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नैनीताल में ‘अवैध’ होमस्टे पर प्रशासन का बड़ा प्रहार: 169 सेंटरों में मिलीं भारी अनियमितताएं, बिना रजिस्ट्रेशन चल रहे 44 पर गिरेगी गाज

नैनीताल: सरोवर नगरी नैनीताल और इसके आसपास के शांत पर्यटन स्थलों में ‘होमस्टे’ के नाम पर चल रहे अवैध कारोबार के खिलाफ जिला प्रशासन ने अब तक की सबसे बड़ी सर्जिकल स्ट्राइक की है। आगामी पर्यटन सीजन में पर्यटकों की सुरक्षा और सुविधा को सुनिश्चित करने के लिए जिलाधिकारी (DM) ललित मोहन रयाल के सख्त निर्देश पर जिले भर में सघन छापेमारी अभियान चलाया गया।

इस कार्रवाई ने जिले के पर्यटन क्षेत्र में हड़कंप मचा दिया है। शुरुआती आंकड़ों के अनुसार, जांच के दायरे में आए 197 होमस्टे और गेस्ट हाउसों में से 169 में गंभीर अनियमितताएं पाई गई हैं। प्रशासन की इस सख्ती ने स्पष्ट कर दिया है कि नियमों को ताक पर रखकर पर्यटकों की सुरक्षा से खिलवाड़ करने वालों के दिन अब लद चुके हैं।

छापेमारी का गणित: 197 में से 169 निकले ‘दोषी’

जिला प्रशासन की संयुक्त टीमों ने नैनीताल के अलावा भीमताल, रामगढ़ और मुक्तेश्वर जैसे प्रमुख पर्यटन केंद्रों पर एक साथ दबिश दी। इस औचक निरीक्षण का उद्देश्य होमस्टे नियमावली के जमीनी अनुपालन को परखना था। जांच में जो तथ्य सामने आए, वे चौंकाने वाले हैं:

  • कुल 197 प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया गया।

  • इनमें से 169 होमस्टे में मानकों का उल्लंघन पाया गया।

  • 44 होमस्टे ऐसे मिले, जिनका सरकार के पास कोई पंजीकरण (Registration) ही नहीं था।

  • 125 होमस्टे ‘वर्ष 2015 की होमस्टे नियमावली’ के निर्धारित मानकों की धज्जियां उड़ाते पाए गए।

नियमों की अनदेखी: मालिक गायब, पार्किंग नदारद

एसडीएम नैनीताल, नवाजिश खालिक ने इस अभियान का नेतृत्व करते हुए बताया कि निरीक्षण के दौरान कई बुनियादी नियमों का उल्लंघन पाया गया है। होमस्टे योजना की मूल भावना यह है कि संचालक स्वयं उसी भवन में निवास करेगा, ताकि पर्यटकों को कुमाऊंनी संस्कृति और आतिथ्य का वास्तविक अनुभव मिल सके।

हालांकि, छापेमारी में पाया गया कि कई स्थानों पर संचालक खुद वहां मौजूद ही नहीं थे और भवनों को कमर्शियल होटलों की तरह चलाया जा रहा था। इसके अलावा, अधिकांश होमस्टे में पार्किंग की उचित व्यवस्था नहीं थी, जिसके कारण सड़कों पर जाम की स्थिति पैदा हो रही थी। प्रशासन ने इसे नैनीताल होमस्टे अवैध संचालन कार्रवाई के तहत एक गंभीर अपराध माना है।

रोजगार के नाम पर खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं

एसडीएम नवाजिश खालिक ने स्पष्ट किया कि उत्तराखंड सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में पर्यटन को बढ़ावा देने और स्थानीय युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए होमस्टे योजना की शुरुआत की थी। सरकार की मंशा स्थानीय लोगों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की थी, लेकिन कुछ लोग इस योजना का दुरुपयोग कर रहे हैं।

प्रशासन को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि बिना अनुमति के चल रहे इन होमस्टे में पर्यटकों के साथ दुर्व्यवहार और अभद्रता की घटनाएं हो रही हैं। पंजीकरण न होने के कारण इन संचालकों पर अंकुश लगाना मुश्किल हो रहा था, लेकिन अब प्रशासन ने इन पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है ताकि देवभूमि आने वाले किसी भी पर्यटक की जान और सम्मान के साथ खिलवाड़ न हो।

पर्यटकों की सुरक्षा सर्वोपरि

पर्यटन सीजन के दौरान नैनीताल में भारी भीड़ उमड़ती है। ऐसे में बिना पार्किंग और बिना सुरक्षा मानकों के चल रहे होमस्टे न केवल कानून का उल्लंघन हैं, बल्कि सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी ‘टाइम बम’ की तरह हैं। कई होमस्टे संकरी गलियों और संवेदनशील ढलानों पर बिना फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट के चल रहे हैं। जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने स्पष्ट किया है कि पर्यटकों की सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

अगला कदम: नोटिस और लाइसेंस निरस्तीकरण

प्रशासन की यह कार्रवाई केवल छापेमारी तक सीमित नहीं रहने वाली है। एसडीएम कार्यालय के अनुसार, सभी 169 अनियमित होमस्टे संचालकों की सूची तैयार कर जिलाधिकारी को सौंप दी गई है। अब इन सभी को औपचारिक नोटिस जारी कर जवाब तलब किया जा रहा है।

यदि निर्धारित समय के भीतर संचालक संतोषजनक उत्तर नहीं देते हैं या मानकों को पूरा नहीं करते हैं, तो उनके लाइसेंस निरस्त करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। साथ ही, बिना पंजीकरण के चल रहे 44 होमस्टे पर भारी जुर्माना लगाने और उन्हें पूरी तरह सील करने की तैयारी भी की जा रही है।

स्थानीय लोगों और पर्यटकों के लिए संदेश

जिला प्रशासन ने आम जनता और विशेष रूप से पर्यटकों से अपील की है कि वे बुकिंग करने से पहले यह सुनिश्चित कर लें कि संबंधित होमस्टे पर्यटन विभाग में पंजीकृत है या नहीं। वहीं, वैध रूप से होमस्टे चला रहे स्थानीय निवासियों को प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि उन्हें परेशान नहीं किया जाएगा, बल्कि नियम सम्मत कार्य करने वालों को प्रोत्साहित किया जाएगा।

नैनीताल जिला प्रशासन का यह ‘क्लीन-अप’ अभियान आने वाले दिनों में और तेज होने की उम्मीद है। इससे न केवल पर्यटन क्षेत्र में पारदर्शिता आएगी, बल्कि उत्तराखंड की छवि एक सुरक्षित और व्यवस्थित पर्यटन गंतव्य के रूप में और मजबूत होगी।

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