देहरादून: उत्तराखंड में भर्ती परीक्षाओं में नकल और धांधली के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में एसटीएफ (स्पेशल टास्क फोर्स) को एक और बड़ी सफलता मिली है। एसटीएफ ने 13 फरवरी 2026 को आयोजित उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) की ऑनलाइन परीक्षा में रिमोट एक्सेस (Remote Access) के जरिए नकल कराने वाले गिरोह के मुख्य सरगना को गिरफ्तार कर लिया है। इस गिरफ्तारी के साथ ही, परीक्षा केंद्रों में सेंधमारी कर अनुचित साधनों का उपयोग करने वाले इस बड़े नेटवर्क की परतें खुलनी शुरू हो गई हैं।
क्या था पूरा मामला?
बीते 13 फरवरी 2026 को राज्य में मल्टीटास्किंग (नॉन टेक्निकल) स्टाफ और हवलदार के पदों के लिए ऑनलाइन परीक्षा आयोजित की गई थी। परीक्षा के दौरान देहरादून के एक परीक्षा केंद्र में अनुचित और तकनीकी संसाधनों का उपयोग कर नकल कराए जाने की गोपनीय सूचना उत्तराखंड एसटीएफ को प्राप्त हुई थी।
सूचना को गंभीरता से लेते हुए एसटीएफ की टीम ने तुरंत केंद्र के यूपीएस (UPS) रूम पर दबिश दी। वहां एक अंडरग्राउंड चैंबर तैयार कर सिस्टम को रिमोट एक्सेस पर लिया गया था और अभ्यर्थियों को नकल कराने का प्रयास किया जा रहा था। पुलिस ने मौके पर ही लैब और एक्सेस पार्ट को सील करते हुए दो आरोपियों—नितिश कुमार और भास्कर नैथानी—को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। इस घटना के बाद 14 फरवरी को कोतवाली नगर में मुकदमा दर्ज किया गया था और मामले की गंभीरता को देखते हुए पूरी जांच उत्तराखंड एसटीएफ को सौंप दी गई थी।
मुख्य सरगना की गिरफ्तारी
जांच के दौरान यह बात सामने आई कि इस पूरे गिरोह का संचालन एक मुख्य मास्टरमाइंड कर रहा था। तभी से एसटीएफ की टीम लगातार तकनीकी और खुफिया इनपुट के आधार पर आरोपी की तलाश में जुटी हुई थी।
एसएसपी एसटीएफ, अजय सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि चार अप्रैल 2026 को एसटीएफ की टीम ने इस गिरोह के मुख्य सरगना शुभम भटनागर को उत्तर प्रदेश के सहारनपुर से गिरफ्तार कर लिया। शुभम भटनागर मूल रूप से विजयनगर, थाना कुतुबशेर, जनपद सहारनपुर का रहने वाला है। घटना के तुरंत बाद से ही वह फरार चल रहा था और अपनी लोकेशन लगातार बदल रहा था।
नौकरी के नाम पर होती थी पैसों की वसूली
एसटीएफ की पूछताछ में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि यह गिरोह बहुत ही संगठित तरीके से काम कर रहा था। आरोपी अभ्यर्थियों को परीक्षा पास कराने का प्रलोभन देते थे। इसके बाद, चयन होने पर संबंधित पद के ग्रेड-पे के आधार पर भारी-भरकम धनराशि की मांग की जाती थी।
रिमोटली नकल कराने के लिए परीक्षा लैब के बुनियादी ढांचे में छेड़छाड़ की जाती थी, ताकि परीक्षा केंद्र के बाहर बैठकर भी कंप्यूटर स्क्रीन को एक्सेस किया जा सके। शुभम भटनागर की गिरफ्तारी के बाद, एसटीएफ को इस रैकेट से जुड़े कुछ अन्य अहम सुराग भी मिले हैं, जिनके आधार पर आगे की कानूनी और वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।
युवाओं के भविष्य और सुरक्षा पर कड़ा संदेश
इस गिरफ्तारी के बाद उत्तराखंड के युवा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों ने राहत की सांस ली है। एसटीएफ अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि नकल माफियाओं के खिलाफ राज्य सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति है और किसी भी सूरत में युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।
एसटीएफ की साइबर विंग और अन्य संबंधित एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हुई हैं कि क्या इस नेटवर्क की जड़ें राज्य के बाहर भी फैली हुई हैं और इसमें किन-किन अन्य केंद्रों के तकनीकी कर्मचारियों की मिलीभगत हो सकती है।



