दनाक और वीभत्स खबर सामने आई है। यहां की एक प्रमुख कोयला खदान में हुए भीषण गैस विस्फोट ने पिछले एक दशक की सबसे बड़ी औद्योगिक त्रासदियों में से एक को जन्म दिया है। इस भयावह हादसे में अब तक कम से कम 90 खनिकों (मजदूरों) की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि कई अन्य के अभी भी मलबे और जहरीली गैसों के बीच फंसे होने की आशंका है।
इस अंतरराष्ट्रीय आपदा और मानवीय क्षति पर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गहरा शोक व्यक्त किया है। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट साझा करते हुए चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और वहां के नागरिकों के प्रति अपनी संवेदनाएं प्रकट की हैं। प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में लिखा, ‘चीन के शांक्सी प्रांत में खनन दुर्घटना में लोगों की मौत से अत्यंत दुखी हूं। भारत की जनता की ओर से राष्ट्रपति शी जिनपिंग और चीन के लोगों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं हैं।’ उन्होंने आगे कहा कि इस अत्यंत कठिन और दुखद समय में पीड़ित परिवारों को संबल मिले और जो मजदूर अब भी लापता हैं, उनकी सुरक्षित और शीघ्र बरामदगी सुनिश्चित हो सके।
कैसे हुआ यह भीषण हादसा? भीतर काम कर रहे थे 247 मजदूर
चीनी सरकारी समाचार एजेंसी ‘शिन्हुआ’ के आधिकारिक बुलेटिन के अनुसार, यह प्रलयंकारी हादसा शांक्सी प्रांत के क़िनयुआन काउंटी में स्थित लियुशेन्यू कोयला खदान (Liushunyu Coal Mine) में घटित हुआ। यह क्षेत्र चीन की राजधानी बीजिंग से लगभग 520 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में स्थित है। प्राप्त विवरण के मुताबिक, शुक्रवार की शाम करीब 7:30 बजे खदान के भीतर अचानक एक जोरदार धमाका हुआ, जिसने पूरी सुरंग को हिलाकर रख दिया।
हादसे के वक्त जमीनी स्तर से सैकड़ों फीट नीचे खदान के भीतर कुल 247 मजदूर अपनी शिफ्ट में काम कर रहे थे। शुरुआती तकनीकी जांच में यह बात सामने आई है कि विस्फोट से कुछ समय पहले खदान के सुरक्षा और ऑटोमेशन सिस्टम में हानिकारक ‘कार्बन मोनोऑक्साइड’ गैस का अलर्ट (चेतावनी) जारी हुआ था। लेकिन जब तक प्रबंधन इस चेतावनी पर कोई ठोस कदम उठा पाता या मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकालने की प्रक्रिया शुरू की जाती, तब तक खदान के भीतर गैस के अत्यधिक दबाव के कारण एक भीषण और विनाशकारी विस्फोट हो गया।
मौतों के आंकड़ों में अचानक आया उछाल, कई अधिकारी हिरासत में
विस्फोट के तुरंत बाद स्थानीय प्रशासन को केवल 8 मौतों की जानकारी मिली थी, जिससे लगा था कि स्थिति नियंत्रण में है। लेकिन जैसे-जैसे बचाव दल (Rescue Teams) विशेष सुरक्षा उपकरणों के साथ खदान की गहराई में उतरे, वहां का खौफनाक मंजर देखकर सबके होश उड़ गए। जहरीली गैस और मलबे के कारण दम घुटने से मरने वालों की संख्या अचानक बढ़कर 82 पार हुई और देखते ही देखते यह आधिकारिक आंकड़ा 90 तक पहुंच गया।
इस घोर लापरवाही और सुरक्षा मानकों की अनदेखी को लेकर चीनी सरकार बेहद सख्त रुख अख्तियार किए हुए है। बीजिंग के निर्देश पर स्थानीय पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने त्वरित कार्रवाई करते हुए खदान संचालित करने वाली कंपनी के कई शीर्ष अधिकारियों और सुरक्षा प्रभारियों को हिरासत में ले लिया है। इस घटना को पिछले दस वर्षों में चीन के ऊर्जा क्षेत्र की सबसे घातक और बड़ी कोयला खदान दुर्घटनाओं में से एक माना जा रहा है, जिससे चीनी सुरक्षा तंत्र पर भी बड़े सवाल खड़े हो गए हैं।
राष्ट्रपति शी जिनपिंग और पीएम ली कियांग ने दिए सख्त निर्देश
हादसे की भयावहता को देखते हुए चीन के शीर्ष नेतृत्व ने पूरी कमान अपने हाथों में ले ली है। राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने आपदा प्रबंधन और राहत-बचाव दलों को सीधे निर्देशित किया है कि खदान के भीतर जीवन की तलाश के लिए हर संभव और आधुनिक प्रयास किए जाएं। उन्होंने स्पष्ट किया कि:
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मलबे में दबे आखिरी व्यक्ति तक पहुंचने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन को बिना रुके चलाया जाए।
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इस गंभीर हादसे के लिए जिम्मेदार किसी भी व्यक्ति या अधिकारी को बख्शा नहीं जाएगा और उनके खिलाफ अनुकरणीय कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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चूंकि वर्तमान में क्षेत्र में बारिश का मौसम सक्रिय है, इसलिए खदान के निचले हिस्सों में बाढ़ या पानी भरने की स्थिति को रोकने के लिए तत्काल पुख्ता इंतजाम किए जाएं, ताकि बचाव कार्य में कोई बाधा न आए।
दूसरी ओर, चीन के प्रधानमंत्री ली कियांग ने भी एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाई और राहत कार्यों की गति तेज करने के साथ-साथ इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच के आदेश दिए। पीएम ली कियांग ने कहा कि इस हादसे के लिए जो भी लोग जिम्मेदार पाए जाएंगे, उनकी कड़ी जवाबदेही तय की जाएगी ताकि भविष्य में ऐसे हादसों की पुनरावृत्ति न हो।
शांक्सी प्रांत: चीन का ‘पावरहाउस’ लेकिन हादसों का गढ़
भौगोलिक और आर्थिक दृष्टि से देखा जाए तो शांक्सी प्रांत चीन का सबसे बड़ा और सबसे महत्वपूर्ण कोयला उत्पादक राज्य है। देश की औद्योगिक और घरेलू ऊर्जा आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा इसी सूबे पर निर्भर करता है। लगभग 3.4 करोड़ की आबादी वाले इस प्रांत ने अकेले पिछले वर्ष करीब 1.3 अरब टन कोयले का रिकॉर्ड उत्पादन किया था, जो पूरे चीन के कुल कोयला उत्पादन का लगभग एक-तिहाई (One-Third) हिस्सा है।
उत्पादन के भारी दबाव और मुनाफे की होड़ के कारण सुरक्षा मानकों की अनदेखी यहां नई बात नहीं है। यदि हालिया इतिहास पर नजर डालें, तो शांक्सी प्रांत में लगातार बड़े हादसे होते रहे हैं:
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अप्रैल 2026: लुलियांग क्षेत्र की एक खदान में तकनीकी खराबी के कारण दुर्घटना हुई, जिसमें 4 खनिकों की जान चली गई थी।
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मार्च 2024: झोंगयांग क्षेत्र में एक विशाल कोयला बंकर अचानक ढह गया था, जिसकी चपेट में आने से 7 मजदूरों की दर्दनाक मौत हो गई थी।
इसके अलावा, चीन के अन्य हिस्सों में भी प्राकृतिक आपदाओं और औद्योगिक हादसों का दौर जारी है। हाल ही में हुनान प्रांत में मूसलाधार बारिश और भयंकर बाढ़ के कारण 7 लोगों की मौत हो चुकी है और 14 लोग अभी भी लापता हैं।



