फीचर्डविदेश

ईरान युद्ध पर ट्रंप को अपनी ही पार्टी से झटका, अमेरिकी सीनेट में बगावत ने बढ़ाई मुश्किलें

अमेरिका की राजनीति में उस समय बड़ा भूचाल आ गया, जब ईरान युद्ध को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को उनकी अपनी ही पार्टी के नेताओं ने खुली चुनौती दे दी। अमेरिकी सीनेट में हुई अहम वोटिंग में चार रिपब्लिकन सांसदों ने पार्टी लाइन से हटकर ट्रंप के खिलाफ मतदान किया। इस घटनाक्रम को ट्रंप के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है, क्योंकि अब तक ईरान के खिलाफ उनकी सख्त नीति को रिपब्लिकन पार्टी का मजबूत समर्थन मिलता रहा था। लेकिन अब उनकी ही पार्टी के कई नेता यह सवाल उठाने लगे हैं कि क्या राष्ट्रपति अपने अधिकारों का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल कर रहे हैं।

दरअसल अमेरिकी सीनेट में वॉर पावर्स एक्ट के तहत एक प्रस्ताव पेश किया गया था। इस प्रस्ताव का उद्देश्य राष्ट्रपति की युद्ध संबंधी शक्तियों को सीमित करना है। सीनेट में यह प्रस्ताव 50-47 मतों से पारित हो गया। सबसे खास बात यह रही कि चार रिपब्लिकन सांसदों ने विपक्षी डेमोक्रेट्स के साथ मिलकर ट्रंप के खिलाफ वोट किया। वहीं तीन रिपब्लिकन सांसद वोटिंग में शामिल ही नहीं हुए। इस वोटिंग के बाद वॉशिंगटन की राजनीति में हलचल तेज हो गई है और माना जा रहा है कि ट्रंप को अब अपनी ही पार्टी के भीतर विरोध का सामना करना पड़ सकता है।

ट्रंप के खिलाफ मतदान करने वालों में केंटकी के सीनेटर रैंड पॉल, मेन की सीनेटर सुसान कॉलिन्स, अलास्का की सीनेटर लिसा मर्कोव्स्की और लुइसियाना के सीनेटर बिल कैसिडी शामिल रहे। हालांकि इस दौरान पेंसिल्वेनिया के डेमोक्रेट सीनेटर जॉन फेटरमैन ने प्रस्ताव के खिलाफ मतदान किया। इस तरह दोनों दलों के कुछ सांसदों ने अपनी पार्टी से अलग रुख अपनाकर अमेरिकी राजनीति को और दिलचस्प बना दिया।

ईरान युद्ध पिछले 81 दिनों से जारी है और इस दौरान हजारों लोगों की जान जा चुकी है। युद्ध की वजह से अरबों डॉलर का आर्थिक नुकसान हुआ है और वैश्विक तेल आपूर्ति पर भी गंभीर असर पड़ा है। खासतौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। अमेरिका की नौसेना फिलहाल ईरानी जहाजों की नाकेबंदी में तैनात है और मध्य पूर्व में हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं।

डेमोक्रेट नेताओं और युद्ध के आलोचकों का कहना है कि ट्रंप प्रशासन ने कांग्रेस की मंजूरी के बिना सेना को लंबे समय तक तैनात रखकर संविधान की भावना का उल्लंघन किया है। अमेरिकी वॉर पावर्स एक्ट के अनुसार कोई भी राष्ट्रपति कांग्रेस की अनुमति के बिना 60 दिनों से ज्यादा समय तक सेना को युद्ध में शामिल नहीं रख सकता। आलोचकों का दावा है कि यह समय सीमा 1 मई को समाप्त हो चुकी थी, इसलिए अब राष्ट्रपति के पास सैन्य कार्रवाई जारी रखने का संवैधानिक आधार कमजोर पड़ता जा रहा है।

हालांकि व्हाइट हाउस इस दावे को पूरी तरह खारिज कर रहा है। प्रशासन का कहना है कि 8 अप्रैल को युद्धविराम की घोषणा के बाद वॉर पावर्स एक्ट की समय सीमा रुक गई थी। इस तर्क के अनुसार ट्रंप प्रशासन के पास अभी कम से कम 40 दिन और हैं, जिनके दौरान राष्ट्रपति अकेले फैसला लेकर सैन्य कार्रवाई जारी रख सकते हैं। लेकिन विपक्ष इस दलील को मानने के लिए तैयार नहीं है और लगातार सरकार पर हमला बोल रहा है।

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि सीनेट में हुई यह वोटिंग भले ही तुरंत ट्रंप की सैन्य शक्तियों को खत्म नहीं करेगी, लेकिन इससे उनकी राजनीतिक स्थिति पर बड़ा सवाल जरूर खड़ा हो गया है। यह पहली बार है जब रिपब्लिकन पार्टी के कई नेता इतने खुले तौर पर ट्रंप के खिलाफ दिखाई दिए हैं। इससे यह संकेत भी मिल रहा है कि युद्ध लंबा खिंचने, बढ़ते आर्थिक बोझ और अंतरराष्ट्रीय दबाव के कारण अब रिपब्लिकन सांसदों के भीतर भी असंतोष बढ़ने लगा है।

हालांकि ट्रंप की शक्तियों को पूरी तरह सीमित करने के लिए डेमोक्रेट्स को अभी लंबी राजनीतिक लड़ाई लड़नी होगी। वॉर पावर्स एक्ट को पूरी तरह लागू करने के लिए इस प्रस्ताव को अमेरिकी सीनेट और प्रतिनिधि सभा दोनों में दो-तिहाई बहुमत से पारित कराना जरूरी होगा। फिलहाल यह आसान नहीं माना जा रहा है, क्योंकि दोनों सदनों में रिपब्लिकन पार्टी को हल्की बढ़त हासिल है।

प्रतिनिधि सभा में रिपब्लिकन पार्टी के पास 217 सीटें हैं जबकि डेमोक्रेट्स के पास 212 सीटें हैं। वहीं सीनेट में रिपब्लिकन के पास 53 सीटें और डेमोक्रेट्स के पास 45 सीटें हैं। दो निर्दलीय सीनेटर आमतौर पर डेमोक्रेट्स का समर्थन करते हैं। ऐसे में ट्रंप विरोधी खेमे को दो-तिहाई बहुमत जुटाने के लिए बड़ी संख्या में रिपब्लिकन सांसदों का समर्थन चाहिए होगा, जो फिलहाल मुश्किल दिखाई देता है।

इसके बावजूद अमेरिकी राजनीति में यह घटनाक्रम बेहद अहम माना जा रहा है। ईरान युद्ध को लेकर ट्रंप की रणनीति अब केवल अंतरराष्ट्रीय मुद्दा नहीं रह गई है, बल्कि यह अमेरिका की आंतरिक राजनीति का बड़ा विषय बन चुकी है। आने वाले दिनों में यदि युद्ध और लंबा खिंचता है या आर्थिक संकट और गहराता है, तो ट्रंप के लिए अपनी ही पार्टी को एकजुट रखना बड़ी चुनौती बन सकता है। वहीं डेमोक्रेट्स इस मुद्दे को आगामी चुनावों में बड़ा हथियार बनाने की तैयारी में हैं।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button