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आदि कैलाश यात्रा 2026: धारचूला में प्रशासन और टैक्सी यूनियन के बीच बनी सहमति, चक्का जाम का संकट टला

पिथौरागढ़/धारचूला: उत्तराखंड के सीमांत जिले पिथौरागढ़ में आदि कैलाश यात्रा 2026 के सफल संचालन के बीच उपजा गतिरोध फिलहाल शांत हो गया है। धारचूला में स्थानीय टैक्सी यूनियन और व्यापारियों द्वारा प्रस्तावित 11 मई का चक्का जाम प्रशासन के साथ हुई एक महत्वपूर्ण बैठक के बाद स्थगित कर दिया गया है। तहसील प्रशासन और परिवहन विभाग ने स्थानीय हितधारकों की मांगों पर सकारात्मक रुख अपनाते हुए उचित कार्रवाई का ठोस आश्वासन दिया है, जिससे तीर्थयात्रियों और स्थानीय प्रशासन ने राहत की सांस ली है।

बाहरी वाहनों के संचालन पर उपजा था विवाद

विवाद का मुख्य केंद्र आदि कैलाश यात्रा 2026 के दौरान बाहरी राज्यों से आने वाली टैक्सियों और निजी वाहनों का अनियंत्रित संचालन था। धारचूला तहसील मुख्यालय में आयोजित उच्च स्तरीय बैठक में टैक्सी यूनियन के पदाधिकारियों ने स्पष्ट रूप से अपनी नाराजगी दर्ज कराई। यूनियन का तर्क है कि बाहरी राज्यों की टैक्सियां न केवल नियमों का उल्लंघन कर रही हैं, बल्कि वे सीधे तौर पर स्थानीय टैक्सी संचालकों, छोटे व्यापारियों और होमस्टे स्वामियों के आर्थिक हितों पर चोट कर रही हैं।

स्थानीय संचालकों के अनुसार, यात्रा सीजन ही उनके पूरे साल की आजीविका का मुख्य स्रोत होता है। ऐसे में बाहरी व्यावसायिक वाहनों के सीधे प्रवेश से स्थानीय स्वरोजगार मॉडल को गंभीर खतरा पैदा हो गया था।

प्रशासन की सख्ती: हिल लाइसेंस और दस्तावेजों की होगी सघन जांच

बैठक के दौरान परिवहन विभाग (RTO) और पुलिस प्रशासन ने स्थानीय यूनियन को आश्वस्त किया है कि अब नियमों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। एआरटीओ (ARTO) अभिनव गड़कोटी ने कड़े तेवर अपनाते हुए कहा:

“एक संयुक्त टीम का गठन किया गया है जो तवाघाट चौराहे पर मुस्तैदी से तैनात रहेगी। बाहरी राज्यों से आने वाले सभी व्यावसायिक वाहनों के ‘हिल लाइसेंस’ और अन्य तकनीकी दस्तावेजों की गहनता से जांच की जाएगी। इसके अतिरिक्त, सबसे महत्वपूर्ण कार्रवाई उन निजी वाहनों पर होगी जो अवैध रूप से यात्रियों का व्यावसायिक परिवहन कर रहे हैं।”

व्यापार मंडल और यूनियन ने वापस लिए विरोध के स्वर

प्रशासनिक आश्वासन के बाद धारचूला व्यापार मंडल ने भी अपना समर्थन वापस लेते हुए बाजार बंद के निर्णय को टाल दिया है। व्यापार मंडल अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह थापा ने कहा कि वे पर्यटन के विरोधी नहीं हैं, लेकिन स्थानीय लोगों के रोजगार की बलि देकर बाहरी व्यवसायों को बढ़ावा देना भी उचित नहीं है।

वहीं, आदि कैलाश टैक्सी यूनियन के अध्यक्ष प्रवेश नबियाल ने आधिकारिक पुष्टि करते हुए कहा कि चक्का जाम का कार्यक्रम फिलहाल स्थगित कर दिया गया है क्योंकि परिवहन विभाग और पुलिस ने संयुक्त रूप से प्रभावी चेकिंग का भरोसा दिलाया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस कदम से स्थानीय युवाओं के रोजगार को सुरक्षा मिलेगी।

बैठक में मौजूद रहे प्रमुख अधिकारी और प्रतिनिधि

समाधान निकालने के लिए आयोजित इस बैठक में तहसीलदार दमन सिंह राणा, कोतवाल हरेंद्र सिंह नेगी सहित प्रशासन के आला अधिकारी मौजूद रहे। साथ ही टूर ऑपरेटर हरीश कुटियाल, गुलाब कुटियाल, बृजेश नबियाल और आदित्य गर्व्याल जैसे प्रमुख चेहरों ने भी स्थानीय पक्ष को मजबूती से रखा। प्रशासन ने जोर दिया कि आदि कैलाश यात्रा 2026 की छवि को किसी भी प्रकार के आंतरिक विवाद से नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए।

आदि कैलाश: शिव की तपस्थली और आस्था का केंद्र

उल्लेखनीय है कि इस वर्ष की आदि कैलाश एवं ओम पर्वत यात्रा का विधिवत आगाज़ 1 मई से हो चुका है। अब तक सैकड़ों श्रद्धालु व्यास घाटी में स्थित भगवान शिव और माता पार्वती की इस पावन तपस्थली के दर्शन कर चुके हैं। पिथौरागढ़ जिले के दुर्गम लेकिन मनोरम क्षेत्र में स्थित आदि कैलाश को हिंदू धर्म में विशेष स्थान प्राप्त है।

मान्यता है कि यह भगवान शिव का प्राचीन निवास स्थान है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पिछले दौरे के बाद इस क्षेत्र में बुनियादी ढांचे का तेजी से विकास हुआ है, जिसके परिणामस्वरूप यात्रियों की संख्या में भारी उछाल आया है। यात्रा की संवेदनशीलता और सुरक्षा को देखते हुए प्रशासन अब किसी भी प्रकार की अव्यवस्था से बचने के लिए ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपना रहा है।

सुगम यात्रा की उम्मीद

धारचूला में चक्का जाम टलने से यात्रा मार्ग पर यातायात सामान्य बना हुआ है। हालांकि, स्थानीय यूनियन ने यह भी संकेत दिया है कि यदि प्रशासन के वादे धरातल पर नहीं उतरे, तो वे भविष्य में फिर से आंदोलन का रुख कर सकते हैं। फिलहाल, आदि कैलाश यात्रा 2026 अपने पूरे उत्साह के साथ जारी है और प्रशासन मुसाफिरों की सुरक्षा व सुविधा सुनिश्चित करने में जुटा है।

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