चमोली (उत्तराखंड): उत्तराखंड के सीमांत जनपदों में रहने वाले काश्तकारों के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर स्थापित हुआ है। उत्तराखंड औद्यानिक परिषद ने भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के साथ एक विशेष अनुबंध किया है, जिसके तहत अब स्थानीय किसान अपने खेतों में उपजी ताजी सब्जियों का सीधा विपणन ITBP को कर सकेंगे। इस पहल से जहाँ दुर्गम क्षेत्रों में तैनात देश के प्रहरियों को रसायनों से मुक्त ताजी हरी सब्जियां मिलेंगी, वहीं बिचौलियों की भूमिका समाप्त होने से काश्तकारों की आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
1 अप्रैल से हुई शुरुआत, 8 मई को रवाना हुई पहली खेप
राज्य सरकार की योजनाबद्ध रणनीति के तहत, उत्तराखंड औद्यानिक परिषद ने बीती 1 अप्रैल 2026 को स्थानीय काश्तकारों से सब्जी क्रय करने के लिए औपचारिक अनुबंध किया था। इसी क्रम में आज, 8 मई 2026 को ज्योतिर्मठ (जोशीमठ) के बड़ागांव स्थित ‘भद्रेश्वर कृषक उत्पादक संगठन’ (FPO) की ओर से सब्जी विपणन की प्रक्रिया का विधिवत शुभारंभ कर दिया गया।
उप जिलाधिकारी चंद्रशेखर वशिष्ठ ने इस योजना के तहत ताजी सब्जियों से लदे पहले वाहन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। पहली खेप में काश्तकारों ने 50 किलोग्राम मटर, 8 किलोग्राम लहसुन, 50 किलोग्राम राई, 5 किलोग्राम धनिया और 5 किलोग्राम चुकंदर की आपूर्ति ITBP को की। इस शुरुआती खेप से ही स्थानीय किसानों को 9,000 रुपये की सीधी आय प्राप्त हुई है, जो इस मॉडल की सफलता का संकेत है।
बिचौलियों से मुक्ति और उचित मूल्य का भरोसा
इस अनुबंध ने स्थानीय किसानों के जीवन में नई उम्मीद जगाई है। लंबे समय से बाजार और परिवहन की कमी के कारण काश्तकारों को अपने उत्पाद औने-पौने दामों पर बेचने पड़ते थे या फसल खेतों में ही खराब हो जाती थी। स्थानीय काश्तकार मोहन सिंह कम्दी और सुखदेव सिंह ने खुशी जाहिर करते हुए कहा, “अब हमें अपने उत्पादों के लिए दूर की मंडियों या बाजारों में भटकने की जरूरत नहीं है। सरकार के इस अनुबंध से हमें न केवल घर के पास बाजार मिला है, बल्कि हमारे पसीने का उचित मूल्य भी सुनिश्चित हुआ है।”
क्या कहते हैं अधिकारी?
ज्योतिर्मठ के ज्येष्ठ उद्यान निरीक्षक सोमेश भंडारी ने इस पहल को चमोली के कृषि परिदृश्य के लिए क्रांतिकारी बताया। उन्होंने कहा, “उत्तराखंड औद्यानिक परिषद के इस अनुबंध के माध्यम से हमने कृषक संगठनों को सीधे सुरक्षा बलों की रसद व्यवस्था से जोड़ दिया है। यह मॉडल न केवल किसानों की आय बढ़ाएगा, बल्कि रिवर्स माइग्रेशन (पलायन रोकने) में भी सहायक सिद्ध होगा।“
सामरिक और आर्थिक समन्वय का अनूठा उदाहरण
यह समझौता केवल एक व्यापारिक अनुबंध नहीं है, बल्कि यह सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण सीमांत क्षेत्रों के विकास का एक एकीकृत मॉडल है। ITBP के जवानों को अब मैदानी इलाकों से हफ्तों पुरानी सब्जियों के आने का इंतजार नहीं करना होगा। स्थानीय स्तर पर मटर, राई और चुकंदर जैसी पौष्टिक सब्जियों की उपलब्धता उनकी सेहत के लिए भी बेहतर होगी। प्रशासन का लक्ष्य आने वाले समय में जिले के अन्य कृषक समूहों को भी इस योजना के दायरे में लाना है।



