By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
The Hill IndiaThe Hill IndiaThe Hill India
Notification Show More
Font ResizerAa
  • होम
  • फीचर्ड
  • उत्तराखंड
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • पर्यावरण
  • क्राइम
  • पर्यटन
  • शिक्षा
  • स्वास्थय
  • सामाजिक
  • स्पोर्ट्स
  • वीडियो
  • Contact Us
Reading: BHU के सवाल पर मचा संग्राम: ‘ब्राह्मणवादी पितृसत्ता’ वाले प्रश्न ने छेड़ी नई बहस, शंकराचार्य से लेकर छात्रों तक विरोध तेज
Share
Font ResizerAa
The Hill IndiaThe Hill India
  • होम
  • फीचर्ड
  • उत्तराखंड
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • पर्यावरण
  • क्राइम
  • पर्यटन
  • शिक्षा
  • स्वास्थय
  • सामाजिक
  • स्पोर्ट्स
  • वीडियो
  • Contact Us
Search
  • होम
  • फीचर्ड
  • उत्तराखंड
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • पर्यावरण
  • क्राइम
  • पर्यटन
  • शिक्षा
  • स्वास्थय
  • सामाजिक
  • स्पोर्ट्स
  • वीडियो
  • Contact Us
Have an existing account? Sign In
Follow US
The Hill India > Blog > उत्तर प्रदेश > BHU के सवाल पर मचा संग्राम: ‘ब्राह्मणवादी पितृसत्ता’ वाले प्रश्न ने छेड़ी नई बहस, शंकराचार्य से लेकर छात्रों तक विरोध तेज
उत्तर प्रदेशफीचर्ड

BHU के सवाल पर मचा संग्राम: ‘ब्राह्मणवादी पितृसत्ता’ वाले प्रश्न ने छेड़ी नई बहस, शंकराचार्य से लेकर छात्रों तक विरोध तेज

The Hill India News
Last updated: May 20, 2026 4:06 am
The Hill India News
Published: May 20, 2026
Share
SHARE

उत्तर प्रदेश में एक बार फिर ‘ब्राह्मण’ शब्द को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। इस बार विवाद की वजह बना है बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के एमए इतिहास विभाग की परीक्षा में पूछा गया एक सवाल। प्रश्न पत्र में छात्रों से पूछा गया कि “ब्राह्मणवादी पितृसत्ता ने प्राचीन भारत में महिलाओं की प्रगति को कैसे बाधित किया?” जैसे ही यह प्रश्न सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, वैसे ही राजनीतिक, धार्मिक और शैक्षणिक हलकों में तीखी बहस शुरू हो गई।

वाराणसी स्थित बीएचयू के इतिहास विभाग की परीक्षा में पूछे गए इस प्रश्न को लेकर छात्र, शिक्षक, धार्मिक संगठनों और कई सामाजिक संगठनों ने आपत्ति जताई है। विरोध करने वालों का कहना है कि इस तरह का प्रश्न एक विशेष समुदाय को निशाना बनाने जैसा प्रतीत होता है और इससे सामाजिक तनाव बढ़ सकता है। वहीं कुछ लोग इसे अकादमिक विमर्श और इतिहास की वैचारिक व्याख्या का हिस्सा बता रहे हैं।

बीएचयू के कई छात्रों ने प्रश्न की भाषा को आपत्तिजनक बताते हुए कहा कि विश्वविद्यालय को ऐसे संवेदनशील विषयों पर संतुलित दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। छात्रों का कहना है कि किसी भी जाति या वर्ग विशेष को नकारात्मक रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं है। सोशल मीडिया पर भी यह मुद्दा तेजी से ट्रेंड करने लगा, जहां बड़ी संख्या में लोगों ने प्रश्न को लेकर नाराजगी जाहिर की।

ज्योतिष विभाग के प्रोफेसर सुभाष पांडे ने इस प्रश्न पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह सवाल पूरी तरह निराधार है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह के प्रश्न तैयार करने वाले लोग वामपंथी विचारधारा से प्रभावित हैं और वे समाज में वैचारिक विभाजन पैदा करना चाहते हैं। उनका कहना था कि शिक्षा संस्थानों को किसी भी वर्ग विशेष के खिलाफ माहौल बनाने का माध्यम नहीं बनना चाहिए।

विवाद बढ़ने के बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने भी इस मुद्दे पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि हिंदू समाज को जातियों के आधार पर बांटने का प्रयास किया जा रहा है। शंकराचार्य ने कहा कि ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र सभी हिंदू समाज के अभिन्न अंग हैं और उन्हें आपस में लड़ाने की कोशिश गलत है। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक लाभ के लिए समाज में विभाजन की राजनीति की जा रही है।

काशी विद्वत परिषद ने भी इस प्रश्न पर सवाल उठाए हैं। परिषद के मंत्री और बीएचयू के प्रोफेसर विनय पांडे ने कहा कि इस प्रकार के प्रश्न का आधार स्पष्ट नहीं है और विश्वविद्यालय की परंपरा ऐसे विवादित प्रश्नों के पक्ष में नहीं रही है। उन्होंने कहा कि बीएचयू की पहचान भारतीय संस्कृति और समावेशी शिक्षा के लिए रही है, इसलिए प्रश्नपत्र तैयार करते समय अधिक सावधानी बरती जानी चाहिए।

इस विवाद के बीच बीएचयू इतिहास विभाग की प्रोफेसर अनुराधा सिंह ने भी कहा कि यह स्पष्ट नहीं है कि प्रश्न किस ऐतिहासिक कालखंड को ध्यान में रखकर तैयार किया गया था। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि इस प्रकार के सवालों से अनावश्यक विवाद पैदा होते हैं और वह व्यक्तिगत रूप से इस प्रश्न के पक्ष में नहीं हैं।

विश्वविद्यालय प्रशासन भी अब सवालों के घेरे में आ गया है। जब कुलपति प्रोफेसर अजित चतुर्वेदी से इस मामले में प्रतिक्रिया मांगी गई तो उन्होंने सीधे तौर पर कुछ भी कहने से बचते हुए कहा कि इस विषय पर बाद में बात की जाएगी। कुलपति की इस प्रतिक्रिया के बाद यह चर्चा और तेज हो गई कि आखिर विश्वविद्यालय प्रशासन इस विवाद को किस तरह संभालेगा।

यह पहला मौका नहीं है जब उत्तर प्रदेश में ‘ब्राह्मण’ शब्द को लेकर विवाद सामने आया हो। इससे पहले भी कई घटनाएं राजनीतिक और सामाजिक बहस का कारण बन चुकी हैं। हाल ही में समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता राजकुमार भाटी के एक बयान पर बड़ा विवाद हुआ था, जिसमें उन्होंने ब्राह्मण समाज के लिए आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया था। उस बयान के बाद प्रदेशभर में विरोध प्रदर्शन हुए थे।

इसी तरह नेटफ्लिक्स की एक प्रस्तावित फिल्म और वेब सीरीज के शीर्षक को लेकर भी बड़ा विवाद खड़ा हो गया था। कई संगठनों ने आरोप लगाया था कि उस कंटेंट में ब्राह्मण समाज की भावनाओं को आहत किया गया है। इसके अलावा यूजीसी द्वारा शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव रोकने के लिए बनाए गए नए नियमों पर भी कुछ सवर्ण संगठनों ने आपत्ति जताई थी। उनका कहना था कि इन नियमों का दुरुपयोग कर सामान्य वर्ग के लोगों को झूठे मामलों में फंसाया जा सकता है।

बीएचयू के छात्र अभिनव शंकर पांडे ने कहा कि अब यह मामला केवल एक परीक्षा प्रश्न तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह अकादमिक स्वतंत्रता, इतिहास की व्याख्या और सामाजिक संवेदनशीलता के बीच संतुलन की बहस बन चुका है। उनका कहना है कि छात्रों के बीच इस तरह के सिलेबस को लेकर नाराजगी बढ़ रही है और विश्वविद्यालय को इस विषय पर स्पष्ट नीति बनानी चाहिए।

शिक्षाविदों का मानना है कि इतिहास और समाजशास्त्र जैसे विषयों में कई बार ऐसे प्रश्न पूछे जाते हैं जो बहस और विश्लेषण को बढ़ावा देते हैं। लेकिन जब प्रश्नों की भाषा किसी विशेष वर्ग या समुदाय को सीधे तौर पर लक्षित करती हुई प्रतीत हो, तब विवाद खड़ा होना स्वाभाविक है। यही वजह है कि अब यह मुद्दा केवल बीएचयू तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया है।

फिलहाल विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है, लेकिन जिस तरह यह विवाद बढ़ता जा रहा है, उससे आने वाले दिनों में इस पर और राजनीतिक तथा सामाजिक प्रतिक्रियाएं देखने को मिल सकती हैं। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि बीएचयू प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है और क्या भविष्य में प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया में कोई बदलाव किया जाएगा।

You Might Also Like

UP से इन 5 नेताओं को PMO से आया कॉल, शाम तक ले सकते हैं मंत्री पद की शपथ
NEET UG MBBS फर्जी सर्टिफिकेट केस: 45 लाख की डील से खुला बड़े नेटवर्क का राज, दो आरोपी गिरफ्तार; अब दागदार रिकॉर्ड वाले लेखपाल भी जांच के घेरे में
इंदौर वाटर ट्रेजेडी: ‘स्वच्छता के सिरमौर’ पर सिस्टम की कालिख!, हादसे के पीछे फाइलों में दबी थी ‘हत्या की पटकथा’
16 करोड़ का पुल, 16 दिन का भरोसा! पहली ही मूसलाधार बारिश में धंसा नंदा की चौकी का नया पुल, निर्माण गुणवत्ता पर उठे बड़े सवाल
Delhi-NCR में सांसें फिर हुई मुश्किल: हवा में जहर, सरकार 29 अक्टूबर से कराएगी कृत्रिम बारिश
TAGGED:BHU ControversyBHU ExamBrahminical PatriarchyHistory Paper ControversyShankaracharyaStudent Protest
Share This Article
Facebook Email Print
Leave a Comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Follow US

Find US on Social Medias
FacebookLike
XFollow
YoutubeSubscribe
TelegramFollow
Popular News
उत्तराखंडफीचर्ड

कैंसर से जंग लड़ रही महिला पर दोहरी मार! तिलवाड़ा में खुदाई से चार मंजिला मकान पर मंडराया खतरा, बेबस प्रभा सकलानी ने CM धामी से लगाई न्याय की गुहार

The Hill India News
The Hill India News
October 10, 2026
दून की बासमती पर कंक्रीट का कब्जा! कभी दुनिया में महक बिखेरने वाले धान के खेत सिमटे, अब 160 किसानों के भरोसे विरासत बचाने की जंग
देहरादून में महिला के अपहरण की साजिश, हरिद्वार में तमंचे के दम पर लूट! 5 हजार का इनामी ‘पंडित’ गिरफ्तार, चार आरोपियों के जुड़े तार
एशियन गेम्स में भारत का ‘गोल्डन’ आगाज, महिला रिकर्व तीरंदाजी टीम ने रचा इतिहास; दक्षिण कोरिया को हराकर जीता स्वर्ण
कोटद्वार में ‘मोहम्मद’ दीपक की गिरफ्तारी से फिर गरमाया विवाद, दुकान में घुसकर बदसलूकी का आरोप; व्यापारियों ने कोतवाली में दिया धरना
गांधी-शास्त्री जयंती पर देशभर में गूंजा श्रद्धा और संकल्प का संदेश, राष्ट्रपति मुर्मू से PM मोदी तक ने दी श्रद्धांजलि
UPL क्लोजिंग से पहले गरमाया विवाद: मासूम शर्मा के शो के खिलाफ UKD का प्रदर्शन, स्टेडियम के बाहर नारेबाजी से बढ़ा सियासी पारा
हरिद्वार को बड़ी सौगात: अब यहीं तैयार होंगे MBBS डॉक्टर, ESI मेडिकल कॉलेज को मिली मंजूरी; 50 सीटों से होगी शुरुआत
‘एक कचौड़ी, दो समोसा… इन मर्दों का क्या भरोसा’ से ‘नारी अपने आप की’ तक, दिल्ली की सड़कों पर गूंजा Gen Z का गुस्सा; DU-JNU-जामिया की छात्राओं ने उठाए महिला सुरक्षा पर सवाल
सूखती धाराओं से फिर बहने लगी हेवल नदी… उत्तराखंड के IFS धर्म सिंह मीणा को Eco-Warrior Award 2026, वैज्ञानिक मॉडल ने बदली जलस्रोतों की तस्वीर
© The Hill India. All Rights Reserved | Developed By: Tech Yard Labs
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?