
हल्द्वानी/लालकुआं: उत्तराखंड के नैनीताल जिले की अहम नगर पंचायत लालकुआं इस समय भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों और प्रशासनिक जांच के केंद्र में है। विकास कार्यों के नाम पर सरकारी धन के कथित बंदरबांट की शिकायतों का संज्ञान लेते हुए जिला प्रशासन ने अब अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। जिलाधिकारी (DM) नैनीताल ललित मोहन रयाल के कड़े रुख के बाद, सिटी मजिस्ट्रेट एपी बाजपेयी ने स्वयं मोर्चा संभालते हुए लालकुआं नगर पंचायत में दस्तक दी है।
अधिकारियों और कर्मचारियों से लंबी पूछताछ के साथ ही अब यह मामला सार्वजनिक हो गया है, जहाँ प्रशासन ने आम जनता से भी इस भ्रष्टाचार के खिलाफ साक्ष्य प्रस्तुत करने की अपील की है।
जांच की जद में चार प्रमुख मामले
लालकुआं नगर पंचायत में चल रही इस जांच का दायरा काफी विस्तृत है। मुख्य रूप से चार ऐसे बिंदु हैं जिन पर वित्तीय अनियमितताओं के गहरे आरोप लगे हैं:
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डस्टबिन खरीद में नियमों की अनदेखी: आरोप है कि करीब 3 लाख रुपये की लागत से डस्टबिन खरीदे गए, लेकिन इसके लिए अनिवार्य निविदा (Tender) प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। बिना कोटेशन और मनमाने ढंग से की गई इस खरीदारी ने विभागीय पारदर्शिता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
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शौचालयों का ‘अजीब’ पुनर्निर्माण: नगर पंचायत के विभिन्न वार्डों में मात्र 5 साल पहले बने शौचालयों को ध्वस्त कर दिया गया और उनकी जगह दोबारा निर्माण कराया गया। सवाल यह उठ रहा है कि जो शौचालय अभी अच्छी स्थिति में थे, उन्हें तोड़ने की जरूरत क्यों पड़ी? क्या यह महज बजट खपाने की एक कोशिश थी?
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छठ पूजा स्थल निर्माण विवाद: स्थानीय छठ पूजा स्थल पर कराए गए पुनर्निर्माण कार्य के औचित्य और उसकी आवश्यकता को लेकर भी प्रशासन को शिकायतें मिली हैं। इस निर्माण कार्य की लागत और कार्य की गुणवत्ता अब संदेह के घेरे में है।
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अलाव के लिए लकड़ी की ‘असामान्य’ खपत: वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान शीतकाल में अलाव जलाने के लिए मंगवाई गई लकड़ी के बिलों ने अधिकारियों को चौंका दिया है। कागजों पर लकड़ी की खपत इतनी अधिक दिखाई गई है जो सामान्य से कहीं ज्यादा है। इसके भुगतान की पारदर्शिता अब जांच का मुख्य बिंदु है।

सिटी मजिस्ट्रेट की सार्वजनिक सूचना: 16 मई तक का समय
सिटी मजिस्ट्रेट एपी बाजपेयी ने लालकुआं पहुंचकर न केवल फाइलों का निरीक्षण किया, बल्कि कर्मचारियों से भी बंद कमरे में जानकारी ली। लालकुआं नगर पंचायत भ्रष्टाचार जांच को और अधिक पारदर्शी बनाने के लिए सिटी मजिस्ट्रेट कार्यालय की ओर से एक सार्वजनिक सूचना जारी की गई है।
इस सूचना के माध्यम से क्षेत्र की जनता, सामाजिक कार्यकर्ताओं और शिकायतकर्ताओं को आमंत्रित किया गया है कि यदि उनके पास डस्टबिन खरीद, निर्माण कार्य या लकड़ी खपत से जुड़े कोई भी तथ्य, वीडियो, फोटो या दस्तावेज (साक्ष्य) मौजूद हैं, तो वे 16 मई 2026 तक कार्यालय अवधि में सिटी मजिस्ट्रेट कार्यालय, हल्द्वानी पहुंचकर उन्हें प्रस्तुत कर सकते हैं। प्रशासन का मानना है कि जनभागीदारी से जांच और भी पुख्ता होगी।
डीएम के आदेश के बाद सक्रिय हुआ तंत्र
इस पूरे मामले की पटकथा तब शुरू हुई जब लालकुआं के कुछ जागरूक नागरिकों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल को एक विस्तृत शिकायती पत्र सौंपा था। शिकायतों में आरोप लगाया गया था कि नगर पंचायत में नियमों को दरकिनार कर चहेते ठेकेदारों को लाभ पहुँचाया जा रहा है और वित्तीय अनुशासन की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।
मामले की गंभीरता और सार्वजनिक धन की बर्बादी की आशंका को देखते हुए डीएम ने इसे ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति के तहत लिया और तत्काल सिटी मजिस्ट्रेट हल्द्वानी को जांच अधिकारी नियुक्त कर विस्तृत रिपोर्ट तलब की।
भ्रष्टाचार के आरोपों पर उठते सवाल
नगर पंचायत लालकुआं के गलियारों में अब सन्नाटा पसरा है। सूत्रों की मानें तो जांच के दौरान कई ऐसे अभिलेख मिले हैं जिनमें तारीखों और हस्ताक्षरों में विसंगतियां हैं। विशेष रूप से डस्टबिन खरीद वाले मामले में बिना टेंडर के भुगतान की प्रक्रिया ने लेखा विभाग को भी कटघरे में खड़ा कर दिया है। इसके अलावा, 5 साल पुराने मजबूत शौचालयों को ‘जर्जर’ बताकर गिराने के पीछे की इंजीनियरिंग रिपोर्ट पर भी अब सवालिया निशान लग रहे हैं।
भविष्य की कार्रवाई: क्या गिरेंगी गाज?
जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, नगर पंचायत के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों और संबंधित ठेकेदारों की धड़कनें तेज हो गई हैं। सिटी मजिस्ट्रेट एपी बाजपेयी ने संकेत दिए हैं कि जांच पूरी होने के बाद यदि भ्रष्टाचार के आरोप सही पाए जाते हैं, तो दोषियों के खिलाफ न केवल विभागीय कार्रवाई की जाएगी, बल्कि गबन की गई राशि की वसूली और जरूरत पड़ने पर एफआईआर (FIR) भी दर्ज कराई जाएगी।
लालकुआं की जनता अब 16 मई का इंतजार कर रही है, जब सिटी मजिस्ट्रेट के सामने साक्ष्य रखे जाएंगे। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि विकास कार्यों के नाम पर टैक्स के पैसों का दुरुपयोग कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।



