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PoK में बुनियादी हकों की मांग पर खूनी दमन! 32 नागरिकों की मौत से मचा हड़कंप, भारत ने पाकिस्तान को लगाई फटकार

The Hill India News
Last updated: June 9, 2026 11:38 am
The Hill India News
Published: June 9, 2026
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पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में बुनियादी अधिकारों और बेहतर जीवन सुविधाओं की मांग कर रहे लोगों पर कथित दमन की खबरों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है। स्थानीय संगठनों और आंदोलनकारियों के अनुसार, विरोध प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षा बलों की कार्रवाई में अब तक 32 नागरिकों की मौत हो चुकी है, जबकि बड़ी संख्या में लोग घायल बताए जा रहे हैं। इस घटनाक्रम के बाद भारत ने भी पाकिस्तान को कड़ी फटकार लगाते हुए मानवाधिकार उल्लंघनों पर जवाबदेह ठहराने की मांग की है।

Contents
विरोध प्रदर्शनों की जड़ में क्या है?JAAC पर प्रतिबंध और बढ़ा तनावगोलीबारी और मौतों से बढ़ा आक्रोशभारत की कड़ी प्रतिक्रियाअंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर

विरोध प्रदर्शनों की जड़ में क्या है?

पिछले कई महीनों से PoK के विभिन्न इलाकों में लोग महंगाई, बेरोजगारी, बिजली संकट, प्राकृतिक संसाधनों पर स्थानीय लोगों के अधिकार और राजनीतिक स्वतंत्रता जैसे मुद्दों को लेकर आवाज उठा रहे थे। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पाकिस्तान सरकार इस क्षेत्र के संसाधनों का उपयोग तो करती है, लेकिन स्थानीय जनता को उसका उचित लाभ नहीं मिलता।

इन मांगों को लेकर जम्मू-कश्मीर संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) लंबे समय से आंदोलन चला रही थी। संगठन का कहना है कि वह केवल जनता के लोकतांत्रिक और आर्थिक अधिकारों की बात कर रहा था, लेकिन पाकिस्तान सरकार ने उसकी गतिविधियों को दबाने का रास्ता चुना।

JAAC पर प्रतिबंध और बढ़ा तनाव

स्थिति तब और अधिक तनावपूर्ण हो गई जब प्रशासन ने JAAC से जुड़े कार्यकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी। आंदोलनकारियों का दावा है कि संगठन को प्रतिबंधित कर दिया गया और उसके कई नेताओं व कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया। इसके साथ ही 9 जून को प्रस्तावित ‘लॉन्ग मार्च’ को रोकने के लिए व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए गए।

आंदोलन से जुड़े नेताओं का आरोप है कि 5 जून की रात से ही कई क्षेत्रों में इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गईं। संचार व्यवस्था प्रभावित होने के कारण लोगों को एक-दूसरे से संपर्क करने और घटनाओं की जानकारी साझा करने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।

गोलीबारी और मौतों से बढ़ा आक्रोश

प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि शांतिपूर्ण विरोध कर रहे नागरिकों पर सुरक्षा बलों ने बल प्रयोग किया, जिसके परिणामस्वरूप कई लोगों की जान चली गई। स्थानीय स्तर पर सामने आ रही रिपोर्टों में महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों के भी प्रभावित होने की बात कही जा रही है। इन घटनाओं ने पूरे क्षेत्र में गुस्से का माहौल पैदा कर दिया है।

मानवाधिकार संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी घटनाओं की स्वतंत्र जांच की मांग उठाई है। उनका कहना है कि यदि नागरिक अपनी बुनियादी जरूरतों और अधिकारों की मांग कर रहे हैं, तो उनके खिलाफ हिंसक कार्रवाई लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है।

भारत की कड़ी प्रतिक्रिया

भारत के विदेश मंत्रालय ने इस पूरे मामले पर चिंता व्यक्त करते हुए पाकिस्तान की आलोचना की है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि पाकिस्तान अपनी आंतरिक विफलताओं और मानवाधिकार उल्लंघनों से ध्यान भटकाने के लिए फर्जी खबरों और प्रचार का सहारा ले रहा है।

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में पुलिस की बर्बरता और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हिंसा की खबरें बेहद चिंताजनक हैं। भारत ने उम्मीद जताई कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस मामले को गंभीरता से लेगा और पाकिस्तान को उसके कथित अत्याचारों के लिए जवाबदेह ठहराएगा।

अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर

PoK में बढ़ते असंतोष और हिंसा की घटनाओं ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान भी आकर्षित किया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि क्षेत्र में जनता की शिकायतों का समाधान नहीं किया गया तो हालात और बिगड़ सकते हैं। फिलहाल PoK में तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है और लोगों के बीच भविष्य को लेकर अनिश्चितता का माहौल है। मानवाधिकारों, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक अधिकारों को लेकर उठ रहे सवाल पाकिस्तान सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बनते जा रहे हैं।

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