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शुभेंदु अधिकारी PA हत्याकांड: बंगाल से धनबाद तक फैला जांच का जाल; हत्यारों ने इस्तेमाल की थी फर्जी नंबर प्लेट, SIT का बड़ा खुलासा

धनबाद/कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में भूचाल लाने वाले चंद्रनाथ रथ हत्याकांड की आंच अब पड़ोसी राज्य झारखंड तक पहुंच गई है। बंगाल के नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी के बेहद करीबी और निजी सहायक (PA) चंद्रनाथ रथ की सनसनीखेज हत्या के मामले में बंगाल पुलिस की विशेष जांच दल (SIT) ने धनबाद में दस्तक दी है। जांच में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि पेशेवर हत्यारों ने पुलिस को चकमा देने के लिए धनबाद के एक निर्दोष व्यक्ति की बाइक के नंबर का उपयोग ‘फर्जी नंबर प्लेट’ के रूप में किया था।

धनबाद में SIT की आधी रात को छापेमारी

बंगाल पुलिस की एक उच्च स्तरीय एसआईटी टीम शुक्रवार की देर रात कोयलांचल धनबाद पहुंची। टीम सीधे पाथरडीह थाना पहुंची और स्थानीय पुलिस के सहयोग से जांच को आगे बढ़ाया। दरअसल, बंगाल में वारदात स्थल के आसपास मिले तकनीकी सुरागों और सीसीटीवी फुटेज में एक बाइक का नंबर ‘JH’ (झारखंड) सीरीज का पाया गया था। जब इस नंबर को रजिस्टर्ड डेटाबेस में खंगाला गया, तो इसके तार धनबाद के पाथरडीह क्षेत्र से जुड़े मिले।

फर्जी नंबर प्लेट का खेल: सेल कर्मचारी की बाइक का नंबर चोरी

जांच में पता चला कि अपराधियों द्वारा इस्तेमाल किया गया नंबर धनबाद के चासनाला स्थित सेल (SAIL) कार्यालय में कार्यरत एक कर्मचारी, विभाष भट्टाचार्य की बाइक का है। विभाष मूल रूप से बंगाल के बर्नपुर के रहने वाले हैं और वर्तमान में धनबाद में कार्यरत हैं।

SIT ने जब विभाष के घर पहुंचकर बाइक का भौतिक सत्यापन किया, तो सच्चाई कुछ और ही निकली। विभाष की बाइक उनके घर पर ही खड़ी थी और उसका रंग व मॉडल अपराधियों की बाइक से बिल्कुल अलग था। यह स्पष्ट हो गया कि शातिर शूटरों ने विभाष की बाइक का नंबर केवल कागजों पर या फर्जी प्लेट बनाकर अपनी बाइक पर चिपकाया था ताकि पुलिस की जांच झारखंड के गलियारों में भटकती रहे।

सीसीटीवी और ‘क्लीन चिट’

पूछताछ के दौरान विभाष भट्टाचार्य ने अपनी बेगुनाही के सबूत पेश किए। उन्होंने बताया कि जिस वक्त 6 मई की रात को बंगाल के मध्यमग्राम में यह वारदात हुई, उस समय वे अपने कार्यालय में ड्यूटी पर तैनात थे। एसआईटी ने जब सेल कार्यालय और आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले, तो विभाष के दावे सच पाए गए। इसके बाद पुलिस ने उन्हें क्लीन चिट दे दी, लेकिन इस खुलासे ने जांच की दिशा बदल दी है कि हत्यारों ने बेहद शातिराना तरीके से ‘नंबर क्लोनिंग’ का सहारा लिया था।

वारदात का फ्लैशबैक: 6 मई की वह काली रात

चंद्रनाथ रथ हत्याकांड ने चुनावी नतीजों के तुरंत बाद बंगाल की कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे। 6 मई की रात, उत्तर 24 परगना जिले के मध्यमग्राम में एक व्यस्त सड़क पर चंद्रनाथ रथ अपनी कार में सवार थे। तभी बाइक सवार हमलावरों ने उन्हें घेर लिया और बेहद करीब से गोलियां बरसा दीं। हमला इतना सटीक और पेशेवर था कि हमलावरों को पता था कि रथ कार के अंदर किस तरफ बैठे हैं। मौके पर ही उनकी मृत्यु हो गई थी।

पेशेवर शूटरों का हाथ, तीन हिरासत में

एसआईटी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कहा, यह कोई सामान्य अपराध नहीं है। हमलावरों ने सटीक योजना बनाई थी। उन्होंने बंगाल के बाहर (झारखंड) की नंबर प्लेट का इस्तेमाल इसलिए किया ताकि प्रारंभिक जांच में भ्रम पैदा हो सके।” पुलिस को संदेह है कि इस हत्याकांड के पीछे पेशेवर ‘कॉन्ट्रैक्ट किलर्स’ का हाथ है, जिन्हें बाहरी राज्यों से बुलाया गया था।

वर्तमान में पुलिस ने तीन संदिग्धों को हिरासत में लिया है। हालांकि, आधिकारिक रूप से अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं दिखाई गई है, लेकिन हिरासत में लिए गए लोगों से मिली जानकारी के आधार पर बंगाल और झारखंड के सीमावर्ती इलाकों में छापेमारी तेज कर दी गई है।

राजनीतिक गलियारों में हलचल

चूंकि मृतक चंद्रनाथ रथ बीजेपी के कद्दावर नेता शुभेंदु अधिकारी के निजी सहायक थे, इसलिए इस मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। शुभेंदु अधिकारी ने इस घटना को राजनीतिक प्रतिशोध बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की थी। अब झारखंड कनेक्शन सामने आने के बाद यह मामला दो राज्यों के बीच पुलिस समन्वय का केंद्र बन गया है।

धनबाद में हुई इस छापेमारी के बाद अब बंगाल पुलिस उन रास्तों की तलाश कर रही है जहां से ये शूटर बंगाल में दाखिल हुए थे। फर्जी नंबर प्लेट के इस खुलासे ने यह भी चेतावनी दी है कि अपराधी अब किस तरह से आम नागरिकों की पहचान का दुरुपयोग कर रहे हैं। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या एसआईटी इन शूटरों तक पहुंच पाती है या यह मामला केवल ‘फर्जी नंबर प्लेट’ के जाल में उलझकर रह जाता है।

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