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देहरादून में किन्नर समाज दो गुटों में बंटा, 5100 रुपये बधाई राशि के फैसले पर बढ़ा विवाद

The Hill India News
Last updated: May 5, 2026 12:17 pm
The Hill India News
Published: May 5, 2026
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देहरादून में नगर निगम द्वारा किन्नर समाज के लिए तय की गई बधाई धनराशि को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। नगर निगम की बोर्ड बैठक में यह फैसला लिया गया था कि शहर में किसी भी शुभ अवसर—जैसे शादी, बच्चे के जन्म या गृह प्रवेश—पर किन्नरों द्वारा ली जाने वाली बधाई राशि अधिकतम 5100 रुपये होगी। इस निर्णय के बाद अब किन्नर समाज दो अलग-अलग गुटों में बंटता दिखाई दे रहा है। एक ओर स्थानीय किन्नर समाज का बड़ा वर्ग इस फैसले का समर्थन कर रहा है, वहीं दूसरी ओर कुछ लोग इसका विरोध करते हुए इसे किन्नर समाज के अधिकारों में हस्तक्षेप बता रहे हैं।

दरअसल, देहरादून नगर निगम की तीन दिवसीय बोर्ड बैठक में सभी पार्षदों की सहमति से यह प्रस्ताव पारित किया गया था। बैठक में यह तर्क दिया गया कि कई बार लोगों से बधाई के नाम पर बहुत अधिक धनराशि मांगी जाती है, जिससे आम परिवारों पर आर्थिक बोझ पड़ता है। इसी को ध्यान में रखते हुए अधिकतम राशि 5100 रुपये तय करने का निर्णय लिया गया। नगर निगम का कहना है कि यह फैसला सामाजिक संतुलन और लोगों की सुविधा को ध्यान में रखकर लिया गया है।

फैसले के सामने आते ही शहर में बहस शुरू हो गई। किन्नर समाज की प्रमुख सदस्य रजनी रावत ने इस फैसले का कड़ा विरोध किया। उन्होंने कहा कि नगर निगम को किसी समुदाय की पारंपरिक व्यवस्था में दखल देने का अधिकार नहीं है। रजनी रावत ने चेतावनी दी कि यदि यह फैसला वापस नहीं लिया गया तो वे इस मामले को हाईकोर्ट तक लेकर जाएंगी। उनका कहना है कि यह निर्णय किन्नर समाज की स्वतंत्रता और सम्मान के खिलाफ है।

वहीं दूसरी ओर स्थानीय किन्नर समाज के कई सदस्य नगर निगम और मेयर के फैसले के समर्थन में खुलकर सामने आए हैं। समर्थन करने वाले गुट ने प्रेस वार्ता कर अपनी बात रखी। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान किन्नर करिश्मा ने कहा कि मेयर द्वारा लिया गया निर्णय समाज और आम जनता दोनों के हित में है। उन्होंने कहा कि कई परिवार आर्थिक रूप से इतने सक्षम नहीं होते कि वे 21 हजार, 31 हजार या उससे अधिक की राशि दे सकें। ऐसे में लोगों पर अनावश्यक दबाव बनता है और कई बार उन्हें मजबूरी में बड़ी रकम देनी पड़ती है।

किन्नर करिश्मा ने कहा कि किन्नर समाज का उद्देश्य लोगों की खुशियों में शामिल होना है, न कि किसी पर आर्थिक बोझ डालना। उन्होंने कहा कि यदि कोई परिवार अपनी खुशी से अधिक राशि देना चाहता है तो वह अलग बात है, लेकिन किसी तरह का दबाव नहीं होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि 5100 रुपये की सीमा तय होने से आम लोगों को राहत मिलेगी और किन्नर समाज की छवि भी सकारात्मक बनेगी।

प्रेस वार्ता के दौरान स्थानीय किन्नर समाज के सदस्यों ने देहरादून के मेयर सौरभ थपलियाल का आभार व्यक्त किया और कहा कि उन्होंने समाज के हित में साहसिक कदम उठाया है। हालांकि, उन्होंने विरोध कर रहे गुट और रजनी रावत के खिलाफ कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। उनका कहना था कि समाज के भीतर मतभेद हो सकते हैं, लेकिन विवाद को ज्यादा बढ़ाने की जरूरत नहीं है।

इस पूरे मामले के बाद अब देहरादून में किन्नर समाज के भीतर दो स्पष्ट धड़े बनते नजर आ रहे हैं। एक गुट इसे आम जनता के हित में लिया गया संतुलित फैसला बता रहा है, जबकि दूसरा गुट इसे समुदाय की परंपराओं और अधिकारों में दखल मान रहा है। आने वाले दिनों में यह विवाद और बढ़ सकता है, खासकर यदि मामला हाईकोर्ट तक पहुंचता है।

फिलहाल नगर निगम अपने फैसले पर कायम है और स्थानीय स्तर पर इस मुद्दे को लेकर चर्चा तेज हो गई है। अब देखना होगा कि प्रशासन, किन्नर समाज और विरोध कर रहे पक्षों के बीच इस विवाद का समाधान कैसे निकलता है।

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