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चंद्रपुर महाराष्ट्रा में बाघ का तांडव: गुंजेवाही के जंगलों में तेंदूपत्ता तोड़ रही 4 महिलाओं को बाघ ने उतारा मौत के घाट

चंद्रपुर: महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र में स्थित चंद्रपुर जिला एक बार फिर भीषण और रक्तरंजित मानव-वन्यजीव संघर्ष (Man-Animal Conflict) का गवाह बना है। जिले के सिंदेवाही तहसील के अंतर्गत आने वाले गुंजेवाही वन क्षेत्र में शुक्रवार की सुबह एक बेहद दिल दहला देने वाला वाकया सामने आया। यहाँ जंगल में तेंदूपत्ता इकट्ठा करने गई सात महिलाओं के एक समूह पर घात लगाकर बैठे एक आदमखोर बाघ ने अचानक जानलेवा हमला कर दिया। इस भीषण चंद्रपुर बाघ हमला में चार गरीब महिलाओं की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई, जबकि तीन अन्य महिलाओं ने किसी तरह भागकर अपनी जान बचाई।

इस सनसनीखेज और दुखद घटना के बाद से पूरे सिंदेवाही और ब्रह्मपुरी वन प्रभाग में दहशत का माहौल है। वहीं, अपनों को खो चुके और लगातार खौफ के साए में जी रहे ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा है। उग्र ग्रामीणों ने वन विभाग की कथित निष्क्रियता और लचर सुरक्षा व्यवस्था के खिलाफ तीखा आक्रोश व्यक्त करते हुए प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की।

सुबह का वो खौफनाक मंजर: जब जंगल में गूंजी बाघ की दहाड़

स्थानीय सूत्रों और चश्मदीद महिलाओं से मिली जानकारी के अनुसार, गुंजेवाही गांव की सात महिलाएं रोजाना की तरह अपनी आजीविका के लिए शुक्रवार सुबह करीब 6 से 7 बजे के बीच गांव से सटे सिंदेवाही रेंज के जंगल में तेंदूपत्ता तोड़ने के लिए दाखिल हुई थीं। महिलाएं अभी काम में जुटी ही थीं कि अचानक घनी झाड़ियों के पीछे से बाघ की रोंगटे खड़े कर देने वाली दहाड़ गूंजी।

खतरे का अंदाजा होते ही तीन महिलाएं चीखते हुए उल्टे पैर गांव की तरफ भागने में सफल रहीं। लेकिन दुर्भाग्यवश, बाकी की चार महिलाओं को संभलने का मौका भी नहीं मिला। भारी भरकम बाघ ने बिजली की तेजी से उन पर हमला कर दिया और उन्हें मौत की नींद सुला दिया।

मृतक महिलाओं की हुई पहचान:

वन विभाग और पुलिस प्रशासन ने काफी मशक्कत के बाद घटनास्थल से चारों शवों को बरामद कर उनकी शिनाख्त की। मृतिकाएं एक ही गांव की रहने वाली थीं:

  1. कवड़ाबाई दादाजी मोहुर्ले (उम्र 45 वर्ष)

  2. अनीताबाई दादाजी मोहुर्ले (उम्र 40 वर्ष)

  3. सुनीता कौशिक मोहुर्ले (उम्र 38 वर्ष)

  4. संगीता संतोष चौधरी (उम्र 50 वर्ष)

हादसे ने उजाड़ दिए आशियाने: अनाथ हुईं दो बच्चियां, किसी का पति तो किसी का भाई अपाहिज

इस भयानक चंद्रपुर बाघ हमला ने न केवल चार जिंदगियां ली हैं, बल्कि कई हंसते-खेलते गरीब परिवारों को पूरी तरह तबाह कर दिया है। मृतकों की पारिवारिक पृष्ठभूमि इतनी दयनीय है कि उनकी मौत के बाद अब पीछे छूटे सदस्यों के सामने भूखों मरने की नौबत आ गई है।

  • दो मासूमों के सिर से उठा साया: मृतका सुनीता मोहुर्ले के पति का दो साल पहले ही देहांत हो चुका था। वह दिन-रात मजदूरी करके अपनी दो छोटी बेटियों (एक 10 वर्ष और दूसरी 7 वर्ष) का पेट पाल रही थीं। मां की इस असमय मौत के बाद दोनों बच्चियां पूरी तरह अनाथ हो चुकी हैं और उनके भविष्य पर अंधकार छा गया है।

  • एक ही घर की दो सगी बहनें खत्म: कवड़ाबाई और अनीताबाई दोनों सगी बहनें थीं और अपने घर की मुख्य कमाऊ सदस्य थीं। उनका एक भाई है जो पूरी तरह विकलांग है और वृद्ध मां लंबे समय से गंभीर रूप से बीमार हैं। इन दोनों बहनों के जाने से इस परिवार का सहारा पूरी तरह छिन गया है।

  • अपाहिज पति के सामने रोजी-रोटी का संकट: चौथी मृत महिला संगीता चौधरी के पति भी अपाहिज हैं और चलने-फिरने में असमर्थ हैं। घर का खर्च संगीता ही चलाती थीं, लेकिन अब उनके जाने के बाद इस परिवार के सामने रोजी-रोटी का बड़ा संकट खड़ा हो गया है।

मौत का गढ़ बनता चंद्रपुर: आंकड़ों ने बढ़ाई वन विभाग की चिंता

चंद्रपुर जिले में बाघों की बढ़ती संख्या और उनके प्राकृतिक आवास (Habitats) के सिकुड़ने के कारण मानव-वन्यजीव संघर्ष अब बेकाबू होता जा रहा है। अगर सरकारी और स्थानीय आंकड़ों पर नजर डालें तो स्थिति बेहद भयावह नजर आती है।

“पिछले वर्ष यानी 2025 में अकेले चंद्रपुर जिले में बाघ और तेंदुओं के हमलों में 50 से अधिक नागरिकों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी। वहीं, मौजूदा साल 2026 में अब तक (यानी पिछले 5 महीनों के भीतर) यह आंकड़ा 19 मौतों तक पहुंच चुका है। यह आंकड़े साफ करते हैं कि इलाके में इंसानों और वन्यजीवों के बीच का सह-अस्तित्व अब बेहद खतरनाक मोड़ पर आ गया है।”

चंद्रपुर जिले में मानव-वन्यजीव संघर्ष की भयावह स्थिति (एक नजर में)

समयावधि / वर्ष बाघ के हमलों में दर्ज मौतें मुख्य प्रभावित क्षेत्र वन्यजीवों के हमले का कारण
वर्ष 2025 (पूरा वर्ष) 50 से अधिक मौतें ब्रह्मपुरी, सिंदेवाही, ताडोबा बफर जोन जलाऊ लकड़ी और तेंदूपत्ता संग्रहण
वर्ष 2026 (अब तक) 19 मौतें (ताजा घटना सहित) सिंदेवाही रेंज, चंद्रपुर डिवीजन घने जंगलों में ग्रामीणों का प्रवेश

सख्त पहरा और रेस्क्यू ऑपरेशन: वन विभाग ने झोंकी ताकत

घटना की गंभीरता को देखते हुए वन विभाग के आला अधिकारियों और पुलिस बल ने भारी तनाव के बीच मौके पर पहुंचकर स्थिति को संभाला। आक्रोशित ग्रामीणों को शांत करने के लिए आर्थिक मुआवजे और बाघ को जल्द से जल्द पकड़ने का आश्वासन दिया गया। इसके बाद शवों को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेजा गया।

सिंदेवाही रेंज की वन परिक्षेत्र अधिकारी (RFO) अंजलि सायंकार ने इस पूरे मामले और विभाग की तैयारियों की जानकारी देते हुए बताया:

“वन विभाग लगातार सीमावर्ती गांवों में जन-जागरूकता अभियान चला रहा है। इन महिलाओं को भी कई बार घने और संवेदनशील जंगली इलाकों में न जाने की हिदायत दी गई थी। विभाग की ओर से तेंदूपत्ता संग्राहकों को सुरक्षा के लिए विशेष सीटी (Whistles) और सिर के पीछे पहनने वाले इंसानी चेहरे के मुखौटे (Masks) भी बांटे गए हैं, ताकि बाघ पीछे से हमला न करे।”

आरएफओ सायंकार ने आगे बताया कि हमलावर बाघ को पकड़ने के लिए गुंजेवाही के जंगलों में 10 अत्याधुनिक कैमरे लगाए गए हैं, जिनमें 4 लाइव ट्रैकिंग कैमरे शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, बाघ को रिझाने और पकड़ने के लिए क्षेत्र में 4 मजबूत पिंजरे (Cages) लगाए गए हैं और वन्यजीव विशेषज्ञों की 3 टीमें लगातार 24 घंटे गश्त कर रही हैं। विभाग का दावा है कि इस संदिग्ध आदमखोर बाघ को जल्द ही ट्रेंकुलाइज (Behosh) कर पिंजरे में कैद कर लिया जाएगा।

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