By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
The Hill IndiaThe Hill IndiaThe Hill India
Notification Show More
Font ResizerAa
  • होम
  • फीचर्ड
  • उत्तराखंड
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • पर्यावरण
  • क्राइम
  • पर्यटन
  • शिक्षा
  • स्वास्थय
  • सामाजिक
  • स्पोर्ट्स
  • वीडियो
  • Contact Us
Reading: डेयरी क्षेत्र में ‘पिंक रिवॉल्यूशन’: स्वदेशी ‘गौसॉर्ट’ तकनीक से बदली किसानों की किस्मत, 91% बछियों के जन्म ने रचा इतिहास
Share
Font ResizerAa
The Hill IndiaThe Hill India
  • होम
  • फीचर्ड
  • उत्तराखंड
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • पर्यावरण
  • क्राइम
  • पर्यटन
  • शिक्षा
  • स्वास्थय
  • सामाजिक
  • स्पोर्ट्स
  • वीडियो
  • Contact Us
Search
  • होम
  • फीचर्ड
  • उत्तराखंड
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • पर्यावरण
  • क्राइम
  • पर्यटन
  • शिक्षा
  • स्वास्थय
  • सामाजिक
  • स्पोर्ट्स
  • वीडियो
  • Contact Us
Have an existing account? Sign In
Follow US
The Hill India > Blog > देश > डेयरी क्षेत्र में ‘पिंक रिवॉल्यूशन’: स्वदेशी ‘गौसॉर्ट’ तकनीक से बदली किसानों की किस्मत, 91% बछियों के जन्म ने रचा इतिहास
देशफीचर्ड

डेयरी क्षेत्र में ‘पिंक रिवॉल्यूशन’: स्वदेशी ‘गौसॉर्ट’ तकनीक से बदली किसानों की किस्मत, 91% बछियों के जन्म ने रचा इतिहास

The Hill India News
Last updated: May 8, 2026 2:50 am
The Hill India News
Published: May 8, 2026
Share
File Photo
SHARE

नई दिल्ली/वाराणसी: भारत के डेयरी सेक्टर में एक ऐसी तकनीकी क्रांति ने दस्तक दी है, जो न केवल दूध उत्पादन के पुराने कीर्तिमानों को ध्वस्त कर रही है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ को भी अभूतपूर्व मजबूती प्रदान कर रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अक्टूबर 2024 में लॉन्च की गई स्वदेशी जेंडर सॉर्टेड सीमेन तकनीक, जिसे ‘गौसॉर्ट’ (GauSort) नाम दिया गया है, अब पशु प्रजनन के क्षेत्र में गेम-चेंजर साबित हो रही है। इस तकनीक की सफलता का सबसे बड़ा प्रमाण उत्तर प्रदेश के वाराणसी और पश्चिमी जिलों से सामने आया है, जहाँ इस तकनीक के माध्यम से पैदा होने वाले पशुओं में बछियों की संख्या 91 प्रतिशत तक पहुँच गई है।

Contents
क्या है गौसॉर्ट तकनीक और क्यों है यह क्रांतिकारी?प्रोजेक्ट गिर वाराणसी: सफलता का वैश्विक मॉडलपश्चिमी उत्तर प्रदेश में भी सफलता की गूँजकिसानों की आय में स्थायी वृद्धि का आधारराष्ट्रीय गोकुल मिशन और भविष्य की राह

क्या है गौसॉर्ट तकनीक और क्यों है यह क्रांतिकारी?

गौसॉर्ट तकनीक को राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) द्वारा भारत सरकार के पशुपालन और दुग्ध उत्पादन विभाग के सहयोग से पूरी तरह स्वदेशी रूप से विकसित किया गया है। राष्ट्रीय गोकुल मिशन के तहत संचालित यह पहल ‘एनडीडीबी डेयरी सर्विसेज’ द्वारा जमीनी स्तर पर लागू की जा रही है।

पारंपरिक गर्भाधान पद्धतियों में बछड़ा या बछिया होने की संभावना 50-50 प्रतिशत रहती थी। डेयरी किसानों के लिए नर बछड़े अक्सर आर्थिक बोझ बन जाते हैं, क्योंकि वे दूध उत्पादन नहीं करते। ‘गौसॉर्ट’ तकनीक इसी समस्या का सटीक समाधान है। यह तकनीक वीर्य (सीमेन) में मौजूद उन क्रोमोसोम्स को अलग कर देती है जो नर संतति के लिए जिम्मेदार होते हैं, जिससे 90 प्रतिशत से अधिक मामलों में केवल बछिया का ही जन्म सुनिश्चित होता है।

प्रोजेक्ट गिर वाराणसी: सफलता का वैश्विक मॉडल

प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में संचालित ‘प्रोजेक्ट गिर’ के तहत गौसॉर्ट तकनीक ने चौंकाने वाले परिणाम दिए हैं। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस तकनीक के प्रयोग से अब तक लगभग 91 प्रतिशत बछियों का जन्म हुआ है। यह सफलता केवल एक आंकड़े तक सीमित नहीं है; जब ये बछिया बड़ी होकर दुधारू गायों में परिवर्तित होंगी, तो वाराणसी और आसपास के क्षेत्रों में दूध उत्पादन में भारी उछाल देखने को मिलेगा।

एनडीडीबी के अध्यक्ष डॉ. मीनेश शाह इस पर कहते हैं, “गौसॉर्ट सिर्फ एक तकनीक नहीं है, बल्कि यह भारत के डेयरी क्षेत्र के भविष्य को नई दिशा देने वाला एक सशक्त माध्यम है। यह किफायती तकनीक किसानों को बेहतर उत्पादन, स्थिर आय और मजबूत पशुधन की ओर ले जा रही है।”

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भी सफलता की गूँज

वाराणसी के अलावा पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों में भी इस स्वदेशी तकनीक का डंका बज रहा है। मेरठ, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, बिजनौर, बुलंदशहर, हापुड़ और शामली जैसे ‘मिल्क बेल्ट’ वाले जिलों में गौसॉर्ट तकनीक के माध्यम से पशु नस्ल सुधार की दिशा में बड़े कदम उठाए गए हैं। यहाँ भी बछियों के जन्म का औसत 91 प्रतिशत दर्ज किया गया है, जिसने डेयरी व्यवसाय को अधिक व्यवस्थित और भरोसेमंद बना दिया है।

किसानों की आय में स्थायी वृद्धि का आधार

डेयरी विशेषज्ञों का मानना है कि गौसॉर्ट तकनीक सीधे तौर पर किसानों की ‘इनपुट कॉस्ट’ कम करती है। वाराणसी के एक प्रगतिशील किसान राजवीर का अनुभव इस बदलाव की कहानी कहता है। वे बताते हैं, “पहले हमें यह डर रहता था कि कहीं बछड़ा न हो जाए, क्योंकि उसे पालना मुश्किल होता था। लेकिन अब गौसॉर्ट की मदद से हमें पता है कि अधिकतर बछिया ही होंगी। इससे आने वाले समय में हमारे पास दुधारू पशुओं की संख्या बढ़ेगी और हमारी आमदनी सीधे तौर पर दोगुनी हो जाएगी।”

राष्ट्रीय गोकुल मिशन और भविष्य की राह

राष्ट्रीय गोकुल मिशन के तहत केंद्र सरकार का लक्ष्य इस तकनीक को देश के हर कोने तक पहुँचाना है। वर्तमान में इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है ताकि पशुओं की गुणवत्ता में सुधार हो और भारत दुनिया के दुग्ध बाजार में अपनी अग्रणी स्थिति को और अधिक सशक्त कर सके। गौसॉर्ट तकनीक न केवल उत्पादन बढ़ा रही है, बल्कि यह आवारा पशुओं की समस्या के समाधान की दिशा में भी एक बड़ा नीतिगत कदम है।

विशेषज्ञों का अनुमान है कि यदि इसी गति से गौसॉर्ट तकनीक का विस्तार हुआ, तो अगले पांच वर्षों में भारत का ग्रामीण परिदृश्य पूरी तरह बदल जाएगा। यह स्वदेशी तकनीक ‘आत्मनिर्भर भारत’ के सपने को धरातल पर उतारने का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जहाँ विज्ञान सीधे तौर पर किसान की समृद्धि का जरिया बन रहा है।

You Might Also Like

पिथौरागढ़ पहुँचने के बाद प्रधानमंत्री मोदी, गुंजी गांव में सेना के जवानों से मिले
Uttarakhand: मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने टिहरी जनपद में, तपोवन से कोडियाला तक राफ्टिंग व्यवस्थाओं का किया निरीक्षण
राजस्थान में ड्रम मर्डर केस: पत्नी ने आशिक संग रचा खौफनाक खेल, नीले ड्रम में मिली पति की लाश
भारत जोड़ो यात्रा में शाम‍िल केसी वेणुगोपाल को सोन‍िया गांधी ने बुलाया द‍िल्‍ली
दिल्ली एयरपोर्ट पर पकड़ी 6 किलो कोकीन, कीमत इतनी कि जान कर उड़ जाएंगे होश
TAGGED:Breed Improvement Cow FarmingDairy Farming Profit 2026GauSort Indigenous TechnologyGender Sorted Semen IndiaRashtriya Gokul Mission NDDB
Share This Article
Facebook Email Print
Leave a Comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Follow US

Find US on Social Medias
FacebookLike
XFollow
YoutubeSubscribe
TelegramFollow
Popular News
उत्तर प्रदेशफीचर्ड

राम मंदिर में कथित अनियमितताओं का खुलासा: बिना रसीद चंदा, जेवरों का हिसाब गायब, शिकायतों पर भी नहीं हुई कार्रवाई

The Hill India News
The Hill India News
June 22, 2026
उद्धव सेना में बढ़ी बेचैनी: 20 में से 14 विधायक भी शिंदे के संपर्क में! इमरजेंसी बैठक से सियासी हलचल तेज
देवभूमि महासभा का संकल्प: दुल्हनिया नदी किनारे होगा वृहद वृक्षारोपण, पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ी पहल
मसूरी मॉल रोड पर ‘अतिक्रमण हटाओ अभियान’ के दौरान हाई-वोल्टेज ड्रामा: पालिका टीम से अभद्रता और गाली-गलौज; भड़के कर्मचारियों ने घेरी कोतवाली, कार्य बहिष्कार की चेतावनी
पश्चिम बंगाल: शुभेंदु सरकार आज पेश करेगी ‘डबल इंजन’ राज का पहला पूर्ण बजट; स्वप्न दासगुप्ता के पिटारे से निकलेगा विकास का नया रोडमैप?
प्रयागराज में नाबालिग से हैवानियत करने वाला मुशर्रफ पुलिस मुठभेड़ में घायल, ट्रिपल मर्डर का आरोपी हिमांशु भी दबोचा
Weather Updates: फिर रफ्तार पकड़ेगा मानसून, 23 जून को बिहार-झारखंड समेत इन राज्यों में भारी बारिश; यूपी-विदर्भ में लू का टॉर्चर ज़ारी
उत्तराखंड: अल्मोड़ा में सीएम धामी के काफिले के आगे कूदे युवा कांग्रेस कार्यकर्ता, दिखाए काले झंडे; दन्या बाजार में भारी हंगामा
UKSSSC वाहन चालक भर्ती विवाद: मेरिट लिस्ट में ‘अजीबो-गरीब’ नामों और जेंडर पर घमासान, आयोग ने कहा- ‘अभिलेख सत्यापन में सीधे होंगे बाहर’
12वां अंतरराष्ट्रीय योग दिवस: कोलकाता के ऐतिहासिक रेड रोड से पीएम मोदी ने किया वैश्विक आंदोलन का नेतृत्व, दिया ‘हेल्दी एजिंग’ का मंत्र
© The Hill India. All Rights Reserved | Developed By: Tech Yard Labs
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?