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ट्विशा शर्मा मौत मामला: पोस्टमार्टम रिपोर्ट में ड्रग्स का जिक्र नहीं, भोपाल पुलिस कमिश्नर ने ससुराल पक्ष के दावों पर उठाए सवाल

भोपाल में चर्चित ट्विशा शर्मा मौत मामला लगातार सुर्खियों में बना हुआ है। यह मामला अब सिर्फ एक संदिग्ध आत्महत्या या हत्या की जांच तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसमें पुलिस कार्रवाई, पोस्टमार्टम प्रक्रिया और ससुराल पक्ष के दावों को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इस बीच भोपाल पुलिस कमिश्नर संजय कुमार ने NDTV से बातचीत में कई अहम खुलासे किए हैं, जिनसे मामले ने नया मोड़ ले लिया है।

पुलिस कमिश्नर ने स्पष्ट कहा है कि अब तक की जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट में ऐसा कोई तथ्य सामने नहीं आया है जिससे यह साबित हो कि ट्विशा शर्मा ड्रग्स लेती थीं। यह बयान इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि ट्विशा की सास और सेवानिवृत्त न्यायाधीश गिरिबाला सिंह ने दावा किया था कि ट्विशा नशे की आदी थीं और मानसिक बीमारी की दवाइयां ले रही थीं। अब पुलिस कमिश्नर के बयान ने इन दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

आत्महत्या या हत्या? जांच अभी जारी

ट्विशा शर्मा की मौत के बाद से ही परिवार और ससुराल पक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। ट्विशा के मायके पक्ष का आरोप है कि यह आत्महत्या नहीं बल्कि हत्या का मामला है। वहीं पुलिस की प्रारंभिक जांच इसे आत्महत्या की दिशा में देख रही है।

भोपाल पुलिस कमिश्नर संजय कुमार ने कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और शुरुआती जांच के आधार पर मामला फांसी लगाकर आत्महत्या का प्रतीत होता है। उन्होंने कहा कि फिलहाल ऐसा कोई साक्ष्य नहीं मिला है जिससे हत्या की पुष्टि हो सके। हालांकि उन्होंने यह भी साफ किया कि जांच अभी पूरी नहीं हुई है और हर पहलू को गंभीरता से परखा जा रहा है।

पुलिस कमिश्नर के अनुसार, “पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आ चुकी है और हमारी टीम लगातार कई लोगों से पूछताछ कर रही है। अभी तक के तथ्यों के आधार पर मामला आत्महत्या का लग रहा है, लेकिन हम सभी एंगल से जांच कर रहे हैं। दहेज प्रताड़ना के आरोपों की भी गंभीरता से जांच की जा रही है।”

दहेज प्रताड़ना के आरोपों की भी जांच

ट्विशा शर्मा के परिवार ने ससुराल वालों पर दहेज प्रताड़ना के गंभीर आरोप लगाए हैं। परिवार का कहना है कि ट्विशा को मानसिक रूप से परेशान किया जाता था और इसी कारण उसकी मौत हुई। पुलिस कमिश्नर ने माना कि दहेज से जुड़े मामलों की जांच में समय लगता है क्योंकि इसमें कई परिस्थितियों और सबूतों को विस्तार से जांचना पड़ता है।

उन्होंने कहा कि पुलिस पर जांच में देरी करने के आरोप लगाए जा रहे हैं, लेकिन ऐसा नहीं है। पुलिस कानूनी प्रक्रिया के अनुसार आगे बढ़ रही है और जल्दबाजी में किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा। अधिकारियों के मुताबिक, मोबाइल रिकॉर्ड, परिवार के बयान, कॉल डिटेल और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की भी जांच की जा रही है।

दूसरे पोस्टमार्टम की मांग पर क्या बोली पुलिस?

ट्विशा शर्मा का परिवार लगातार दूसरे पोस्टमार्टम की मांग कर रहा है। परिवार का कहना है कि पहले पोस्टमार्टम में कई महत्वपूर्ण पहलुओं को नजरअंदाज किया गया है। इस पर भोपाल पुलिस कमिश्नर ने कहा कि पुलिस स्वयं दूसरे पोस्टमार्टम की अनुमति नहीं दे सकती।

उन्होंने स्पष्ट किया कि दूसरा पोस्टमार्टम कराने की अनुमति केवल अदालत दे सकती है। अगर अदालत अनुमति देती है तो पुलिस को इस पर कोई आपत्ति नहीं होगी। संजय कुमार ने कहा, “यदि परिवार दूसरा पोस्टमार्टम चाहता है तो वह अदालत का रुख कर सकता है। कोर्ट अनुमति देता है तो निश्चित रूप से दोबारा पोस्टमार्टम कराया जाएगा।”

इस बयान के बाद यह साफ हो गया है कि अब मामले में अदालत की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। परिवार जल्द ही कोर्ट में याचिका दायर कर सकता है।

बेल्ट को लेकर पुलिस ने मानी चूक

मामले में सबसे बड़ा सवाल उस बेल्ट को लेकर उठ रहा है जिससे कथित तौर पर ट्विशा ने फांसी लगाई थी। आरोप है कि पोस्टमार्टम के दौरान वह बेल्ट अस्पताल में मौजूद नहीं थी। इस पर पुलिस कमिश्नर ने माना कि यह पुलिस टीम की बड़ी लापरवाही थी।

उन्होंने कहा कि बेल्ट को फॉरेंसिक साइंस लैब यानी एफएसएल टीम ने जब्त कर लिया था, लेकिन उसे पोस्टमार्टम के समय अस्पताल नहीं भेजा गया। पुलिस कमिश्नर ने स्वीकार किया कि यह एक महत्वपूर्ण सबूत था जिसे पोस्टमार्टम के दौरान मौजूद होना चाहिए था।

संजय कुमार ने कहा, “हम इसे अपनी टीम की चूक मानते हैं। यह बेहद महत्वपूर्ण सबूत था। इसे पोस्टमार्टम के समय भेजा जाना चाहिए था। ऐसा क्यों नहीं हुआ, इसकी भी जांच की जा रही है।”

पुलिस की इस स्वीकारोक्ति के बाद जांच प्रक्रिया पर सवाल और तेज हो गए हैं। सोशल मीडिया पर भी लोग इस मामले में पुलिस की भूमिका पर सवाल उठा रहे हैं।

ड्रग्स लेने के दावे को पुलिस ने नकारा

ट्विशा की सास गिरिबाला सिंह ने दावा किया था कि ट्विशा मानसिक बीमारी से पीड़ित थीं और नशा भी करती थीं। लेकिन पुलिस कमिश्नर ने इन दावों को फिलहाल खारिज कर दिया है।

उन्होंने कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में नशीले पदार्थों के सेवन का कोई जिक्र नहीं है। पुलिस जांच में भी ऐसा कोई तथ्य सामने नहीं आया है जिससे यह साबित हो सके कि ट्विशा ड्रग्स लेती थीं।

यह बयान इसलिए बेहद अहम माना जा रहा है क्योंकि अब तक ससुराल पक्ष लगातार ट्विशा की मानसिक स्थिति और कथित नशे की आदतों को मौत की वजह बताने की कोशिश कर रहा था। पुलिस के बयान ने इस नैरेटिव को कमजोर कर दिया है।

मामला बना हाई-प्रोफाइल

ट्विशा शर्मा मौत मामला अब भोपाल का हाई-प्रोफाइल केस बन चुका है। सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक और कानूनी हलकों तक इस मामले की चर्चा हो रही है। एक ओर परिवार न्याय की मांग कर रहा है तो दूसरी ओर पुलिस पर निष्पक्ष जांच का दबाव बढ़ता जा रहा है।

अब सभी की नजर आगे आने वाली फॉरेंसिक रिपोर्ट, अदालत की संभावित सुनवाई और पुलिस की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है। यह मामला आने वाले दिनों में और अधिक संवेदनशील और चर्चित हो सकता है, क्योंकि हर नए खुलासे के साथ सवाल भी लगातार बढ़ते जा रहे हैं।

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